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हार्ट अटैक से पहले शरीर में क्या होता है? अब आई ऐसी गोली जिसने डॉक्टरों को भी चौंका दिया!

 


हाई कोलेस्ट्रॉल आज दुनिया भर में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों की सबसे बड़ी वजहों में से एक माना जाता है। जब शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL) का स्तर लगातार बढ़ता है, तो यह धीरे-धीरे धमनियों की दीवारों पर जमा होने लगता है। समय के साथ यह जमा परत रक्त प्रवाह को बाधित कर सकती है और कई मामलों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थिति पैदा कर देती है।

इसी बीच हाई कोलेस्ट्रॉल से जूझ रहे मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने दुनिया की पहली ओरल PCSK9 इनहिबिटर दवा लिपफेंड्रा (Lipfendra) को मंजूरी दे दी है। अब तक इस श्रेणी की दवाएं केवल इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध थीं, लेकिन अब मरीजों के पास गोली के रूप में भी एक नया विकल्प होगा।

हालांकि यह दवा फिलहाल अमेरिका में स्वीकृत हुई है और भारत में अभी उपलब्ध नहीं है।

क्या होता है हाई कोलेस्ट्रॉल और क्यों है यह खतरनाक?

कोलेस्ट्रॉल शरीर में पाया जाने वाला एक वसायुक्त (फैटी) पदार्थ है, जिसकी जरूरत कोशिकाओं, हार्मोन और विटामिन-डी के निर्माण के लिए होती है। लेकिन जब शरीर में LDL यानी "बैड कोलेस्ट्रॉल" का स्तर बहुत अधिक हो जाता है, तो यह रक्त वाहिकाओं की भीतरी दीवारों पर जमा होने लगता है।

इस प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है। समय के साथ यह जमा परत धमनियों को संकरा कर देती है, जिससे हृदय तक पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं पहुंच पाता।

यदि यह रुकावट पूरी तरह बढ़ जाए, तो हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

अब तक इंजेक्शन ही था विकल्प

जिन मरीजों में सामान्य दवाओं के बावजूद बैड कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित नहीं हो पाता, उन्हें डॉक्टर PCSK9 इनहिबिटर दवाएं देते हैं।

अब तक ये दवाएं हर दो या चार सप्ताह में इंजेक्शन के रूप में दी जाती थीं।

कई मरीज नियमित इंजेक्शन लगवाने से हिचकिचाते थे या उनके लिए बार-बार अस्पताल जाना कठिन होता था। ऐसे मरीजों के लिए अब टैबलेट के रूप में उपलब्ध विकल्प उपचार को अधिक सुविधाजनक बना सकता है।

क्या है लिपफेंड्रा?

लिपफेंड्रा दुनिया की पहली ऐसी ओरल PCSK9 इनहिबिटर दवा है जिसे FDA से मंजूरी मिली है।

यह दवा दिन में एक बार टैबलेट के रूप में ली जाती है।

विशेष रूप से उन मरीजों के लिए इसे उपयोगी माना जा रहा है जिनका LDL कोलेस्ट्रॉल अन्य उपचारों के बावजूद लगातार ऊंचा बना रहता है।

यह दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पहले से चल रही दवाओं के साथ दी जा सकती है।

किन मरीजों को हो सकता है फायदा?

विशेषज्ञों के अनुसार यह दवा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है—

  • जिनका बैड कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक रहता है।

  • जिन्हें हेटेरोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (HeFH) जैसी आनुवंशिक बीमारी है।

  • जिनका LDL स्तर स्टैटिन और अन्य दवाओं के बावजूद नियंत्रित नहीं हो रहा।

  • जो PCSK9 इंजेक्शन नहीं लगवाना चाहते या उन्हें इंजेक्शन लेने में परेशानी होती है।

हालांकि यह तय करना कि किसी मरीज को यह दवा दी जानी चाहिए या नहीं, केवल योग्य डॉक्टर ही कर सकते हैं।

क्लीनिकल ट्रायल में क्या मिला परिणाम?

दवा के क्लीनिकल ट्रायल में कुल 3,207 वयस्क मरीजों को शामिल किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, जिन मरीजों ने अन्य उपचारों के साथ इस ओरल PCSK9 इनहिबिटर दवा का उपयोग किया, उनमें 24 सप्ताह के भीतर LDL कोलेस्ट्रॉल में लगभग 56 से 59 प्रतिशत तक की कमी देखी गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह परिणाम इंजेक्शन के रूप में दी जाने वाली PCSK9 दवाओं के समान प्रभावी पाया गया।

हालांकि, किसी भी दवा की तरह इसका उपयोग भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

क्या यह स्टैटिन की जगह ले लेगी?

इस सवाल पर विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि फिलहाल ऐसा नहीं कहा जा सकता।

चिकित्सकों के अनुसार स्टैटिन अभी भी हाई कोलेस्ट्रॉल के इलाज की पहली पंक्ति की दवाएं हैं।

यदि स्टैटिन से पर्याप्त लाभ नहीं मिलता या मरीज उन्हें सहन नहीं कर पाते, तब अन्य विकल्पों पर विचार किया जाता है।

इसलिए लिपफेंड्रा को शुरुआती इलाज के रूप में नहीं बल्कि चुनिंदा मरीजों के लिए अतिरिक्त विकल्प माना जा रहा है।

AIIMS विशेषज्ञ ने क्या कहा?

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय के अनुसार, अब तक PCSK9 इनहिबिटर केवल इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध थे।

उन्होंने बताया कि नई ओरल दवा LDL को लगभग 50 से 60 प्रतिशत तक कम करने में सक्षम है।

डॉ. रॉय के अनुसार यह उन मरीजों के लिए उपयोगी विकल्प हो सकती है जो इंजेक्शन नहीं लगवाना चाहते।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी यह साबित होना बाकी है कि इस दवा का लंबे समय तक हार्ट अटैक और अन्य हृदय रोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

इलाज की कौन-सी पंक्ति में इस्तेमाल हो सकती है?

विशेषज्ञों के अनुसार इस दवा का उपयोग संभवतः चौथी पंक्ति के उपचार के रूप में किया जाएगा।

आमतौर पर पहले मरीज को—

  • स्टैटिन,

  • फिर एजेटिमाइब,

  • उसके बाद बेम्पेडोइक एसिड जैसी दवाएं दी जाती हैं।

यदि इसके बाद भी LDL नियंत्रित नहीं होता, तब PCSK9 इनहिबिटर जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

भारत में कब तक मिलेगी यह दवा?

हालांकि FDA की मंजूरी मिलने के बाद भी भारत में यह दवा तुरंत उपलब्ध नहीं होगी।

इंडियन फार्मास्युटिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुभाष मंडल के अनुसार, किसी दवा को विदेश में मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसे भारत में तुरंत बेचा जा सकता है।

भारत में किसी नई दवा को बाजार में लाने से पहले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से नियामकीय मंजूरी लेनी होती है।

जरूरत पड़ने पर भारतीय नियमों के अनुसार अतिरिक्त क्लीनिकल ट्रायल भी कराए जा सकते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है।

क्या विदेश से मंगाई जा सकती है दवा?

विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में कोई व्यक्ति अपने रिश्तेदारों या दोस्तों के माध्यम से ऐसी दवा सीधे भारत नहीं मंगा सकता।

कुछ विशेष चिकित्सा परिस्थितियों में सीमित मात्रा में व्यक्तिगत उपयोग के लिए अलग नियामकीय प्रक्रिया के तहत अनुमति ली जा सकती है।

ऐसे मामलों में भी संबंधित सरकारी नियमों का पालन आवश्यक होता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल से बचने के उपाय

विशेषज्ञों का कहना है कि दवा के साथ-साथ जीवनशैली में सुधार सबसे महत्वपूर्ण है।

इसके लिए—

  • संतुलित और कम वसा वाला भोजन लें।

  • नियमित व्यायाम करें।

  • धूम्रपान और तंबाकू से दूरी रखें।

  • शराब का सेवन सीमित करें।

  • वजन नियंत्रित रखें।

  • समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल की जांच कराएं।

  • डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं का नियमित सेवन करें।

हाई कोलेस्ट्रॉल के इलाज में ओरल PCSK9 इनहिबिटर लिपफेंड्रा को FDA से मिली मंजूरी चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति मानी जा रही है। इंजेक्शन के बजाय गोली के रूप में उपलब्ध यह विकल्प उन मरीजों के लिए सुविधाजनक हो सकता है जिनका LDL कोलेस्ट्रॉल मौजूदा उपचार के बावजूद नियंत्रित नहीं हो पा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा सभी मरीजों के लिए नहीं है और न ही यह स्टैटिन का विकल्प है। भारत में इसके उपलब्ध होने में अभी समय लग सकता है। इसलिए मरीजों को किसी भी नई दवा का उपयोग केवल विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह और स्वीकृत चिकित्सा दिशानिर्देशों के अनुसार ही करना चाहिए।

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