मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का पलटवार, कुवैत की अहम तेल और ऊर्जा सुविधाएं बनीं निशाना
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब पूरे खाड़ी क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमले तेज कर दिए हैं। ताजा घटनाक्रम में कुवैत की महत्वपूर्ण ऊर्जा और तेल संबंधी सुविधाओं को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है। इसके अलावा जॉर्डन और अन्य अमेरिकी सहयोगी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी हमलों की सूचना है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों पक्षों के बीच तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
कुवैत की तेल सुविधा पर हमला
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) के अनुसार, ईरान की ओर से किए गए हमलों में उसकी एक महत्वपूर्ण तेल सुविधा को नुकसान पहुंचा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हमले में भौतिक क्षति हुई है और कई लोग घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई, जबकि प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षा कारणों से खाली करा लिया गया। संबंधित सरकारी एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
कुवैती अधिकारियों ने बताया कि आपातकालीन प्रतिक्रिया दलों को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
बिजली और जल संयंत्र में भी लगी आग
हमले का असर केवल तेल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। कुवैत के बिजली, जल एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने जानकारी दी कि एक बिजली उत्पादन और समुद्री जल विलवणीकरण (Water Desalination) संयंत्र का हिस्सा भी हमले की चपेट में आया, जिससे आग लग गई।
बाद में दमकल विभाग ने आग पर नियंत्रण पाने के लिए व्यापक अभियान चलाया। ऐसे संयंत्र कुवैत जैसे रेगिस्तानी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि देश की पेयजल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा समुद्री जल को मीठा बनाकर ही उपलब्ध कराया जाता है।
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका लगातार कई दिनों से ईरान के सैन्य ठिकानों, निगरानी केंद्रों और हथियार भंडारण स्थलों पर हवाई हमले कर रहा है। अमेरिकी सैन्य कमान का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।
इसके जवाब में ईरान ने उन देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाने का दावा किया है, जहां अमेरिकी सेना की मौजूदगी है। इस जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाना भी निशाने पर
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के अल-अजरक क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की भी सूचना है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी पूरी तरह नहीं हो सकी है।
ड्रोन मार गिराने का दावा
ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसके वायु रक्षा तंत्र ने बुशेहर बंदरगाह के ऊपर उड़ रहे अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उनके उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा की गई।
हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे मामलों में दोनों देशों के दावों और वास्तविक स्थिति में अंतर हो सकता है, इसलिए स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता
ईरान ने यह भी दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे कुछ जहाजों को रोक दिया। दूसरी ओर अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के कुछ दावों का खंडन किया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यदि यहां सैन्य गतिविधियां बढ़ती हैं तो अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है।
तेल बाजार पर दिखने लगा असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई देना शुरू हो गया है। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ने से ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है।
यदि संघर्ष लंबा चलता है या तेल उत्पादन और निर्यात सुविधाओं को और नुकसान पहुंचता है, तो वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
कूटनीतिक समाधान की जरूरत
संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक लगातार संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सैन्य कार्रवाई का दायरा और बढ़ा तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर पड़ सकता है।
कई देशों ने अपने नागरिकों को क्षेत्र में यात्रा करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह भी जारी की है।
आगे क्या?
मौजूदा हालात को देखते हुए पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के तत्काल संकेत नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका अपने सैन्य अभियानों को जारी रखने की बात कह रहा है, जबकि ईरान भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन पूरे क्षेत्र के लिए बेहद अहम होंगे। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रह गया है। कुवैत की तेल और ऊर्जा सुविधाओं पर हमले, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाए जाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात शांत होते हैं या यह संकट और बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप लेता है।

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