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जम्मू-कश्मीर की स्कूल लाइब्रेरी में पहुंची किताब पर विवाद, आतंकवादियों के कथित महिमामंडन के आरोप से मचा बवाल

 


जम्मू: जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में उपलब्ध कराई गई एक पुस्तक को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि इस पुस्तक में आतंकवाद और अलगाववाद से जुड़े कुछ व्यक्तियों का इस प्रकार उल्लेख किया गया है, जिसे लेकर गंभीर आपत्तियां उठाई जा रही हैं। इस मामले के सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम ने पुस्तक की सामग्री पर सवाल उठाते हुए इसकी खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हालांकि, इस मामले में संबंधित प्रकाशक, पुस्तक के लेखकों और जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से इस विवाद पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में पुस्तक की सामग्री और उसके चयन की प्रक्रिया की पुष्टि संबंधित जांच या सरकारी स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

स्कूलों की लाइब्रेरी में भेजी गई पुस्तक पर उठे सवाल

विवाद जिस पुस्तक को लेकर सामने आया है, उसका नाम "जम्मू-कश्मीर की महान व दिग्गज हस्तियां" बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार इस पुस्तक का प्रकाशन एक निजी प्रकाशक ओबराय बुक्स सर्विस द्वारा किया गया है तथा इसे हिलाल अहमद और संतोष मीणा ने लिखा है।

आरोप है कि इस पुस्तक को जम्मू-कश्मीर की समग्र शिक्षा योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए खरीदा गया और बाद में सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में उपलब्ध कराया गया।

यही तथ्य अब विवाद का केंद्र बन गया है।

पीपुल्स फोरम ने उठाए गंभीर सवाल

शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम के पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता आयोजित कर पुस्तक की कुछ सामग्री सार्वजनिक करने का दावा किया।

फोरम के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि पुस्तक में कुछ ऐसे व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है जिन्हें भारत सरकार आतंकवाद या अलगाववाद से जुड़े मामलों में गंभीर मानती रही है, लेकिन पुस्तक में उनके बारे में अलग भाषा और संदर्भ का उपयोग किया गया है।

फोरम का कहना है कि इस प्रकार की सामग्री स्कूली छात्रों के लिए उपयुक्त नहीं मानी जा सकती।

किन नामों को लेकर है विवाद?

फोरम के अनुसार पुस्तक में कथित रूप से मकबूल भट का उल्लेख ऐसे शब्दों में किया गया है जिस पर उन्हें आपत्ति है।

इसी प्रकार उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक में सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम, मीरवाइज उमर फारूक तथा मौलवी फारूक सहित कुछ अन्य नेताओं के संदर्भ में भी ऐसी भाषा का प्रयोग किया गया है जिसे लेकर विवाद पैदा हुआ है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है और पुस्तक की आधिकारिक समीक्षा या जांच रिपोर्ट सामने आना बाकी है।

क्या है मकबूल भट का मामला?

मकबूल भट का नाम लंबे समय से जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक और सुरक्षा इतिहास से जुड़ा रहा है।

उन्हें भारत में विभिन्न आपराधिक मामलों में दोषी ठहराया गया था। सीआईडी इंस्पेक्टर अमर चंद की हत्या और अन्य मामलों में दोषसिद्धि के बाद उन्हें 11 फरवरी 1984 को फांसी दी गई थी।

भारत सरकार उन्हें आतंकवाद से जुड़े मामलों में दोषी मानती है, जबकि कश्मीर के कुछ राजनीतिक समूह वर्षों से उनके बारे में अलग दृष्टिकोण रखते रहे हैं।

इसी ऐतिहासिक और राजनीतिक विवाद के कारण पुस्तक की भाषा को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है।

नई पीढ़ी को क्या पढ़ाया जा रहा है?

विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संबंधित पुस्तक सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी के लिए खरीदी गई बताई जा रही है।

फोरम का कहना है कि यदि स्कूली छात्रों को ऐसी सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, जिसमें विवादित ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का एकतरफा चित्रण हो, तो इससे बच्चों के सामने इतिहास और समकालीन घटनाओं की संतुलित समझ विकसित करने में कठिनाई हो सकती है।

उन्होंने मांग की है कि स्कूलों में उपलब्ध सभी संदर्भ पुस्तकों की विशेषज्ञ समिति से समीक्षा कराई जाए।

पुस्तक खरीद प्रक्रिया की जांच की मांग

पीपुल्स फोरम ने केवल पुस्तक की सामग्री पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि उसकी खरीद प्रक्रिया की भी जांच की मांग की है।

फोरम का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि—

  • पुस्तक का चयन किस समिति ने किया?

  • क्या सामग्री की विशेषज्ञ समीक्षा हुई थी?

  • किन मानकों के आधार पर इसे सरकारी स्कूलों के लिए स्वीकृत किया गया?

  • क्या शिक्षा विभाग ने सामग्री का सत्यापन कराया था?

इन सभी सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

शिक्षा में निष्पक्ष इतिहास की आवश्यकता

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतिहास और समाज विज्ञान से संबंधित पुस्तकों में तथ्यों की सटीकता और संतुलित प्रस्तुति अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

विशेष रूप से उन क्षेत्रों में, जहां लंबे समय तक संघर्ष और हिंसा का इतिहास रहा हो, वहां पाठ्य सामग्री तैयार करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी विवादित ऐतिहासिक व्यक्ति का उल्लेख करते समय विभिन्न दृष्टिकोणों को तथ्यों के आधार पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

इस पूरे विवाद के बीच अब सभी की नजर जम्मू-कश्मीर प्रशासन और शिक्षा विभाग पर है।

यदि पुस्तक वास्तव में सरकारी खरीद प्रक्रिया के तहत स्कूलों तक पहुंची है, तो सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया जाना महत्वपूर्ण होगा कि—

  • पुस्तक किस उद्देश्य से खरीदी गई?

  • क्या यह पाठ्यपुस्तक है या केवल संदर्भ पुस्तक?

  • क्या इसकी सामग्री की समीक्षा की जाएगी?

  • यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो क्या कार्रवाई होगी?

इन प्रश्नों के उत्तर आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।

पाठ्य सामग्री को लेकर पहले भी उठते रहे हैं विवाद

देश के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर पाठ्यपुस्तकों और संदर्भ पुस्तकों की सामग्री को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।

कभी ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या पर विवाद होता है तो कभी किसी व्यक्ति के चित्रण को लेकर।

ऐसे मामलों में सामान्यतः संबंधित शिक्षा बोर्ड या सरकार विशेषज्ञ समिति गठित कर सामग्री की समीक्षा कराती है और आवश्यकता होने पर संशोधन या पुस्तक वापस लेने जैसे कदम भी उठाए जाते हैं।

बच्चों की शिक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूली छात्रों तक ऐसी सामग्री पहुंचनी चाहिए जो तथ्यात्मक, संतुलित और संविधान के मूल्यों के अनुरूप हो।

यदि किसी पुस्तक की सामग्री पर गंभीर आपत्तियां उठती हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच कराना और आवश्यकता पड़ने पर उचित कार्रवाई करना शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है।

जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी में उपलब्ध कराई गई एक पुस्तक को लेकर उठा विवाद अब राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम ने आरोप लगाया है कि पुस्तक में कुछ आतंकवाद और अलगाववाद से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन किया गया है तथा इसकी खरीद प्रक्रिया की जांच की जानी चाहिए।

हालांकि इन आरोपों पर अभी संबंधित लेखकों, प्रकाशक या जम्मू-कश्मीर सरकार की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना आवश्यक होगा। यदि जांच में किसी प्रकार की तथ्यात्मक या प्रक्रियागत त्रुटि पाई जाती है, तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है।

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