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बरसात के साथ बढ़ा बीमारियों का खतरा! सरकार ने शुरू किया विशेष अभियान, डेंगू-मलेरिया से बचाव के लिए जारी हुई एडवाइजरी


 

बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं अपने साथ कई संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस, वायरल बुखार और दस्त जैसी बीमारियां मानसून के दौरान तेजी से फैल सकती हैं। इसी खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जुलाई महीने में विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान और 'दस्तक' अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना, बीमारियों की समय रहते पहचान करना और संक्रमण को फैलने से रोकना है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह अभियान शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में चलाया जाएगा। इसके तहत स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर लोगों को साफ-सफाई, मच्छरों से बचाव, स्वच्छ पेयजल और संक्रामक रोगों की रोकथाम के बारे में जानकारी देंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग शुरुआती सावधानियां अपनाएं तो बरसात में होने वाली अधिकांश बीमारियों से बचा जा सकता है।

क्यों बढ़ जाता है बरसात में संक्रमण का खतरा?

मानसून के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने लगता है। यही रुका हुआ पानी मच्छरों के पनपने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान बन जाता है। डेंगू फैलाने वाला एडीज एजिप्टी मच्छर साफ पानी में अंडे देता है, जबकि मलेरिया फैलाने वाला एनोफिलीज मच्छर भी जलभराव वाले क्षेत्रों में तेजी से बढ़ता है।

इसके अलावा बरसात के मौसम में दूषित पानी और भोजन के कारण दस्त, टाइफाइड, हैजा और वायरल संक्रमण के मामले भी बढ़ने लगते हैं। मौसम में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया और वायरस को फैलने का अनुकूल वातावरण मिल जाता है।

क्या है संचारी रोग नियंत्रण अभियान?

स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू किया गया संचारी रोग नियंत्रण अभियान एक व्यापक जनस्वास्थ्य कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य मानसून के दौरान फैलने वाली बीमारियों को नियंत्रित करना है।

इस अभियान के अंतर्गत—

  • घर-घर स्वास्थ्य सर्वे किया जाएगा।

  • मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान की जाएगी।

  • साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

  • लोगों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों की जानकारी दी जाएगी।

  • जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके अलावा नगर निकायों और ग्राम पंचायतों को भी सफाई अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

'दस्तक' अभियान क्या है?

'दस्तक' अभियान विशेष रूप से उन बच्चों और परिवारों तक पहुंचने के लिए चलाया जाता है, जहां संक्रामक रोगों का खतरा अधिक होता है।

इस अभियान के तहत आशा कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मचारी घर-घर जाकर—

  • बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान करेंगे।

  • बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करेंगे।

  • दस्त और डायरिया से बचाव की जानकारी देंगे।

  • लोगों को ओआरएस (ORS) और जिंक के उपयोग के बारे में जागरूक करेंगे।

  • मच्छरों से बचाव के उपाय बताएंगे।

इससे बीमारी की शुरुआती पहचान आसान होगी और समय पर इलाज शुरू किया जा सकेगा।

डेंगू से कैसे बचें?

डेंगू हर साल बरसात के मौसम में बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करता है।

डॉक्टरों के अनुसार डेंगू से बचाव के लिए—

  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें।

  • कूलर, गमले और पानी की टंकियों को नियमित रूप से साफ करें।

  • पूरी बांह के कपड़े पहनें।

  • मच्छरदानी का उपयोग करें।

  • मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट लगाएं।

यदि तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द या शरीर पर लाल चकत्ते दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मलेरिया और चिकनगुनिया से भी रहें सावधान

मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले भी मानसून में बढ़ जाते हैं।

मलेरिया में तेज बुखार, ठंड लगना और पसीना आना सामान्य लक्षण हैं।

वहीं चिकनगुनिया में तेज बुखार के साथ जोड़ों में गंभीर दर्द होता है।

इन दोनों बीमारियों से बचाव के लिए मच्छरों के काटने से बचना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

दस्त और डायरिया का खतरा

बरसात में दूषित पानी पीने से दस्त और डायरिया की समस्या बढ़ सकती है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं—

  • केवल साफ या उबला हुआ पानी पिएं।

  • बाहर का कटा हुआ फल और खुला भोजन न खाएं।

  • भोजन बनाने और खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं।

  • बच्चों को स्वच्छ भोजन ही दें।

यदि लगातार दस्त हो रहे हों तो शरीर में पानी की कमी रोकने के लिए तुरंत ORS देना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है।

इन लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर हो सकती है, इसलिए उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

घर में यदि किसी सदस्य को बुखार हो तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

घर में अपनाएं ये आसान उपाय

संक्रामक रोगों से बचने के लिए कुछ सरल उपाय बेहद प्रभावी हो सकते हैं—

  • सप्ताह में एक दिन "ड्राई डे" मनाएं और सभी पानी के बर्तनों को खाली करें।

  • कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें।

  • घर और आसपास सफाई रखें।

  • कूड़ा खुले में न फेंकें।

  • पानी की टंकियों को ढककर रखें।

  • बच्चों को खुले पानी में खेलने से रोकें।

डॉक्टरों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर वायरल बुखार और डेंगू के शुरुआती लक्षणों को सामान्य बुखार समझकर स्वयं दवा लेना शुरू कर देते हैं।

यह आदत नुकसानदायक हो सकती है।

बुखार आने पर—

  • बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें।

  • पर्याप्त पानी पिएं।

  • आराम करें।

  • यदि बुखार दो दिन से अधिक रहे तो जांच कराएं।

  • प्लेटलेट्स की चिंता में स्वयं इलाज शुरू न करें।

अस्पताल भी अलर्ट मोड पर

बरसात के मौसम को देखते हुए कई सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं।

डेंगू जांच, मलेरिया जांच, दवाओं की उपलब्धता और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

जनभागीदारी से ही मिलेगी सफलता

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। यदि नागरिक स्वयं सफाई का ध्यान रखें, मच्छरों को पनपने से रोकें और बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर समय पर जांच कराएं, तो संक्रमण के मामलों में काफी कमी लाई जा सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सामुदायिक भागीदारी इस अभियान की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

बरसात का मौसम स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए शुरू किया गया संचारी रोग नियंत्रण अभियान और 'दस्तक' अभियान डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, दस्त और अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यदि लोग साफ-सफाई बनाए रखें, मच्छरों को पनपने से रोकें, स्वच्छ पानी और भोजन का उपयोग करें तथा बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें, तो अधिकांश संक्रमणों से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर सावधानी, जागरूकता और सही इलाज ही मानसून के दौरान स्वस्थ रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।

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