यूपी में इंसान-जानवर टकराव अब 'आपदा', CM योगी बोले- 4 हजार से ज्यादा लोगों की गई जान, तकनीक और जागरूकता ही बचाएगी जिंदगी
उत्तर प्रदेश में इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में इंसान और जंगली जानवरों के बीच बढ़ रही घटनाएं अब केवल वन विभाग का विषय नहीं रह गई हैं, बल्कि यह एक गंभीर आपदा का रूप ले चुकी हैं। इसी सोच के तहत उत्तर प्रदेश इस समस्या को 'आपदा' के रूप में मान्यता देने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
लखनऊ में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UP SDMA) के नए मुख्यालय भवन के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में इंसान-जानवर टकराव की घटनाओं में 4,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं प्राकृतिक आपदाओं के कारण 5,000 से ज्यादा लोगों ने अपनी जान गंवाई है। उन्होंने कहा कि यदि आधुनिक तकनीक, समय पर चेतावनी प्रणाली और जन-जागरूकता का प्रभावी उपयोग किया जाए तो बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती है।
इंसान-जानवर टकराव को बताया नई चुनौती
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश में तेजी से बदलते पर्यावरणीय हालात, जंगलों के सीमित होते क्षेत्र और बढ़ती आबादी के कारण वन्यजीवों का मानव बस्तियों की ओर आना लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि तेंदुआ, हाथी, मगरमच्छ, भालू और बंदर जैसे वन्यजीवों के साथ लोगों का सामना पहले की तुलना में कहीं अधिक होने लगा है।
उन्होंने कहा कि यह केवल वन्यजीव संरक्षण का विषय नहीं है बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। इसलिए राज्य सरकार ने इसे आपदा प्रबंधन के दायरे में लाकर व्यवस्थित तरीके से समाधान की दिशा में काम शुरू किया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार यदि खतरे वाले क्षेत्रों की पहले से पहचान कर लोगों को सतर्क किया जाए और स्थानीय प्रशासन आधुनिक तकनीक का उपयोग करे तो ऐसी घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
बहराइच की मगरमच्छ घटना का किया उल्लेख
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में बहराइच जिले में हुई एक दर्दनाक घटना का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले बहराइच में एक 12 वर्षीय बालक मगरमच्छ के हमले का शिकार हो गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि लोगों को ऐसे क्षेत्रों के बारे में पर्याप्त जानकारी होती और आवश्यक सावधानी बरती जाती तो शायद इस तरह की घटना को रोका जा सकता था।
उन्होंने कहा कि मगरमच्छ सामान्यतः बहुत दूर तक नहीं जाते। उनका प्राकृतिक क्षेत्र सीमित होता है और वे प्रायः तीन से पांच किलोमीटर के दायरे में ही रहते हैं। ऐसे में यदि प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बेहतर समन्वय हो तथा संवेदनशील क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान की जाए तो जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।
क्या थी बहराइच की घटना
जानकारी के अनुसार 16 जुलाई की शाम बहराइच जिले के टिकुरी गांव निवासी 12 वर्षीय सुनील अपने चाचा के साथ खेत में धान की रोपाई का काम कर रहा था। काम समाप्त होने के बाद वह घाघरा नदी के किनारे गया, जहां मगरमच्छ ने उस पर हमला कर दिया। घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया और वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।
मुख्यमंत्री ने इस घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी दुर्घटनाओं से सीख लेने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
बिजनौर के 'शुगर लेपर्ड' बने चर्चा का विषय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिजनौर जिले का उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में वहां लगभग 80 तेंदुओं का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया है।
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि इतने अधिक तेंदुए आखिर इस क्षेत्र में कैसे पहुंच गए, तो उन्हें जानकारी दी गई कि तेंदुओं की संख्या बढ़ी है और वे विशेष रूप से गन्ने के खेतों में छिपकर रहते हैं।
इसी कारण स्थानीय लोग इन्हें 'शुगर लेपर्ड' कहने लगे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को यह जानकारी न हो कि गन्ने के खेतों में तेंदुओं की मौजूदगी हो सकती है, तो वह अनजाने में खतरे का सामना कर सकता है। इसलिए स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना बेहद आवश्यक है।
जोखिम वाले इलाकों की पहचान होगी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब उन इलाकों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करने पर जोर दे रही है जहां वन्यजीवों के आने की संभावना अधिक रहती है।
उन्होंने कहा कि यदि लोगों को पहले से यह जानकारी मिल जाए कि कौन-सा क्षेत्र संवेदनशील है, तो वे अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानी बरत सकते हैं।
उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से भी कहा कि जोखिम वाले क्षेत्रों में सूचना बोर्ड, चेतावनी संकेत और स्थानीय स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से चलाए जाएं।
प्राकृतिक आपदाओं में तकनीक की भूमिका पर दिया जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आधुनिक तकनीक के उपयोग की भी सराहना की।
उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले एक ही दिन में आंधी और बिजली गिरने की घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद उन्होंने अधिकारियों को तकनीकी समाधान विकसित करने के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री के अनुसार अधिकारियों ने कुछ ही दिनों में ऐसी योजना तैयार की जिससे मौसम संबंधी अलर्ट समय पर संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचने लगे।
शाकंभरी देवी मंदिर का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने सहारनपुर स्थित प्रसिद्ध शाकंभरी देवी मंदिर का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां हजारों श्रद्धालु भंडारे में शामिल थे।
इसी दौरान मौसम संबंधी अलर्ट प्राप्त हुआ, जिसके आधार पर प्रशासन ने समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया।
कुछ ही देर बाद शिवालिक क्षेत्र से तेज जलधारा नीचे आई। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समय पर चेतावनी नहीं मिलती तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।
उन्होंने इसे तकनीक के सफल उपयोग का उदाहरण बताते हुए कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार की प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को और मजबूत बनाया जाएगा।
आपदा प्रबंधन का दायरा हुआ व्यापक
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते समय के साथ आपदा प्रबंधन की परिभाषा भी बदल रही है। पहले जहां बाढ़, सूखा, भूकंप और आंधी जैसी प्राकृतिक घटनाओं को ही आपदा माना जाता था, वहीं अब वन्यजीवों से जुड़े जोखिम भी गंभीर चुनौती बन चुके हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार इस दिशा में समग्र रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें वन विभाग, पुलिस, स्थानीय प्रशासन, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और तकनीकी संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
जागरूकता अभियान पर रहेगा विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। आम लोगों की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि नदी किनारे, जंगलों के आसपास और वन्यजीव प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक जोखिम न लें। यदि किसी क्षेत्र में वन्यजीव दिखाई दे तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचना दें और स्वयं उसे पकड़ने या भगाने का प्रयास न करें।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों, ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों के माध्यम से व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा ताकि लोग संभावित खतरों को पहचान सकें और सुरक्षित व्यवहार अपना सकें।
मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल वन्यजीव संरक्षण नहीं बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा भी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी आपदा प्रबंधन, समय पर चेतावनी प्रणाली और जन-जागरूकता के माध्यम से इंसान-जानवर टकराव की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे सभी संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में जनहानि को न्यूनतम किया जा सके।

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