जौनपुर में हैरान कर देने वाली लापरवाही! 6 साल का मासूम क्लासरूम में बंद रह गया, स्कूल बंद कर घर चला गया स्टाफ; डेढ़ घंटे तक रोता रहा बच्चा
Jaunpur News: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले से सरकारी स्कूल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली एक घटना सामने आई है। यहां एक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाला 6 वर्षीय छात्र विपिन निषाद कथित तौर पर स्कूल की छुट्टी के बाद भी कक्षा के अंदर ही बंद रह गया, जबकि स्कूल का स्टाफ परिसर बंद करके घर चला गया। बताया जा रहा है कि मासूम करीब डेढ़ घंटे तक क्लासरूम के भीतर रोता और मदद के लिए आवाज लगाता रहा। बाद में जब बच्चा घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान स्कूल पहुंचने पर उन्होंने खिड़की से बच्चे को रोते हुए देखा, जिसके बाद उसे बाहर निकाला गया।
यह घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और स्कूल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मामले की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए हैं।
कैसे हुआ पूरा घटनाक्रम?
जानकारी के अनुसार, जौनपुर जिले के एक प्राथमिक विद्यालय में कक्षा-1 में पढ़ने वाला विपिन निषाद रोज की तरह स्कूल गया था। दोपहर में छुट्टी होने के बाद अधिकांश बच्चे अपने-अपने घर चले गए, लेकिन किसी कारणवश विपिन कक्षा के अंदर ही रह गया।
आरोप है कि स्कूल स्टाफ ने सभी कमरों की जांच किए बिना ही विद्यालय में ताला लगा दिया और घर चला गया। इस दौरान मासूम छात्र कक्षा के भीतर ही बंद रह गया।
डेढ़ घंटे तक मदद की गुहार लगाता रहा बच्चा
बताया जा रहा है कि कमरे में बंद होने के बाद विपिन लगातार रोता रहा और बाहर निकलने के लिए आवाज लगाता रहा। लेकिन स्कूल परिसर बंद होने के कारण उसकी आवाज किसी तक नहीं पहुंच सकी।
छोटा बच्चा काफी देर तक डरा-सहमा हुआ कक्षा के भीतर अकेला बैठा रहा। घटना के दौरान वह लगातार रोता रहा और बाहर निकलने की कोशिश करता रहा।
घर नहीं पहुंचा तो परिजन हुए परेशान
जब स्कूल की छुट्टी के काफी समय बाद भी विपिन घर नहीं पहुंचा तो उसके परिजन चिंतित हो गए। पहले उन्होंने आसपास के बच्चों और पड़ोसियों से जानकारी ली, लेकिन जब कोई जानकारी नहीं मिली तो पूरे गांव में उसकी तलाश शुरू कर दी।
काफी खोजबीन के बाद परिजन स्कूल पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि विद्यालय का मुख्य गेट बंद है। इसी दौरान किसी की नजर कक्षा की खिड़की पर पड़ी, जहां अंदर विपिन रोता हुआ दिखाई दिया।
बच्चे को उस हालत में देखकर परिजनों के होश उड़ गए।
बाहर निकालने के बाद मिली राहत
बच्चे के क्लासरूम में बंद होने की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। किसी तरह स्कूल का ताला खुलवाया गया और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
बाहर आने के बाद बच्चा काफी डरा हुआ था। परिजनों ने उसे संभाला और घर ले गए।
गनीमत रही कि बच्चा लंबे समय तक बंद रहने के बावजूद शारीरिक रूप से सुरक्षित था और उसे किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई।
लोगों में भारी नाराजगी
घटना की जानकारी फैलते ही स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चे की समय रहते तलाश नहीं होती, तो देर शाम तक वह क्लासरूम में ही बंद रह सकता था।
लोगों ने सवाल उठाया कि छुट्टी के समय क्या किसी शिक्षक या कर्मचारी ने यह सुनिश्चित नहीं किया कि सभी बच्चे सुरक्षित स्कूल से बाहर निकल चुके हैं?
शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना सरकारी स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्येक विद्यालय में छुट्टी से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि—
सभी बच्चे सुरक्षित स्कूल परिसर से बाहर निकल चुके हों।
प्रत्येक कक्षा की जांच की जाए।
शौचालय, पुस्तकालय और अन्य कमरों का निरीक्षण किया जाए।
विद्यालय बंद करने से पहले अंतिम सुरक्षा जांच (Final Safety Check) अनिवार्य रूप से की जाए।
यदि इन प्रक्रियाओं का पालन किया जाए तो ऐसी घटनाओं से आसानी से बचा जा सकता है।
बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी जिम्मेदारी
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे बहुत छोटे होते हैं। कई बार वे खेलते-खेलते किसी कमरे में रह जाते हैं या सो जाते हैं। ऐसे में शिक्षकों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
स्कूल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी केवल पढ़ाई कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
जांच के आदेश
मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने घटना की जानकारी ली है। अधिकारियों ने संबंधित विद्यालय से रिपोर्ट मांगी है।
यदि जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार शिक्षकों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि जांच पूरी होने तक प्रशासन ने किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी आधिकारिक रूप से तय नहीं की है।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता
इस घटना के बाद क्षेत्र के अन्य अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि वे अपने बच्चों को इस भरोसे से स्कूल भेजते हैं कि वहां उनकी पूरी सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा।
उन्होंने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी सरकारी और निजी विद्यालयों में सुरक्षा संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का सख्ती से पालन कराया जाए।
प्राइमरी स्कूल में लापरवाही की हद, 6 साल के मासूम को क्लासरूम में बंद कर घर चला गया स्टाफ
— News Leader (@NewsLeaderLive) July 18, 2026
उत्तर प्रदेश के जौनपुर से लापरवाही की बड़ी घटना सामने आई है जहां प्राइमरी स्कूल में कक्षा 1 के छात्र को क्लासरूम में ही बंद करके स्टाफ घर चला गया. करीब डेढ़ घंटे तक अदंर से चिल्लाता रहा… pic.twitter.com/N1IeEiOZ4A
विशेषज्ञों की सलाह
बाल सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्कूलों में निम्नलिखित व्यवस्थाएं अनिवार्य होनी चाहिए—
छुट्टी के समय सभी कमरों की भौतिक जांच।
अंतिम शिक्षक या कर्मचारी द्वारा सुरक्षा चेकलिस्ट का पालन।
CCTV कैमरों की प्रभावी निगरानी।
छोटे बच्चों के लिए उपस्थिति और निकासी (Exit) का रिकॉर्ड।
नियमित सुरक्षा ऑडिट और कर्मचारियों का प्रशिक्षण।
जौनपुर के प्राथमिक विद्यालय में 6 वर्षीय छात्र विपिन निषाद के क्लासरूम में बंद रह जाने की घटना बेहद गंभीर मानी जा रही है। गनीमत रही कि परिजनों ने समय रहते बच्चे की तलाश शुरू कर दी और वह सुरक्षित मिल गया। यदि तलाश में और देर हो जाती तो परिणाम और गंभीर हो सकते थे। यह घटना केवल एक स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता की ओर भी संकेत करती है। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की जांच और जिम्मेदार लोगों पर होने वाली संभावित कार्रवाई पर टिकी है।

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