Breaking News

बार-बार गैस, कब्ज और एसिडिटी से हैं परेशान? गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट ने बताईं 3 बड़ी गलतियां, जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी



आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण पाचन संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। गैस, कब्ज, एसिडिटी, पेट फूलना, सीने में जलन और अपच जैसी परेशानियां अब हर उम्र के लोगों में आम होती जा रही हैं। कई लोग इन समस्याओं से राहत पाने के लिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सहारा लेने लगते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा करना हमेशा सुरक्षित नहीं होता।

गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. जोसेफ ने हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उनके अनुसार, कुछ ऐसी आदतें और दवाएं हैं जो लंबे समय में पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सलाह केवल व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित नहीं है, बल्कि विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों और प्रकाशित शोधों से भी समर्थित है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी दवा को शुरू या बंद करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

डाइजेशन क्यों है पूरे शरीर के लिए जरूरी?

स्वस्थ पाचन तंत्र केवल भोजन को पचाने का काम नहीं करता, बल्कि शरीर को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि भोजन सही तरीके से नहीं पचता, तो शरीर को पर्याप्त विटामिन, मिनरल और ऊर्जा नहीं मिल पाती।

लगातार खराब डाइजेशन के कारण व्यक्ति को थकान, कमजोरी, पेट दर्द, कब्ज, गैस, ब्लोटिंग, एसिडिटी और भूख कम लगने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। लंबे समय तक इन समस्याओं को नजरअंदाज करने से कई गंभीर रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है।

स्टूल सॉफ्ट करने वाली दवा पर डॉक्टर की सलाह

डॉ. जोसेफ के अनुसार कब्ज होने पर कई लोग स्टूल सॉफ्ट करने वाली दवाओं का नियमित उपयोग करने लगते हैं। उन्होंने विशेष रूप से डॉक्यूसेट सोडियम (Docusate Sodium) युक्त स्टूल सॉफ्टनर का उल्लेख किया।

उनका कहना है कि उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार इस प्रकार की दवाएं कई मामलों में प्लेसीबो (निष्क्रिय उपचार) की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक प्रभावी साबित नहीं हुई हैं।

उन्होंने बताया कि American Journal of Gastroenterology में प्रकाशित एक अध्ययन में भी यह निष्कर्ष सामने आया कि डॉक्यूसेट से मिलने वाला लाभ अपेक्षा से कम हो सकता है और कई मरीज अन्य उपायों से बेहतर राहत प्राप्त कर सकते हैं।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति अपनी दवा स्वयं बंद कर दे। यदि कोई मरीज पहले से चिकित्सकीय सलाह पर यह दवा ले रहा है, तो उसे बिना डॉक्टर की सलाह के उपचार में बदलाव नहीं करना चाहिए।

कब्ज से राहत के लिए प्राकृतिक उपाय हो सकते हैं बेहतर

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मामलों में कब्ज से राहत पाने के लिए जीवनशैली में सुधार अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।

इसके लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, रोजाना शारीरिक गतिविधि करना और भोजन में फाइबर की मात्रा बढ़ाना बेहद जरूरी है।

डॉ. जोसेफ के अनुसार ईसबगोल की भूसी जैसे प्राकृतिक फाइबर सप्लीमेंट कई लोगों के लिए लाभदायक हो सकते हैं। यह मल को सामान्य बनाने में मदद कर सकते हैं और कब्ज की समस्या कम करने में सहायक हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कीवी जैसे फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर फलों का नियमित सेवन कुछ लोगों में कब्ज की समस्या कम करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, जिन लोगों को लंबे समय से कब्ज की समस्या बनी हुई है या जिनके साथ खून आना, वजन घटना या तेज पेट दर्द जैसे लक्षण हों, उन्हें स्वयं उपचार करने के बजाय डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

कुछ दर्द निवारक दवाएं भी बन सकती हैं परेशानी की वजह

डॉ. जोसेफ ने कुछ दर्द निवारक दवाओं के लंबे समय तक उपयोग को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी है।

उन्होंने बताया कि Ibuprofen और Naproxen जैसी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs) लंबे समय तक या बिना चिकित्सकीय निगरानी के लेने पर पेट और आंतों को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

उनके अनुसार उन्होंने अपने चिकित्सा अनुभव में ऐसे कई मरीजों का उपचार किया है जिन्हें इन दवाओं के कारण पेट में अल्सर या रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ा।

शोध क्या कहते हैं?

Clinical Medicine में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार NSAIDs का लंबे समय तक उपयोग गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ब्लीडिंग, पेप्टिक अल्सर और अन्य पाचन संबंधी जटिलताओं का जोखिम बढ़ा सकता है।

विशेष रूप से यदि कोई व्यक्ति पहले से ब्लड थिनर दवाएं ले रहा हो, अधिक उम्र का हो या पेट के अल्सर का इतिहास रहा हो, तो ऐसी दवाओं का उपयोग केवल चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।

हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि ये दवाएं सभी लोगों के लिए हानिकारक हैं। उचित मात्रा और सीमित अवधि तक डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपयोग करने पर ये कई स्थितियों में सुरक्षित और प्रभावी भी हो सकती हैं।

खाना निगलने में दिक्कत को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

डॉ. जोसेफ ने एक और महत्वपूर्ण चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को खाना या पानी निगलने में बार-बार कठिनाई महसूस हो रही है, तो इसे सामान्य समस्या समझकर टालना नहीं चाहिए।

उन्होंने सलाह दी कि ऐसी स्थिति में जल्द से जल्द गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर अपर एंडोस्कोपी जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं, जिससे समस्या के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके।

खाना निगलने में कठिनाई कई कारणों से हो सकती है। कुछ मामलों में यह केवल सूजन या संक्रमण के कारण होती है, जबकि कुछ स्थितियों में यह गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। इसलिए समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।

स्वस्थ पाचन के लिए अपनाएं ये आदतें

विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी पाचन क्षमता बनाए रखने के लिए कुछ सामान्य आदतें बेहद लाभदायक हो सकती हैं—

  • संतुलित और फाइबर युक्त भोजन करें।

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

  • रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें।

  • अत्यधिक तला-भुना और प्रोसेस्ड भोजन सीमित करें।

  • बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक दवाओं का सेवन न करें।

  • कब्ज, लगातार एसिडिटी या खून आने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें।

  • समय पर भोजन करें और पर्याप्त नींद लें।

कब डॉक्टर से मिलना जरूरी है?

यदि किसी व्यक्ति को लगातार कब्ज, तेज पेट दर्द, मल में खून, अचानक वजन घटना, बार-बार उल्टी, लंबे समय तक एसिडिटी या खाना निगलने में परेशानी जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो तुरंत योग्य चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट या सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए होती है। प्रत्येक व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए किसी भी दवा या उपचार में बदलाव केवल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

पाचन तंत्र का स्वस्थ रहना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। गैस, कब्ज या एसिडिटी जैसी समस्याओं को केवल दवाओं के सहारे दबाने के बजाय उनके मूल कारण को समझना अधिक महत्वपूर्ण है। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार अपनाकर अधिकांश लोग अपने पाचन तंत्र को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं। साथ ही, यदि कोई गंभीर या लगातार बनी रहने वाली समस्या दिखाई दे, तो समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी कदम माना जाता है।

कोई टिप्पणी नहीं