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DSP अमीषा कौन? जिन्होंने आगरा में ACP बनते ही यूं सुलझाया बाथरूम हत्याकांड, पिता भी रह चुके IPS

 


उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में सामने आए चर्चित बाथरूम हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। अब इस मामले में पुलिस जांच पूरी तरह नए मोड़ पर पहुंच चुकी है। सिकंदरा थाना क्षेत्र में अपने पति सुरेंद्र शर्मा की हत्या कर शव को घर के बाथरूम में दफनाने के आरोप में गिरफ्तार रूबी शर्मा को 4 जुलाई 2026 को न्यायालय के आदेश के बाद जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार इस सनसनीखेज मामले का खुलासा आगरा की सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) अमीषा के नेतृत्व में हुई जांच के दौरान हुआ।

यह मामला केवल एक हत्या तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें हत्या के बाद सबूत छिपाने, गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने और कई सप्ताह तक पुलिस व परिजनों को गुमराह करने जैसे कई पहलू शामिल थे। पुलिस का कहना है कि आरोपी महिला ने पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं, जिनका अन्य साक्ष्यों के साथ सत्यापन किया जा रहा है। मामले की जांच अभी भी विधिक प्रक्रिया के अनुसार जारी है।

पहली बड़ी चुनौती बनी बाथरूम हत्याकांड की जांच

एसीपी अमीषा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वह वर्ष 2022 बैच की डीएसपी अधिकारी हैं और फरवरी 2025 से आगरा शहर में सहायक पुलिस आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं।

उन्होंने बताया कि यह उनके करियर का पहला ऐसा मामला था, जिसमें कथित तौर पर पत्नी ने अपने ही पति की हत्या कर शव को घर के भीतर बाथरूम में दफना दिया। उनके अनुसार इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि हत्या का आरोप जिस महिला पर बाद में लगा, वही शुरुआत से पुलिस जांच में सहयोग करती दिखाई दे रही थी।

पत्नी ने ही दर्ज कराई थी गुमशुदगी की रिपोर्ट

पुलिस के अनुसार 26 मई 2026 को रूबी शर्मा अपने देवर अनिल शर्मा के साथ सिकंदरा थाने पहुंची थी। वहां उसने अपने पति सुरेंद्र शर्मा के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई।

गुमशुदगी दर्ज होने के बाद पुलिस ने सामान्य प्रक्रिया के तहत जांच शुरू की। विभिन्न स्थानों पर तलाश की गई, रिश्तेदारों से पूछताछ हुई और संभावित स्थानों की जानकारी जुटाई गई।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुरुआती जांच में किसी भी व्यक्ति ने रूबी शर्मा पर संदेह व्यक्त नहीं किया। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने भी उसे सामान्य व्यवहार करते हुए देखा, जिसके कारण जांच लगातार जटिल होती चली गई।

भरतपुर की घटना बनी जांच की अहम कड़ी

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि 15 और 16 मई के आसपास सुरेंद्र शर्मा राजस्थान के भरतपुर स्थित अपने रिश्तेदारों के यहां गया था।

पुलिस के अनुसार वहां शराब पीने के बाद उसका विवाद हुआ था। रिश्तेदारों ने कथित रूप से उसकी पत्नी को फोन कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी थी और पुलिस कार्रवाई की बात भी कही थी।

इसके बाद सुरेंद्र आगरा वापस लौट आया। लेकिन 18 मई के बाद वह अचानक गायब हो गया।

इस बीच आसपास के लोग जब भी सुरेंद्र के बारे में पूछते, तो रूबी सामान्य तरीके से जवाब देती कि वह किसी काम से बाहर गया है। पुलिस के अनुसार उसका व्यवहार इतना सामान्य था कि किसी को उस पर संदेह नहीं हुआ।

डिजिटल सबूत नहीं होने से बढ़ी मुश्किल

एसीपी अमीषा के अनुसार वर्तमान समय में अधिकांश आपराधिक मामलों में मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, लोकेशन, चैट या सोशल मीडिया जैसे डिजिटल साक्ष्य जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

लेकिन इस मामले में पुलिस को ऐसी कोई महत्वपूर्ण डिजिटल कड़ी नहीं मिली। न तो किसी मोबाइल गतिविधि से कोई स्पष्ट सुराग मिला और न ही किसी प्रेम संबंध या अन्य विवाद का ऐसा कोण सामने आया जिससे जांच आसान हो सके।

पुलिस के अनुसार सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि आरोपी महिला स्वयं पुलिस के साथ अपने पति की तलाश का नाटक कर रही थी।

घरेलू हिंसा की जानकारी बनी अहम सुराग

जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि सुरेंद्र शर्मा नियमित रूप से शराब पीता था और कथित रूप से पत्नी के साथ मारपीट करता था।

पुलिस के अनुसार परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी और घर का अधिकांश खर्च सुरेंद्र की मां की पेंशन से चलता था।

जांच अधिकारियों का कहना है कि घरेलू विवाद और कथित हिंसा से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने इस पहलू पर गंभीरता से जांच शुरू की। इसके बाद रूबी शर्मा से गहन पूछताछ की गई।

शुरुआत में उसने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन बाद में कथित तौर पर उसने घटना के संबंध में जानकारी दी।

नींद की गोलियां देने का दावा

पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी महिला ने बताया कि उसने पहले पति के भोजन में कथित रूप से 15 से 20 नींद की गोलियां मिला दी थीं।

जब वह गहरी नींद में चला गया, तब उसकी हत्या कर दी गई। हालांकि पुलिस इस कथित बयान का वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर परीक्षण कर रही है।

जांच अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि नींद की गोलियां कहां से खरीदी गई थीं और उनका उपयोग किस प्रकार किया गया।

बाथरूम में दफनाया शव, फिर बनवा दिया नया फर्श

पुलिस के अनुसार हत्या के बाद शव को घर के बाथरूम तक ले जाया गया।

जांच में सामने आया कि उस समय बाथरूम का फर्श कच्चा था। आरोपी ने कथित तौर पर मजदूरों से मिट्टी मंगवाई, लेकिन शक से बचने के लिए मिट्टी घर के अंदर न डलवाकर बाहर सड़क पर उतरवाई।

इसके बाद वह धीरे-धीरे बाल्टियों में मिट्टी भरकर अंदर ले गई और शव को ढक दिया।

जब शव पूरी तरह मिट्टी के नीचे दब गया, तब उसने राजमिस्त्री बुलाकर बाथरूम में नया पक्का फर्श बनवा दिया।

पुलिस का कहना है कि घटना के तुरंत बाद फर्श बनने के कारण आसपास किसी को दुर्गंध महसूस नहीं हुई और लंबे समय तक किसी को हत्या की जानकारी नहीं मिल सकी।

जांच के बाद सामने आया पूरा सच

पुलिस के अनुसार विभिन्न परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, पूछताछ और घटनास्थल के निरीक्षण के बाद मामला स्पष्ट होता गया।

आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बाथरूम का फर्श हटवाया गया और वहां से शव बरामद किया गया।

इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ और आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया।

एसीपी अमीषा की प्रेरणादायक यात्रा

इस बहुचर्चित मामले को सुलझाने वाली एसीपी अमीषा की व्यक्तिगत यात्रा भी प्रेरणादायक मानी जा रही है।

उनका जन्म 12 मई 1997 को लखनऊ में हुआ। उनके पिता विनोद कुमार सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस सेवा से पदोन्नत होकर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में पहुंचे थे और वर्ष 2022 में डीआईजी जेल के पद से सेवानिवृत्त हुए।

उच्च शिक्षा के बाद अमीषा ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर पहले नायब तहसीलदार के रूप में चयन प्राप्त किया।

बाद में उन्होंने पुलिस सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया और वर्ष 2022 में डीएसपी पद पर चयनित हुईं।

रोचक बात यह है कि जिस वर्ष उनके पिता सेवानिवृत्त हुए, उसी वर्ष उन्होंने पुलिस सेवा में अधिकारी के रूप में प्रवेश किया।

आगरा से रहा पुराना जुड़ाव

डीएसपी बनने से पहले अमीषा नायब तहसीलदार के रूप में भी आगरा में कार्य कर चुकी थीं।

पुलिस सेवा में आने के बाद उनकी पहली नियुक्ति आगरा ग्रामीण क्षेत्र में हुई। बाद में फरवरी 2026 में उन्होंने आगरा शहर में एसीपी के रूप में कार्यभार संभाला।

इस मामले के खुलासे के बाद उनकी जांच शैली और नेतृत्व क्षमता की व्यापक चर्चा हो रही है।

जांच अभी भी जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी महिला द्वारा पूछताछ में दिए गए बयानों का सत्यापन अन्य साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर किया जा रहा है।

मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय अदालत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही देगी।

आगरा का यह मामला न केवल एक सनसनीखेज हत्या के कारण चर्चा में है, बल्कि इसलिए भी कि आरोपी ने कथित रूप से हत्या के बाद लंबे समय तक पूरे घटनाक्रम को छिपाए रखा। वहीं पुलिस की सतर्क जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आखिरकार इस रहस्य से पर्दा उठ गया।

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