शिक्षक बोला- 'अकेले आना, तभी मिलेगी कॉपी'... 2 दिन बाद छात्रा ने खोली जुबान, स्कूल में मच गया बवाल
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है। जिले के शंभूगढ़ थाना क्षेत्र स्थित एक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक पर 17 वर्षीय छात्रा के साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार करने और उसे नोटबुक लौटाने के बहाने स्टाफ रूम में अकेले बुलाने का आरोप लगा है। छात्रा द्वारा परिजनों को घटना की जानकारी देने के बाद गांव में आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और छात्र-छात्राएं विद्यालय के बाहर एकत्र हो गए और मामले में निष्पक्ष जांच तथा सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे।
घटना के बाद शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से एपीओ (Awaiting Posting Order) कर दिया है। वहीं, पीड़िता की शिकायत के आधार पर शंभूगढ़ थाना पुलिस ने भारतीय कानून की संबंधित धाराओं तथा पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दो दिन बाद सामने आया मामला
जानकारी के अनुसार यह घटना 16 जुलाई की बताई जा रही है। छात्रा का आरोप है कि उस दिन विद्यालय में नियमित कक्षाएं चल रही थीं और शिक्षक विद्यार्थियों का होमवर्क जांच रहे थे। सभी विद्यार्थियों की कॉपियां जांचने के बाद लौटा दी गईं, लेकिन छात्रा की नोटबुक अपने पास रख ली गई।
पीड़िता के अनुसार, जब उसने अपनी नोटबुक मांगी तो शिक्षक ने कथित तौर पर कहा कि वह बाद में अकेले आकर नोटबुक ले जाए। छात्रा का कहना है कि शिक्षक ने स्पष्ट रूप से उसे अकेले आने के लिए कहा।
सहेलियों के साथ पहुंची तो लौटाने से किया इनकार
शिकायत में छात्रा ने बताया कि कुछ समय बाद वह अपनी दो सहेलियों के साथ शिक्षक के पास पहुंची। उसका कहना है कि शिक्षक ने तीनों को एक साथ देखकर नाराजगी जताई और पूछा कि वह अपनी सहेलियों को साथ लेकर क्यों आई है।
पीड़िता के अनुसार, शिक्षक ने कथित रूप से कहा कि जब वह अकेले आएगी तभी उसकी नोटबुक वापस दी जाएगी। छात्रा का आरोप है कि इस व्यवहार के बाद वह असहज और भयभीत हो गई।
पुलिस फिलहाल छात्रा द्वारा लगाए गए इन आरोपों की जांच कर रही है।
घटना के बाद स्कूल जाना बंद कर दिया
परिजनों के अनुसार घटना के बाद छात्रा मानसिक रूप से परेशान रहने लगी। उसने दो दिनों तक विद्यालय जाना भी बंद कर दिया। शुरुआत में उसने किसी को पूरी बात नहीं बताई, लेकिन जब परिवार वालों ने उसके व्यवहार में बदलाव देखा और कारण पूछा तो उसने अपने भाई को पूरी घटना की जानकारी दी।
बताया जा रहा है कि अन्य छात्राओं ने भी शिक्षक के व्यवहार को लेकर अपने-अपने परिवारों से शिकायत की। इसके बाद मामला तेजी से पूरे गांव में फैल गया।
विद्यालय के बाहर हुआ प्रदर्शन
शनिवार को दोपहर के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण, अभिभावक और छात्र-छात्राएं विद्यालय परिसर के बाहर एकत्र हो गए। उन्होंने आरोपी शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया।
कई छात्र-छात्राओं ने भी कक्षाओं का बहिष्कार कर विद्यालय से बाहर आकर प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा।
पुलिस ने लोगों को शांत कर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।
चार छात्राओं की शिकायत होने की बात
विद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य रामेश्वर लाल शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चार छात्राओं ने शिक्षक के व्यवहार को लेकर शिकायत की है।
उन्होंने कहा कि मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से एपीओ कर दिया है। साथ ही विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
शंभूगढ़ थाना प्रभारी रोहिताश यादव ने बताया कि विद्यालय के बाहर हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। जांच के दौरान छात्राओं और परिजनों ने शिक्षक पर अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए।
पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग भी करेगा अलग से जांच
पुलिस जांच के साथ-साथ शिक्षा विभाग ने भी विभागीय जांच शुरू करने की घोषणा की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमों के अनुसार कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल आरोपी शिक्षक को विद्यालय से हटा दिया गया है ताकि जांच निष्पक्ष रूप से पूरी की जा सके और विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित न हो।
स्कूलों में सुरक्षित माहौल की आवश्यकता
यह घटना एक बार फिर विद्यालयों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और विश्वासपूर्ण वातावरण को लेकर चर्चा का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी निभाते हैं।
यदि किसी छात्र या छात्रा को विद्यालय में असुरक्षा या भय महसूस होता है तो इसका सीधा असर उसकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लेना और समयबद्ध जांच करना आवश्यक है।
POCSO कानून का उद्देश्य
पॉक्सो (Protection of Children from Sexual Offences) अधिनियम बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया विशेष कानून है। इस कानून के तहत नाबालिगों से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई विशेष प्रक्रिया के अनुसार की जाती है।
हालांकि किसी भी मामले में आरोप दर्ज होना और दोष सिद्ध होना अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और जांच पूरी होने के बाद ही सामने आता है।
भीलवाड़ा के शंभूगढ़ क्षेत्र का यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर छात्रा और अन्य छात्राओं ने शिक्षक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है। आरोपी शिक्षक को एपीओ किया जा चुका है और पुलिस ने पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी, जबकि जांच पूरी होने तक मामले के सभी तथ्यों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर विद्यालयों में सुरक्षित, सम्मानजनक और विश्वासपूर्ण शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

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