शिलाजीत को सिर्फ सेक्स पावर की दवा समझना है बड़ी भूल, जानें इसके असली फायदे..?
शिलाजीत का नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के मन में सबसे पहले यौन शक्ति बढ़ाने वाली औषधि की छवि बनती है। पिछले कुछ वर्षों में टीवी, सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इसके प्रचार-प्रसार ने भी यही धारणा मजबूत की है। लेकिन आयुर्वेद के अनुसार शिलाजीत केवल यौन स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई अन्य स्थितियों में भी सहायक औषधि के रूप में उपयोग की जाती है। हालांकि इसके उपयोग से पहले इसकी गुणवत्ता, शुद्धता, सही मात्रा और चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बाजार में आज अनेक कंपनियां शिलाजीत बेच रही हैं। ऐसे में आम लोगों के लिए यह समझना कठिन हो जाता है कि कौन-सी शिलाजीत शुद्ध है, इसका वास्तविक उपयोग क्या है और किन परिस्थितियों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए। आइए विस्तार से जानते हैं शिलाजीत से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
शिलाजीत क्या है?
शिलाजीत एक प्राकृतिक रालयुक्त (रेजिन जैसा) पदार्थ है, जो ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में चट्टानों की दरारों से प्राप्त होता है। यह सामान्य गोंद की तरह दिखाई देता है, लेकिन इसमें प्राकृतिक खनिज और जैविक तत्व मौजूद होते हैं। आयुर्वेद में इसे एक महत्वपूर्ण औषधीय पदार्थ माना गया है, जिसका उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक योगों में किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार शिलाजीत को केवल ताकत बढ़ाने वाली दवा समझना उचित नहीं है। इसका प्रयोग पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा में अन्य औषधियों के साथ मिलाकर कई प्रकार की समस्याओं में किया जाता है।
कैसे बनती है शिलाजीत?
आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार कुछ विशेष पर्वतीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले पौधों से तेज धूप के प्रभाव में प्राकृतिक गोंद जैसा पदार्थ निकलता है। यह पदार्थ चट्टानों के ऊपर बहते हुए उनकी दरारों में जमा हो जाता है।
समय के साथ यह पदार्थ चट्टानों में मौजूद विभिन्न खनिजों के संपर्क में आता है और धीरे-धीरे एक गाढ़े रालयुक्त पदार्थ का रूप ले लेता है। इसी प्रारंभिक रूप को अशुद्ध शिलाजीत कहा जाता है।
इस अवस्था में इसमें मिट्टी, पत्थर के कण, पौधों के अवशेष, घास और अन्य अशुद्धियां भी मौजूद रहती हैं। इसलिए सीधे इसका उपयोग नहीं किया जाता।
अशुद्ध से शुद्ध शिलाजीत कैसे तैयार की जाती है?
आयुर्वेदिक ग्रंथों में शिलाजीत के शोधन (Purification) की प्रक्रिया का विशेष महत्व बताया गया है।
शोधन प्रक्रिया में अशुद्ध शिलाजीत को त्रिफला के गर्म काढ़े में कई घंटों तक रखा जाता है। इसके बाद जो भाग घुल जाता है, उसे अलग करके नियंत्रित तापमान पर पकाया जाता है। पानी समाप्त होने के बाद प्राप्त पदार्थ को शुद्ध शिलाजीत माना जाता है।
इसी शुद्ध शिलाजीत का उपयोग आगे चलकर विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं, टैबलेट, कैप्सूल, सिरप और अन्य औषधीय तैयारियों में किया जाता है।
शिलाजीत में कौन-कौन से तत्व पाए जाते हैं?
शिलाजीत की संरचना उसके स्रोत और गुणवत्ता के अनुसार बदल सकती है। इसमें सामान्यतः कई प्रकार के जैविक और खनिज तत्व पाए जाते हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
फुल्विक एसिड (Fulvic Acid)
ह्यूमिक एसिड (Humic Acid)
कैल्शियम
आयरन
मैग्नीशियम
विभिन्न सूक्ष्म खनिज
प्राकृतिक कार्बनिक यौगिक
कुछ मात्रा में प्रोटीन एवं अन्य जैव सक्रिय तत्व
आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी गुणवत्ता की शिलाजीत वही होती है जो ऐसे पर्वतीय क्षेत्रों से प्राप्त हुई हो जहां उपयुक्त वनस्पतियां पर्याप्त मात्रा में हों और प्राकृतिक धूप का अच्छा प्रभाव पड़ता हो।
शिलाजीत कहाँ पाई जाती है?
विश्व स्तर पर शिलाजीत मुख्य रूप से हिमालयी और मध्य एशियाई पर्वतीय क्षेत्रों में प्राप्त होती है।
पारंपरिक रूप से रूस, तिब्बत, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर तथा हिमालय के कुछ क्षेत्रों में इसकी उपलब्धता बताई जाती है। भारत में सीमित मात्रा में लद्दाख और कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी शिलाजीत मिलने की जानकारी दी जाती है।
हालांकि बाजार में उपलब्ध अधिकांश उत्पाद विभिन्न स्रोतों से आयातित कच्चे पदार्थों पर आधारित हो सकते हैं।
किन रोगों में किया जाता है उपयोग?
आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में शिलाजीत का उपयोग अकेले नहीं बल्कि अन्य औषधियों के साथ मिलाकर किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसका उपयोग निम्न स्थितियों में सहायक औषधि के रूप में किया जा सकता है—
सामान्य कमजोरी
थकान
रोग प्रतिरोधक क्षमता को सहयोग देने के उद्देश्य से
पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ समस्याएं
कुछ मामलों में मधुमेह के आयुर्वेदिक प्रबंधन में
पथरी संबंधी उपचारों के साथ
सूजन संबंधी कुछ स्थितियों में
पोषण संबंधी सपोर्ट के रूप में
हालांकि यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इन सभी स्थितियों में इसका उपयोग केवल योग्य आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह पर ही किया जाना चाहिए। किसी भी गंभीर बीमारी का स्वयं इलाज करने के लिए केवल शिलाजीत पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
क्या वास्तव में यौन शक्ति बढ़ाती है?
बाजार में शिलाजीत का सबसे अधिक प्रचार यौन शक्ति बढ़ाने वाले उत्पाद के रूप में किया जाता है।
आयुर्वेद में इसे वाजीकरण औषधियों में स्थान दिया गया है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि हर व्यक्ति बिना जांच या सलाह के इसका सेवन शुरू कर दे।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यौन स्वास्थ्य कई कारणों पर निर्भर करता है, जिनमें हार्मोन, मानसिक स्वास्थ्य, पोषण, जीवनशैली और अन्य चिकित्सीय स्थितियां शामिल हैं। इसलिए केवल शिलाजीत का सेवन सभी समस्याओं का समाधान नहीं माना जा सकता।
कितनी मात्रा में लेना सुरक्षित है?
शिलाजीत की सही मात्रा प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकती है।
यह व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, शरीर की प्रकृति, बीमारी और अन्य दवाओं के आधार पर तय की जाती है।
इसी कारण विशेषज्ञ बिना चिकित्सकीय परामर्श के इसकी मात्रा निर्धारित करने से बचने की सलाह देते हैं।
क्या इसके साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं?
जी हां। प्राकृतिक होने का अर्थ यह नहीं कि कोई पदार्थ पूरी तरह सुरक्षित ही हो।
खराब गुणवत्ता, अशुद्ध उत्पाद, मिलावटी शिलाजीत या किसी व्यक्ति में एलर्जी होने पर कई प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं।
संभावित दुष्प्रभावों में शामिल हैं—
पेट में जलन
अपच
दस्त
पेट भारी लगना
चक्कर आना
धड़कन तेज या अनियमित महसूस होना
चेहरे या शरीर के किसी हिस्से में सूजन
सीने में असहजता
यदि शिलाजीत के सेवन के बाद ऐसे लक्षण दिखाई दें तो इसका उपयोग तुरंत बंद कर योग्य चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए।
सेवन के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
आयुर्वेदिक परंपरा में शिलाजीत के सेवन के दौरान कुछ खान-पान संबंधी सावधानियां भी बताई जाती हैं।
विशेषज्ञ आवश्यकता के अनुसार शराब, अत्यधिक चाय-कॉफी, सिरका युक्त पदार्थ तथा कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दे सकते हैं। हालांकि यह सलाह व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
कितने समय तक लेना चाहिए?
शिलाजीत कोई सामान्य न्यूट्रिशन सप्लीमेंट नहीं है जिसे बिना योजना के लंबे समय तक लिया जाए।
इसके उपयोग की अवधि व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय आवश्यकता पर निर्भर करती है। इसलिए इसे कितने समय तक लेना है, इसका निर्णय केवल पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सक द्वारा ही किया जाना चाहिए।
खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
आज ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार में शिलाजीत के नाम पर अनेक उत्पाद उपलब्ध हैं। लेकिन सभी उत्पाद समान गुणवत्ता के नहीं होते।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि—
केवल विश्वसनीय और प्रमाणित निर्माता का उत्पाद चुनें।
गुणवत्ता परीक्षण वाले उत्पादों को प्राथमिकता दें।
बिना लेबल या बिना प्रमाण वाले उत्पादों से बचें।
किसी भी दावे पर आंख बंद करके विश्वास न करें।
खरीदने और सेवन शुरू करने से पहले योग्य आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
शिलाजीत आयुर्वेद में महत्वपूर्ण औषधीय पदार्थों में से एक मानी जाती है, लेकिन इसे केवल "ताकत बढ़ाने वाली दवा" समझना इसकी उपयोगिता को सीमित कर देता है। दूसरी ओर इसे हर बीमारी का चमत्कारी इलाज मान लेना भी गलत है।
विशेषज्ञों के अनुसार इसकी गुणवत्ता, शुद्धिकरण प्रक्रिया, सही मात्रा और चिकित्सकीय सलाह सबसे महत्वपूर्ण पहलू हैं। बिना विशेषज्ञ की सलाह के लंबे समय तक या अधिक मात्रा में इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।
इसलिए यदि आप शिलाजीत का उपयोग करना चाहते हैं तो पहले किसी पंजीकृत आयुर्वेद चिकित्सक से परामर्श लें और केवल प्रमाणित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पाद का ही चयन करें। इससे संभावित लाभ मिलने की संभावना बढ़ती है और अनावश्यक जोखिम से भी बचा जा सकता है।

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