Breaking News

क्या गुजरात में रची जा रही थी बड़ी साजिश? ATS की जांच में खुला जैश के संदिग्ध मॉड्यूल का राज, 5 और गिरफ्तार

अहमदाबाद: गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े एक संदिग्ध मॉड्यूल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, इन गिरफ्तारियों से पहले पकड़े गए आठ आरोपियों से पूछताछ के दौरान नए नेटवर्क की जानकारी सामने आई थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि गिरफ्तार संदिग्ध कथित तौर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) तैयार करने की जानकारी जुटा रहे थे और विस्फोटक बनाने के लिए आवश्यक सामग्री भी एकत्र कर रहे थे। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोप अभी अदालत में सिद्ध नहीं हुए हैं।

पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिला अहम सुराग

गुजरात ATS के अनुसार, इस महीने की शुरुआत में गिरफ्तार किए गए आरोपी मोहम्मद अमीन शेरा से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। जांच में यह संकेत मिला कि वह अकेला काम नहीं कर रहा था, बल्कि उसके साथ एक और समूह भी सक्रिय था।

इसी सूचना के आधार पर ATS ने 15 जुलाई को गुजरात के विभिन्न जिलों में एक साथ छापेमारी की और पांच अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया। एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई पहले से चल रही जांच का हिस्सा है।

कौन-कौन हुए गिरफ्तार?

ATS द्वारा गिरफ्तार किए गए पांच संदिग्धों की पहचान इस प्रकार बताई गई है—

  • बिलाल शेरा (अहमदाबाद)

  • मोहम्मद अय्यूब कडीवाल (पाटन)

  • मोहम्मद अय्यूबभाई सुनसारा (पाटन)

  • शफी रईस मुखी (बनासकांठा)

  • मोहम्मद हसन हनीफभाई करदिया

कड़ी की अदालत ने सभी आरोपियों को पूछताछ के लिए आठ दिन की ATS रिमांड पर भेज दिया है। जांच एजेंसी का कहना है कि रिमांड के दौरान डिजिटल साक्ष्यों, संपर्कों और कथित गतिविधियों की विस्तार से जांच की जाएगी।

IED बनाने की कथित तैयारी

ATS के अनुसार, जांच में यह सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर IED तैयार करने और टाइमर आधारित विस्फोटक उपकरण बनाने की तकनीक सीख रहे थे।

एजेंसी का दावा है कि इसके लिए उन्होंने इंटरनेट और अन्य ऑनलाइन स्रोतों से जानकारी जुटाई। साथ ही स्थानीय बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पोटैशियम नाइट्रेट, सल्फर, चारकोल जैसी सामग्री भी खरीदी, जिनका उपयोग विस्फोटक तैयार करने में किया जा सकता है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी तारों की गुणवत्ता, पाइप, टाइमर और अन्य उपकरणों पर भी कथित रूप से प्रयोग कर रहे थे।

आठ बार परीक्षण करने का दावा

ATS का दावा है कि वर्ष 2023 से फरवरी 2026 के बीच संदिग्धों ने अलग-अलग स्थानों पर आठ बार विस्फोट संबंधी परीक्षण या पूर्वाभ्यास करने का प्रयास किया।

हालांकि एजेंसी ने अभी तक इन कथित परीक्षणों के स्थान और परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इन दावों की पुष्टि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर होगी।

AK-47 और अन्य प्रशिक्षण की जांच

इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए आठ संदिग्धों से पूछताछ के दौरान एजेंसियों को कुछ और महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने का दावा किया गया है।

ATS के अनुसार, जांच में यह सामने आया कि दो संदिग्ध कथित तौर पर जम्मू-कश्मीर गए थे, जहां उन्होंने AK-47 राइफल चलाने का प्रशिक्षण लेने की कोशिश की थी।

इसके अलावा एजेंसी का यह भी दावा है कि उन्होंने कार्बन मोनोऑक्साइड गैस तैयार करने और उसके संभावित उपयोग से जुड़ी जानकारी भी एकत्र की थी।

इन दावों की पुष्टि के लिए संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड, यात्रा विवरण और अन्य साक्ष्यों की जांच जारी है।

डिजिटल उपकरणों से मिला कथित कट्टरपंथी साहित्य

ATS ने बताया कि जांच के दौरान आरोपियों के कब्जे से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए।

एजेंसी के अनुसार, इनमें कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर के भाषण, वीडियो और कट्टरपंथी विचारधारा से संबंधित डिजिटल सामग्री मिली है।

जांच अधिकारियों का आरोप है कि बिलाल शेरा ने मोहम्मद अमीन शेरा को एक पेन ड्राइव दी थी, जिसमें कथित रूप से ऐसे वीडियो और भाषण मौजूद थे।

साथ ही जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि संदिग्धों ने कथित तौर पर जिहाद से संबंधित 43 डिजिटल पुस्तकें डाउनलोड की थीं।

छात्रों को जोड़ने के आरोप

ATS का दावा है कि जांच में ऐसे संकेत भी मिले हैं कि कुछ बैठकों के माध्यम से कथित रूप से कुछ छात्रों को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया।

हालांकि एजेंसी ने अभी तक इस संबंध में किसी छात्र या संस्थान का नाम सार्वजनिक नहीं किया है और जांच जारी होने का हवाला दिया है।

पहले भी आठ संदिग्ध हुए थे गिरफ्तार

गौरतलब है कि 2 जुलाई को गुजरात ATS ने पहली बार इस मामले में आठ संदिग्धों को गिरफ्तार किया था।

एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने कथित तौर पर "दारुल इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद" नाम से एक मॉड्यूल तैयार किया था।

छापेमारी के दौरान ATS ने कथित रूप से—

  • जैश-ए-मोहम्मद का झंडा,

  • संगठन से जुड़ा साहित्य,

  • कट्टरपंथी दस्तावेज,

  • लगभग 1.30 लाख रुपये नकद

बरामद करने का दावा किया है।

बाद में अदालत ने पहले गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपियों की रिमांड भी बढ़ा दी थी ताकि आगे की पूछताछ की जा सके।

UAPA और BNS के तहत दर्ज मामला

ATS ने पूरे मामले में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

अधिकारियों के अनुसार, अब जांच का मुख्य फोकस निम्न बिंदुओं पर है—

  • डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच

  • बैंक और वित्तीय लेनदेन

  • सोशल मीडिया गतिविधियां

  • अन्य राज्यों और विदेशी संपर्कों की जांच

  • संभावित सहयोगियों की पहचान

अदालत में अभी होना है आरोपों का परीक्षण

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ATS द्वारा लगाए गए सभी आरोप फिलहाल जांच एजेंसी के दावे हैं। भारतीय न्याय प्रणाली के अनुसार किसी भी आरोपी को तब तक दोषी नहीं माना जाता जब तक अदालत में आरोप सिद्ध न हो जाएं।

आने वाले दिनों में फॉरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य दस्तावेज अदालत में पेश किए जाएंगे, जिनके आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया चलेगी।

गुजरात ATS की ताजा कार्रवाई को राज्य में आतंकवाद विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। एजेंसी ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक संदिग्ध मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए पांच और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपी कथित तौर पर IED बनाने, विस्फोट संबंधी परीक्षण करने और कट्टरपंथी सामग्री एकत्र करने में लगे थे। हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल जांच एजेंसी के दावे हैं और इनकी अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। ATS अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसके तार और किन लोगों या संगठनों से जुड़े हो सकते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं