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150 ग्राम प्रोटीन डाइट पर क्यों मची बहस? फिटनेस के नाम पर कहीं आप भी तो नहीं कर रहे बड़ी गलती

 


नई दिल्ली: फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों की जागरूकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर हर दिन नई-नई डाइट, वर्कआउट प्लान और न्यूट्रिशन टिप्स वायरल होते रहते हैं। हाल ही में एक भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी के रोजाना लगभग 150 ग्राम प्रोटीन लेने की चर्चा के बाद हाई-प्रोटीन डाइट फिर से सुर्खियों में आ गई है। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि क्या हर व्यक्ति को इतनी अधिक मात्रा में प्रोटीन की जरूरत होती है या फिर यह केवल प्रोफेशनल खिलाड़ियों के लिए उपयुक्त है।

पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी खिलाड़ी की डाइट उसकी उम्र, वजन, खेल, ट्रेनिंग की तीव्रता और शरीर की जरूरतों के अनुसार तैयार की जाती है। इसलिए किसी सेलिब्रिटी या एथलीट की डाइट को बिना सलाह के अपनाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

क्यों बढ़ रहा है हाई-प्रोटीन डाइट का ट्रेंड?

पिछले कुछ वर्षों में फिटनेस इंडस्ट्री में प्रोटीन सबसे ज्यादा चर्चित पोषक तत्व बन गया है। जिम जाने वाले लोग, वजन कम करने की कोशिश कर रहे युवा और मसल्स बनाने वाले फिटनेस प्रेमी बड़ी मात्रा में प्रोटीन लेने लगे हैं।

सोशल मीडिया पर फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स भी अक्सर हाई-प्रोटीन भोजन और प्रोटीन सप्लीमेंट्स को बढ़ावा देते हैं। इससे कई लोग यह मान लेते हैं कि जितना ज्यादा प्रोटीन लिया जाएगा, शरीर उतना ही ज्यादा मजबूत और फिट बनेगा। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोच पूरी तरह सही नहीं है।

आखिर प्रोटीन करता क्या है?

प्रोटीन शरीर के लिए बेहद जरूरी पोषक तत्व है। यह मांसपेशियों के निर्माण, ऊतकों की मरम्मत, हार्मोन और एंजाइम बनाने तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यदि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन नहीं मिलता, तो मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं, रिकवरी धीमी हो सकती है और शरीर की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को बहुत अधिक मात्रा में प्रोटीन लेना चाहिए।

क्या सभी को 150 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है?

विशेषज्ञों के अनुसार इसका जवाब है—नहीं।

रोजाना कितनी मात्रा में प्रोटीन की आवश्यकता होगी, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे—

  • उम्र

  • वजन

  • शारीरिक गतिविधि

  • स्वास्थ्य की स्थिति

  • पेशा

  • खेल या व्यायाम का स्तर

एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी प्रतिदिन कई घंटे कठिन अभ्यास करता है। उसके शरीर की रिकवरी और मसल्स रिपेयर के लिए सामान्य व्यक्ति की तुलना में अधिक प्रोटीन की आवश्यकता हो सकती है। वहीं एक सामान्य ऑफिस कर्मचारी या कम शारीरिक गतिविधि करने वाले व्यक्ति को इतनी मात्रा की जरूरत नहीं होती।

जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने के क्या नुकसान हो सकते हैं?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बिना जरूरत के बहुत अधिक प्रोटीन लेने लगे, तो कुछ समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

  • शरीर में अतिरिक्त कैलोरी जमा हो सकती है।

  • पर्याप्त पानी न पीने पर डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।

  • संतुलित आहार की जगह केवल प्रोटीन पर ध्यान देने से फाइबर, विटामिन और मिनरल्स की कमी हो सकती है।

  • कुछ लोगों में पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अधिक प्रोटीन लेना उपयुक्त नहीं होता।

इसीलिए किसी भी हाई-प्रोटीन डाइट को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

प्राकृतिक प्रोटीन या सप्लीमेंट?

आजकल बाजार में प्रोटीन पाउडर और सप्लीमेंट्स की भरमार है। हालांकि न्यूट्रिशन विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश लोगों के लिए प्राकृतिक खाद्य पदार्थों से मिलने वाला प्रोटीन पर्याप्त हो सकता है।

प्राकृतिक प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं—

  • दालें

  • राजमा

  • छोले

  • सोयाबीन

  • पनीर

  • दूध और दही

  • अंडे

  • मछली

  • चिकन

  • मूंगफली

  • बादाम और अन्य मेवे

इन खाद्य पदार्थों में केवल प्रोटीन ही नहीं, बल्कि कई अन्य जरूरी पोषक तत्व भी होते हैं जो शरीर को संतुलित पोषण प्रदान करते हैं।

वजन घटाने में क्या सचमुच मदद करता है प्रोटीन?

विशेषज्ञों के अनुसार प्रोटीन पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। इससे बार-बार भूख कम लगती है और अनावश्यक स्नैकिंग में कमी आ सकती है।

हालांकि केवल प्रोटीन बढ़ा देने से वजन कम नहीं होता। इसके लिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और सक्रिय जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी है।

क्या बच्चों और बुजुर्गों को भी ज्यादा प्रोटीन चाहिए?

बच्चों, किशोरों और बुजुर्गों की पोषण संबंधी जरूरतें अलग-अलग होती हैं। बढ़ते बच्चों को विकास के लिए पर्याप्त प्रोटीन चाहिए, जबकि बुजुर्गों में मांसपेशियों की मजबूती बनाए रखने के लिए संतुलित मात्रा में प्रोटीन उपयोगी हो सकता है।

लेकिन दोनों ही स्थितियों में मात्रा का निर्धारण व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार होना चाहिए।

केवल प्रोटीन नहीं, संतुलित प्लेट है जरूरी

डायटीशियन बताते हैं कि एक स्वस्थ भोजन में केवल प्रोटीन ही नहीं, बल्कि कार्बोहाइड्रेट, हेल्दी फैट, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स भी शामिल होने चाहिए।

यदि कोई व्यक्ति केवल प्रोटीन पर ध्यान देता है और फल, सब्जियां तथा साबुत अनाज कम खाता है, तो लंबे समय में शरीर में पोषण असंतुलन हो सकता है।

सोशल मीडिया की सलाह पर न करें भरोसा

फिटनेस से जुड़े वीडियो और पोस्ट देखकर लोग अक्सर अपनी डाइट बदल लेते हैं। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इंटरनेट पर वायरल होने वाली हर सलाह सभी लोगों के लिए सही नहीं होती।

हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है। इसलिए किसी खिलाड़ी, अभिनेता या फिटनेस इन्फ्लुएंसर की डाइट को कॉपी करने के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार भोजन योजना बनानी चाहिए।

फिट रहने के लिए क्या करें?

विशेषज्ञ स्वस्थ जीवनशैली के लिए कुछ आसान सुझाव देते हैं—

  • संतुलित और विविध आहार लें।

  • नियमित व्यायाम करें।

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

  • रोज 7–8 घंटे की नींद लें।

  • बिना सलाह के सप्लीमेंट्स का सेवन न करें।

  • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें।

150 ग्राम प्रोटीन डाइट की चर्चा ने एक बार फिर लोगों का ध्यान फिटनेस और पोषण की ओर आकर्षित किया है। हालांकि विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि किसी प्रोफेशनल खिलाड़ी की डाइट को सामान्य लोगों के लिए आदर्श नहीं माना जा सकता। स्वस्थ रहने का सबसे अच्छा तरीका संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार पोषण योजना अपनाना है। इसलिए केवल सोशल मीडिया पर वायरल ट्रेंड देखकर अपनी डाइट में बड़े बदलाव करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है।

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