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ईरान पर लगातार 11वीं रात अमेरिकी हमले! होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ा टकराव, तेल की कीमतों में उछाल से दुनिया में बढ़ी चिंता

 


मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब और अधिक गंभीर होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार 11वीं रात ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में विमान हैंगर, ड्रोन भंडारण केंद्र और सैन्य लॉजिस्टिक्स से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, ईरान भी जवाबी कार्रवाई जारी रखे हुए है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

इस बढ़ते संघर्ष का असर अब केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री व्यापार, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी इसके प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति जल्द नहीं संभली तो इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर और गहरा हो सकता है।

लगातार 11वीं रात चला अमेरिकी सैन्य अभियान

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि हालिया सैन्य अभियान में ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। रिपोर्टों के अनुसार, हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को सीमित करना और होर्मुज स्ट्रेट में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना बताया गया है।

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि हाल के महीनों में क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों ने समुद्री सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है। इसी कारण अमेरिका ने अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है।

होर्मुज स्ट्रेट क्यों बना सबसे बड़ा विवाद?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।

हाल के दिनों में इस क्षेत्र में कई जहाजों पर हमलों और बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित हुआ है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का कहना है कि यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रहना चाहिए, जबकि ईरान इस क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मुद्दे उठाता रहा है।

विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण को लेकर बढ़ा विवाद इस पूरे संघर्ष का सबसे संवेदनशील पहलू बन चुका है।

ईरान की जवाबी कार्रवाई जारी

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने भी जवाबी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा बहरीन, कुवैत और क्षेत्र के अन्य देशों में सुरक्षा अलर्ट जारी किए गए और कई स्थानों पर मिसाइल चेतावनी सायरन बजने की खबरें भी आईं।

हालांकि, अलग-अलग घटनाओं के संबंध में दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में संभव नहीं हो पाई है।

ट्रंप ने बातचीत के संकेतों को किया खारिज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि फिलहाल ईरान के साथ बातचीत में उनकी कोई रुचि नहीं है और सैन्य दबाव जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े क्षेत्रों के आसपास भी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

इस बयान के बाद कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को लेकर भी नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल

युद्ध का सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर देखने को मिल रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। तेल की बढ़ती कीमतों का असर दुनिया के कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ रहा है। अमेरिका में भी ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही और बाधित होती है तो तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।

अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की रिपोर्ट

एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद घायल अमेरिकी सैनिकों की संख्या 500 से अधिक हो चुकी है। यह संख्या अमेरिकी रक्षा विभाग के सार्वजनिक रिकॉर्ड से अधिक बताई गई है। अधिकारियों का कहना है कि आधिकारिक डेटाबेस में जानकारी अपडेट होने में समय लगता है, इसलिए वास्तविक आंकड़े अधिक हो सकते हैं।

इसके अलावा युद्ध में कई अमेरिकी सैनिकों की मौत की भी पुष्टि की गई है, जिससे अमेरिका के भीतर इस संघर्ष को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

अमेरिकी राजनीति में भी बढ़ा दबाव

अमेरिका में आगामी मिडटर्म चुनावों के मद्देनज़र यह युद्ध राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।

विपक्षी नेताओं के साथ-साथ कुछ सांसदों ने भी युद्ध की बढ़ती लागत, सैनिकों की सुरक्षा और स्पष्ट रणनीति को लेकर सवाल उठाए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग ने युद्ध संचालन के लिए अतिरिक्त बजट की भी मांग की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संघर्ष लंबा चलता है तो इसका असर चुनावी माहौल पर भी पड़ सकता है।

खाड़ी देशों में बढ़ी सुरक्षा

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।

बहरीन, कुवैत और अन्य देशों में सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाई गई है। समुद्री मार्गों पर भी निगरानी तेज कर दी गई है ताकि किसी भी नए हमले की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

कूटनीतिक प्रयासों पर संकट

हाल के दिनों में संघर्ष को रोकने के लिए विभिन्न देशों द्वारा मध्यस्थता की कोशिशें भी हुई हैं, लेकिन लगातार सैन्य कार्रवाई के कारण इन प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पक्षों के कठोर रुख के चलते फिलहाल तत्काल युद्धविराम की संभावना कमजोर दिखाई दे रही है।

दुनिया की बढ़ी चिंता

संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक पहले ही इस संघर्ष के व्यापक प्रभावों को लेकर चिंता जता चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि युद्ध और फैलता है तो केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजार भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने सैन्य और रणनीतिक कदम पीछे हटाने के संकेत नहीं दे रहे हैं। ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में बढ़ता है और क्या कूटनीतिक प्रयास दोबारा इस संकट को कम करने में सफल हो पाएंगे।

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