'डूम शॉपिंग' का बढ़ता ट्रेंड: क्या तनाव में आप भी खरीद रहे हैं बेकार की चीजें? जानिए क्यों बन रही है यह नई लाइफस्टाइल समस्या
नई दिल्ली: ऑफिस का तनाव, आर्थिक दबाव, सोशल मीडिया पर दूसरों की चमकदार जिंदगी और लगातार बढ़ती मानसिक थकान—इन सबके बीच एक नया लाइफस्टाइल ट्रेंड तेजी से चर्चा में है, जिसे 'डूम शॉपिंग' (Doom Shopping) कहा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आज बड़ी संख्या में लोग ऐसी चीजें खरीद रहे हैं जिनकी उन्हें वास्तव में जरूरत नहीं होती। कुछ मिनटों की खुशी और मानसिक राहत पाने के लिए की गई यह खरीदारी बाद में पछतावे और आर्थिक परेशानी की वजह बन सकती है। हाल के दिनों में इस ट्रेंड को लेकर सोशल मीडिया, मनोवैज्ञानिकों और लाइफस्टाइल विशेषज्ञों के बीच व्यापक चर्चा हो रही है।
क्या है 'डूम शॉपिंग'?
डूम शॉपिंग ऐसी आदत है, जिसमें व्यक्ति तनाव, अकेलेपन, चिंता या भावनात्मक दबाव से राहत पाने के लिए बिना योजना के ऑनलाइन या ऑफलाइन खरीदारी करने लगता है। इस दौरान खरीदी गई चीजें अक्सर जरूरी नहीं होतीं, लेकिन उन्हें खरीदने से कुछ समय के लिए अच्छा महसूस होता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह केवल सामान्य 'इम्पल्स बाइंग' नहीं है। इसमें खरीदारी एक भावनात्मक सहारे के रूप में इस्तेमाल होने लगती है। कुछ समय बाद वही व्यक्ति फिर तनाव महसूस करता है और दोबारा खरीदारी करता है। इसी वजह से यह एक चक्र का रूप ले सकता है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है यह ट्रेंड?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं। लगातार काम का दबाव, भविष्य को लेकर अनिश्चितता, महंगाई, सोशल मीडिया पर दिखने वाली लग्जरी लाइफस्टाइल और हर समय ऑनलाइन रहने की आदत लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर रही है।
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले लगातार ऑफर, फ्लैश सेल, 'लिमिटेड टाइम डील' और पर्सनलाइज्ड विज्ञापन भी लोगों को तुरंत खरीदारी करने के लिए प्रेरित करते हैं। कई बार व्यक्ति केवल मोबाइल स्क्रॉल करते-करते ऐसी चीज खरीद लेता है जिसकी उसे पहले कोई जरूरत नहीं थी।
सोशल मीडिया भी निभा रहा बड़ी भूमिका
इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इन्फ्लुएंसर्स लगातार नए फैशन, गैजेट्स, ब्यूटी प्रोडक्ट्स और होम डेकोर आइटम्स दिखाते रहते हैं। इससे लोगों में यह भावना पैदा होती है कि उनके पास भी वही चीजें होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार ऐसी सामग्री देखने से जरूरत और इच्छा के बीच का अंतर धीरे-धीरे कम होने लगता है। परिणामस्वरूप लोग भावनात्मक संतुष्टि के लिए खरीदारी करने लगते हैं।
दिमाग में क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति कोई नई चीज खरीदता है, तो मस्तिष्क में डोपामिन नामक रसायन सक्रिय होता है, जो खुशी और उत्साह का अनुभव कराता है। लेकिन यह खुशी बहुत कम समय तक रहती है।
कुछ घंटों या दिनों बाद वही उत्साह खत्म हो जाता है और व्यक्ति फिर पहले जैसी मानसिक स्थिति में लौट आता है। यही कारण है कि कुछ लोग बार-बार खरीदारी करने लगते हैं।
कैसे पहचानें कि आप भी डूम शॉपिंग का शिकार हैं?
यदि इनमें से कई बातें आप पर लागू होती हैं, तो सतर्क होने की जरूरत है—
तनाव या उदासी में तुरंत ऑनलाइन शॉपिंग ऐप खोलना।
बिना जरूरत के बार-बार सामान खरीदना।
खरीदारी के तुरंत बाद खुशी और कुछ समय बाद पछतावा महसूस होना।
बजट से अधिक खर्च करना।
घर में ऐसे कई सामान होना जिनका कभी इस्तेमाल ही नहीं हुआ।
क्रेडिट कार्ड या 'बाय नाउ पे लेटर' का जरूरत से ज्यादा उपयोग करना।
विशेषज्ञों के अनुसार ये संकेत बताते हैं कि खरीदारी अब जरूरत नहीं, बल्कि भावनात्मक प्रतिक्रिया बनती जा रही है।
युवाओं में ज्यादा क्यों दिख रहा यह ट्रेंड?
विशेषज्ञों का मानना है कि युवा पीढ़ी डिजिटल दुनिया से सबसे अधिक जुड़ी हुई है। वे दिनभर सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स ऐप और ऑनलाइन विज्ञापनों से घिरे रहते हैं।
इसके अलावा नौकरी का दबाव, करियर की अनिश्चितता और बेहतर जीवनशैली की चाह भी उन्हें भावनात्मक खरीदारी की ओर धकेल सकती है। कई रिपोर्टों के अनुसार, फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल कैटेगरी में युवाओं की ऑनलाइन भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
आर्थिक नुकसान भी हो सकता है
शुरुआत में छोटी-छोटी खरीदारी नुकसानदायक नहीं लगती, लेकिन यदि यह आदत बन जाए तो महीने के अंत में बजट बिगड़ सकता है। कई लोग क्रेडिट कार्ड का बिल भरने में कठिनाई महसूस करने लगते हैं या अनावश्यक कर्ज में फंस जाते हैं।
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार की गई भावनात्मक खरीदारी बचत को प्रभावित करती है और लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
इससे कैसे बचें?
विशेषज्ञ कुछ आसान उपाय सुझाते हैं—
कोई भी महंगी खरीदारी करने से पहले कम से कम 24 घंटे का इंतजार करें।
ऑनलाइन शॉपिंग ऐप्स की नोटिफिकेशन सीमित करें।
मासिक बजट पहले से तय करें।
तनाव होने पर खरीदारी की बजाय टहलना, किताब पढ़ना या किसी मित्र से बातचीत करें।
सोशल मीडिया पर बिताया जाने वाला समय कम करें।
यदि यह आदत नियंत्रण से बाहर हो रही हो, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
बदल रही है लोगों की सोच
दिलचस्प बात यह है कि डूम शॉपिंग के साथ-साथ अब 'लाउड बजटिंग' और सचेत खर्च (Mindful Spending) जैसे ट्रेंड भी लोकप्रिय हो रहे हैं। इसमें लोग खुलकर कहते हैं कि वे अनावश्यक खर्च नहीं करेंगे और अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं को महत्व देंगे। विशेषज्ञ इसे सकारात्मक बदलाव मान रहे हैं।
डूम शॉपिंग केवल एक इंटरनेट ट्रेंड नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय बनता जा रहा है। थोड़ी देर की खुशी के लिए की गई अनियोजित खरीदारी लंबे समय में आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियां बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीदारी जरूरत के बजाय भावनाओं को नियंत्रित करने का माध्यम बन रही है, तो समय रहते अपनी आदतों पर ध्यान देना और संतुलित जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है।

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