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300 यात्रियों से भरी नाव अचानक रोकी गई! एक मौत ने खोल दिया इबोला का ऐसा राज, अब किस-किस तक पहुंचा संक्रमण?”



किंशासा। अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। संक्रमण की रफ्तार ने स्वास्थ्य अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। हालात इतने चिंताजनक हो चुके हैं कि राजधानी किंशासा के करीब एक नदी में चल रही नाव को रोककर उसमें सवार 300 से ज्यादा यात्रियों की जांच करनी पड़ी। एक यात्री की इबोला से संदिग्ध मौत के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों को आशंका हुई कि कहीं संक्रमण नाव में मौजूद दूसरे लोगों तक तो नहीं पहुंचा।

इस बीच कांगो में मौजूदा इबोला प्रकोप में पुष्ट मामलों की संख्या 4,000 के पार पहुंच चुकी है। 7 अगस्त तक उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 4,053 पुष्ट संक्रमण और 1,850 मौतें दर्ज की गई थीं। यह प्रकोप अब दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा दर्ज इबोला प्रकोप बन गया है। इससे पहले 2014 से 2016 के बीच पश्चिमी अफ्रीका में फैला इबोला प्रकोप इससे कहीं बड़ा था।

अचानक क्यों बढ़ गई चिंता?

इबोला को दुनिया की गंभीर और घातक संक्रामक बीमारियों में गिना जाता है। मौजूदा प्रकोप में Bundibugyo virus संक्रमण के पीछे है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार जुलाई के अंत तक यह बीमारी कांगो के पांच प्रांतों—इटुरी, नॉर्थ किवु, साउथ किवु, हाउट-उएले और त्शोपो—तक फैल चुकी थी।

WHO ने 30 जुलाई तक कांगो में 3,605 पुष्ट मामले और 1,587 मौतों की जानकारी दी थी। इसके बाद 7 अगस्त को कांगो के सरकारी आंकड़ों में पुष्ट मामलों की संख्या 4,053 और मौतों की संख्या 1,850 बताई गई। आंकड़ों में इतनी तेजी से वृद्धि ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

WHO के मुताबिक 30 जुलाई तक संक्रमण 49 स्वास्थ्य क्षेत्रों में पहुंच चुका था। इनमें से 33 स्वास्थ्य क्षेत्रों में हाल के सात दिनों में नए पुष्ट मामले सामने आए थे। इटुरी प्रांत सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां कुल पुष्ट मामलों का बड़ा हिस्सा दर्ज किया गया।

राजधानी के पास क्यों रोकनी पड़ी नाव?

6 अगस्त को कांगो के स्वास्थ्य अधिकारियों ने किंशासा से लगभग 65 किलोमीटर ऊपर मालुकु इलाके के पास एक नदी की नाव को रोक दिया। इस नाव में 300 से अधिक यात्री यात्रा कर रहे थे।

यह कार्रवाई उस समय की गई जब अधिकारियों को जानकारी मिली कि एक 32 वर्षीय व्यक्ति, जिसकी 25 जुलाई को संदिग्ध इबोला से मौत हुई थी, संभवतः इसी नाव से यात्रा कर चुका था।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने नाव पर मोबाइल प्रयोगशाला पहुंचाई और यात्रियों की जांच शुरू की। सभी यात्रियों का तापमान देखा गया और उनके स्वास्थ्य की स्थिति की जांच की गई। बुखार जैसे लक्षण वाले चार यात्रियों के नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए।

इस घटना ने इसलिए भी चिंता बढ़ाई क्योंकि किंशासा देश की राजधानी है और यहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। यदि किसी संक्रमित व्यक्ति के जरिए वायरस राजधानी के आसपास पहुंचता है तो संक्रमण की निगरानी और रोकथाम की चुनौती काफी बढ़ सकती है।

हालांकि किसी व्यक्ति के संदिग्ध संपर्क में आने का मतलब यह नहीं है कि वह संक्रमित हो गया है। जांच के परिणाम और आगे की निगरानी ही स्थिति स्पष्ट कर सकती है।

इबोला कैसे फैलता है?

Bundibugyo virus disease इबोला बीमारी का एक प्रकार है। WHO के अनुसार यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के रक्त, शरीर के तरल पदार्थ, अंगों या दूषित वस्तुओं के सीधे संपर्क के माध्यम से फैल सकता है।

संक्रमण की शुरुआत में बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ये लक्षण कई दूसरी बीमारियों में भी दिखाई देते हैं, जिसके कारण शुरुआती चरण में इबोला की पहचान मुश्किल हो सकती है।

इसके बाद बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और उल्टी, दस्त, शरीर के अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने तथा कुछ मामलों में रक्तस्राव जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। WHO के अनुसार बीमारी की incubation period यानी संक्रमण से लक्षण आने तक की अवधि लगभग 2 से 21 दिन हो सकती है।

यही वजह है कि संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने वालों की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

स्वास्थ्यकर्मी भी बने संक्रमण का शिकार

इबोला से लड़ने वाले स्वास्थ्यकर्मी खुद भी बड़े जोखिम का सामना कर रहे हैं। WHO के 30 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार कांगो में 151 स्वास्थ्यकर्मी संक्रमित हो चुके थे और इनमें 44 की मौत हुई थी।

स्वास्थ्यकर्मियों के संक्रमित होने से दोहरी समस्या पैदा होती है। एक तरफ मरीजों को इलाज की जरूरत होती है और दूसरी तरफ अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है।

WHO ने स्वास्थ्य केंद्रों में संक्रमण रोकने के उपायों को मजबूत करने, सुरक्षात्मक उपकरणों के इस्तेमाल और मरीजों की जल्द पहचान पर जोर दिया है।

संघर्ष और विस्थापन ने बढ़ाई मुश्किल

कांगो पहले से ही लंबे समय से संघर्ष और मानवीय संकट का सामना कर रहा है। कई क्षेत्रों में हिंसा और असुरक्षा के कारण स्वास्थ्यकर्मियों और राहत टीमों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

WHO के अनुसार आबादी का विस्थापन, लोगों की लगातार आवाजाही और सीमापार आवागमन संक्रमण के फैलने का जोखिम बढ़ा रहे हैं। विस्थापित लोगों के शिविरों में भीड़भाड़ और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बनाती है।

ऐसे वातावरण में किसी संक्रमित व्यक्ति की पहचान देर से होने पर वह कई लोगों के संपर्क में आ सकता है।

WHO और Africa CDC ने बढ़ाई तैयारी

6 अगस्त को WHO और Africa CDC ने कांगो में इबोला संक्रमण को रोकने के लिए समुदाय आधारित कार्रवाई को तत्काल मजबूत करने की अपील की। दोनों संगठनों ने शुरुआती पहचान, संपर्कों की निगरानी, इलाज तक पहुंच, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और प्रभावित समुदायों तक संसाधनों की तेजी से पहुंच को प्राथमिकता बताया।

WHO और Africa CDC के अधिकारियों ने अगस्त की शुरुआत में कांगो और युगांडा का दौरा भी किया। इसका उद्देश्य जमीनी स्थिति का आकलन करना और यह समझना था कि संक्रमण रोकने में सबसे बड़ी बाधाएं कहां हैं।

युगांडा का उदाहरण भी इस दौरान सामने आया। वहां 28 जुलाई को स्थानीय संक्रमण वाले इबोला प्रकोप के समाप्त होने की घोषणा की गई थी। WHO और Africa CDC के अनुसार युगांडा में शुरुआती पहचान, संपर्कों की निगरानी, सामुदायिक भागीदारी और सीमा-पार निगरानी ने संक्रमण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वैक्सीन और इलाज को लेकर क्या स्थिति है?

मौजूदा प्रकोप में Bundibugyo virus जिम्मेदार है और इस वायरस के लिए कोई स्वीकृत विशिष्ट वैक्सीन या विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं होने की बात WHO ने कही है। ऐसे में मरीजों की जल्द पहचान, आइसोलेशन, निगरानी और supportive care का महत्व और बढ़ जाता है।

हालांकि कांगो में अधिकारियों ने Zaire ebolavirus के खिलाफ विकसित वैक्सीन के इस्तेमाल को बढ़ाने का फैसला किया है, क्योंकि उपलब्ध आंकड़ों से संकेत मिला है कि यह मौजूदा Bundibugyo strain के खिलाफ कुछ सुरक्षा दे सकती है। इसके अलावा प्रभावित इलाकों में antiviral दवा remdesivir के इस्तेमाल को भी बढ़ाने की योजना बताई गई है।

इसी बीच एक नई उम्मीद भी सामने आई है। Moderna ने Bundibugyo Ebola के लिए एक प्रयोगात्मक वैक्सीन का पहला मानव परीक्षण शुरू किया है। यह अभी शुरुआती चरण का परीक्षण है, इसलिए इसके प्रभाव और सुरक्षा को लेकर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

क्या दुनिया के दूसरे देशों को भी खतरा है?

WHO ने मौजूदा स्थिति का आकलन करते हुए कांगो के लिए जोखिम को बहुत अधिक माना है। पड़ोसी देशों के लिए जोखिम भी चिंता का विषय है, खासकर सीमा-पार आवाजाही के कारण।

हालांकि वैश्विक स्तर पर WHO ने जोखिम को फिलहाल कम आंका है। संगठन ने प्रभावित देशों के साथ यात्रा या व्यापार पर सामान्य प्रतिबंध लगाने के बजाय निगरानी, जांच क्षमता, तैयारियों और सीमा-पार सहयोग को मजबूत करने की सलाह दी है।

अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?

कांगो में इबोला संक्रमण की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बढ़ते आंकड़े नहीं हैं। असली चुनौती उन संक्रमण श्रृंखलाओं को तोड़ना है जिनका अभी पता नहीं चला है।

यदि किसी संक्रमित व्यक्ति की पहचान समय पर नहीं होती, तो वह परिवार, अस्पताल, बाजार, परिवहन या दूसरे सार्वजनिक स्थानों पर कई लोगों के संपर्क में आ सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए हर संदिग्ध मामले की जांच, संपर्कों की पहचान और लगातार निगरानी बेहद जरूरी हो गई है।

राजधानी के करीब 300 से अधिक यात्रियों वाली नाव को रोककर जांच किए जाने की घटना ने यह दिखा दिया है कि संक्रमण की निगरानी अब केवल प्रभावित क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह सकती।

फिलहाल कांगो में हालात बेहद गंभीर हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार तेज जांच, संक्रमित मरीजों का तत्काल उपचार और अलगाव, संपर्कों की निगरानी, सुरक्षित दफन प्रक्रियाएं तथा स्थानीय समुदायों का सहयोग संक्रमण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

आने वाले दिनों में सबसे ज्यादा नजर इस बात पर होगी कि नए मामलों की रफ्तार कितनी कम होती है और क्या स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण की उन श्रृंखलाओं को तोड़ पाते हैं जो अब तक सामने नहीं आई हैं।

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