Google Search की ये एक गलती आपको भी कर सकती है कंगाल! मुंबई की महिला के साथ हुआ खौफनाक खेल
देशभर में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और अब ठग लोगों को फंसाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ताजा मामला मुंबई के घाटकोपर पूर्व स्थित पंतनगर इलाके से सामने आया है, जहां एक 43 वर्षीय महिला स्कूल प्रशासक ऑनलाइन साइबर ठगी का शिकार हो गईं। साइबर अपराधियों ने गूगल पर उपलब्ध एक कथित कस्टमर केयर नंबर के जरिए महिला को अपने जाल में फंसा लिया और उनके आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते से कुल 4.74 लाख रुपये निकाल लिए।
घटना के बाद पीड़िता ने तत्काल बैंक से संपर्क कर अपना खाता ब्लॉक कराया और पुलिस के साथ-साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल तथा 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल पंतनगर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
गूगल पर खोजा कस्टमर केयर नंबर, यहीं से शुरू हुई ठगी
एफआईआर के अनुसार, महिला के मोबाइल फोन पर अचानक बैंक खाते से पैसे कटने का संदेश आया। इससे घबराकर उन्होंने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के कस्टमर केयर नंबर की तलाश गूगल पर की।
गूगल सर्च में जो नंबर दिखाई दिया, महिला ने उसी पर कॉल कर दी। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि बताया और पूरी बातचीत बेहद पेशेवर तरीके से की। इसी दौरान साइबर ठगों ने महिला को विश्वास में लेकर उनके बैंक खाते तक पहुंच बना ली।
महिला को शुरुआत में किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ क्योंकि सामने वाला व्यक्ति बैंक अधिकारी की तरह व्यवहार कर रहा था। इसी भरोसे का फायदा उठाकर अपराधियों ने कुछ दिनों के भीतर लाखों रुपये की निकासी कर ली।
छह अलग-अलग ट्रांजैक्शन में उड़ाए 4.74 लाख रुपये
पुलिस के अनुसार, ठगों ने एक साथ पूरी रकम नहीं निकाली, बल्कि अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे ट्रांसफर किए ताकि बैंक की सुरक्षा प्रणाली या ग्राहक को तुरंत संदेह न हो।
निकाली गई रकम इस प्रकार बताई गई है—
50,000 रुपये
46,000 रुपये
98,000 रुपये
97,000 रुपये
97,000 रुपये
86,000 रुपये
इन छह लेनदेन के माध्यम से कुल 4,74,000 रुपये खाते से निकाल लिए गए।
महिला ने नहीं बताया ओटीपी या यूपीआई पिन
पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी भी व्यक्ति के साथ अपना—
ओटीपी
यूपीआई पिन
एमपिन
इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड
डेबिट कार्ड नंबर
सीवीवी
अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी
साझा नहीं की थी।
यही तथ्य इस मामले को और गंभीर बनाता है। इससे संकेत मिलता है कि साइबर अपराधी अब केवल ओटीपी पूछकर ही नहीं, बल्कि अन्य तकनीकी तरीकों और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए भी लोगों के खातों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
खाता तुरंत कराया ब्लॉक
जब महिला को लगातार पैसे कटने की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत बैंक से संपर्क किया और अपना बैंक खाता ब्लॉक करा दिया।
इसके अलावा उन्होंने बिना देर किए—
1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत की।
स्थानीय पंतनगर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दी।
विशेषज्ञों के अनुसार साइबर ठगी के मामलों में जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
महिला की शिकायत के आधार पर पंतनगर पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि—
गूगल पर फर्जी नंबर किसने डाला।
पैसा किन बैंक खातों में ट्रांसफर हुआ।
रकम देश के भीतर भेजी गई या विदेश।
अपराधियों ने कौन-कौन से डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया।
पुलिस बैंकिंग रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस की भी जांच कर रही है।
कैसे काम करता है फर्जी कस्टमर केयर नंबर वाला फ्रॉड?
आजकल साइबर अपराधी गूगल सर्च रिजल्ट का दुरुपयोग कर रहे हैं।
वे किसी बैंक, ई-कॉमर्स कंपनी, गैस एजेंसी, एयरलाइन या अन्य संस्थानों के नाम से फर्जी मोबाइल नंबर इंटरनेट पर डाल देते हैं।
जब कोई व्यक्ति समस्या आने पर गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजता है, तो कई बार वही फर्जी नंबर दिखाई देता है।
इसके बाद ठग—
खुद को कंपनी का कर्मचारी बताते हैं।
तकनीकी सहायता देने का भरोसा दिलाते हैं।
ग्राहक से मोबाइल में ऐप डाउनलोड करवाते हैं।
स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की कोशिश करते हैं।
बैंकिंग संबंधी प्रक्रिया के नाम पर जाल बिछाते हैं।
कई मामलों में ग्राहक को पता भी नहीं चलता और उसके खाते से रकम निकल जाती है।
देशभर में बढ़ रहे हैं ऐसे साइबर अपराध
पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन बैंकिंग और डिजिटल भुगतान बढ़ने के साथ साइबर अपराधों में भी तेजी आई है।
अब अपराधी केवल फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं। वे—
फर्जी वेबसाइट
फर्जी मोबाइल ऐप
सोशल मीडिया विज्ञापन
व्हाट्सएप संदेश
एसएमएस लिंक
गूगल बिजनेस प्रोफाइल
का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट पर दिखाई देने वाली हर जानकारी सही नहीं होती। इसलिए किसी भी हेल्पलाइन नंबर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।
साइबर ठगी से कैसे बचें?
ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कुछ सावधानियां बेहद जरूरी हैं।
केवल आधिकारिक स्रोत से लें नंबर
किसी भी बैंक या संस्था का कस्टमर केयर नंबर केवल—
आधिकारिक वेबसाइट
बैंक का मोबाइल ऐप
पासबुक
डेबिट कार्ड के पीछे लिखे नंबर
से ही प्राप्त करें।
गूगल पर दिखने वाले हर नंबर पर भरोसा न करें
सर्च रिजल्ट में दिखाई देने वाला नंबर हमेशा आधिकारिक हो, यह जरूरी नहीं है।
किसी को बैंकिंग जानकारी न दें
ओटीपी, यूपीआई पिन, एमपिन, पासवर्ड, सीवीवी या डेबिट कार्ड संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड न करें
यदि कोई व्यक्ति AnyDesk, TeamViewer, QuickSupport या अन्य रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करने को कहे तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
बैंक अलर्ट हमेशा चालू रखें
मोबाइल पर एसएमएस और ईमेल अलर्ट सक्रिय रखें ताकि किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी तुरंत मिल सके।
ठगी हो जाए तो क्या करें?
यदि आपके साथ साइबर ठगी हो जाए तो घबराने के बजाय तुरंत कार्रवाई करें।
सबसे पहले संबंधित बैंक को कॉल करके अपना खाता या कार्ड ब्लॉक कराएं। इसके बाद 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत करें और निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराएं।
समय पर शिकायत करने से कई मामलों में ट्रांजैक्शन को रोकना या राशि को फ्रीज कराना संभव हो सकता है।
मुंबई के घाटकोपर में हुई 4.74 लाख रुपये की साइबर ठगी एक बार फिर यह साबित करती है कि डिजिटल दुनिया में छोटी-सी लापरवाही भी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। केवल गूगल पर मिला एक फर्जी कस्टमर केयर नंबर एक महिला के लाखों रुपये ले उड़ा। ऐसे में हर इंटरनेट उपयोगकर्ता को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी बैंक या संस्था से संपर्क करने के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों का ही उपयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत बैंक तथा साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें। जागरूकता और सावधानी ही साइबर अपराधियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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