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जंतर-मंतर के ट्रक का रहस्य बना पहेली! पुलिस की कहानी में क्यों दिख रहे हैं कई छेद?



नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पत्थरों से लदे एक ट्रक की मौजूदगी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहराता नजर आ रहा है। इस ट्रक को लेकर सामने आई एक विस्तृत जांच रिपोर्ट ने पूरे घटनाक्रम पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिस ट्रक को प्रदर्शन स्थल के पास देखा गया था, उसे दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से चार दिन पहले एक सड़क दुर्घटना के बाद जब्त किया था। इसके बावजूद वह ट्रक जंतर-मंतर तक कैसे पहुंचा, यह अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब्त किए जाने के बाद ट्रक को अलग-अलग स्थानों पर देखा गया और पुलिस अधिकारियों के बयान भी एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। इन दावों के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि इन आरोपों और दावों पर दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

प्रदर्शन के दौरान पहली बार उठा था ट्रक का मुद्दा

बताया गया कि 20 जुलाई की सुबह जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए पहुंचे तो उन्होंने संसद मार्ग से प्रदर्शन स्थल की ओर जाने वाली सड़क पर पत्थरों से लदा एक डंपर ट्रक खड़ा देखा।

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने उस समय सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया था कि जब पूरे इलाके में भारी पुलिस सुरक्षा, बैरिकेडिंग और चेकिंग की व्यवस्था थी, तब यह ट्रक प्रदर्शन स्थल तक कैसे पहुंच गया।

सीजेपी ने आरोप लगाया था कि ट्रक में भरे पत्थरों का इस्तेमाल प्रदर्शन को हिंसक दिखाने या प्रदर्शनकारियों को किसी साजिश में फंसाने के लिए किया जा सकता था। हालांकि उस समय दिल्ली पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया था।

जांच रिपोर्ट में सामने आया नया दावा

एक मीडिया जांच रिपोर्ट के अनुसार, ट्रक का रजिस्ट्रेशन नंबर HR63 E 6865 बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह ट्रक 16 जुलाई की सुबह लगभग 4:15 बजे फिरोजशाह रोड और कस्तूरबा गांधी मार्ग के चौराहे पर एक सड़क दुर्घटना में शामिल था।

बताया गया कि इस दुर्घटना में ट्रक की टक्कर एक मारुति ईको वैन से हुई थी, जिसमें सात लोग घायल हो गए थे। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया और ट्रक तथा क्षतिग्रस्त वैन दोनों को संसद मार्ग थाने ले जाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, दुर्घटना के बाद ट्रक पुलिस की निगरानी में रखा गया था।

ट्रक के मालिक ने क्या कहा?

रिपोर्ट में ट्रक के अंतिम पंजीकृत मालिक केशव कुमार साहनी के हवाले से कहा गया है कि ट्रक का उपयोग ईंट और पत्थर ढोने के काम में किया जाता था।

उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद से ट्रक पुलिस के कब्जे में था। हालांकि उनका यह भी कहना है कि लगभग दो महीने पहले उन्होंने ट्रक किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया था और बिक्री से संबंधित दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।

दूसरी ओर, दुर्घटनाग्रस्त मारुति ईको वैन से जुड़े चरण सिंह ने भी कथित रूप से बताया कि दुर्घटना के समय ट्रक में ईंट और पत्थर भरे हुए थे।

पुलिस अधिकारियों के अलग-अलग बयान

रिपोर्ट में सबसे अधिक चर्चा पुलिस अधिकारियों के अलग-अलग बयानों को लेकर हो रही है।

बताया गया कि संसद मार्ग थाने के एक अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि ट्रक पहले थाने के बाहर खड़ा था। बाद में जब उसका वीडियो वायरल हुआ तो उसे भलस्वा ले जाकर खाली कराया गया और फिर वापस लाया गया।

वहीं मामले के जांच अधिकारी मोहित भाटी ने कथित तौर पर कहा कि प्रदर्शन के कारण थाने में जगह कम थी, इसलिए ट्रक को दूसरी जगह भेजा गया था। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बाद में ट्रक जंतर-मंतर के आसपास कैसे दिखाई दिया।

दूसरी तरफ संसद मार्ग थाना प्रभारी नीरज कुमार का कथित बयान इससे अलग बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि ट्रक को 19 जुलाई को ही खाली कर दिया गया था और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो पुराने थे।

इन तीनों बयानों में अंतर होने के कारण पूरे मामले पर और अधिक सवाल खड़े हो रहे हैं।

यूथ कांग्रेस कार्यालय के बाहर भी दिखाई दिया वही ट्रक

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि 25 जुलाई को भारतीय युवा कांग्रेस द्वारा जारी एक वीडियो में वही ट्रक रायसीना रोड स्थित पार्टी कार्यालय के बाहर खड़ा दिखाई दिया।

दिल्ली युवा कांग्रेस अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने आरोप लगाया कि यह ट्रक कई दिनों तक उनके कार्यालय के बाहर खड़ा रहा। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायत करने के बाद पुलिस ने 25 जुलाई को इसे वहां से हटाया।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस क्षेत्र में भारी वाहनों के प्रवेश पर सामान्यतः प्रतिबंध रहता है, वहां यह ट्रक कई दिनों तक बिना कार्रवाई के कैसे खड़ा रहा।

यूट्यूबर ने भी साझा किया वीडियो

रिपोर्ट के अनुसार, 21 जुलाई को यूट्यूबर रतन रंजन ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया था कि यह वही ट्रक है जो जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान देखा गया था।

उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की थी।

क्षतिग्रस्त वैन को लेकर भी उठे सवाल

मामले में केवल ट्रक ही नहीं बल्कि दुर्घटनाग्रस्त मारुति ईको वैन को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सीजेपी ने आरोप लगाया था कि एक टूटी हुई वैन को प्रदर्शन स्थल के पास इस तरह रखा गया था ताकि बाद में प्रदर्शनकारियों पर तोड़फोड़ का आरोप लगाया जा सके।

हालांकि कुछ पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर कहा कि वैन प्रदर्शनकारियों द्वारा क्षतिग्रस्त की गई थी।

लेकिन रिपोर्ट में दावा किया गया कि पुलिस की दर्ज एफआईआर के अनुसार वही वैन 16 जुलाई की सड़क दुर्घटना में पहले से क्षतिग्रस्त हो चुकी थी।

वैन से जुड़े चरण सिंह ने भी कथित रूप से कहा कि उन्होंने वाहन जहां छोड़ा था, बाद में वह वहां नहीं मिला और किसी दूसरी जगह पहुंचा दिया गया था।

ट्रक की मौजूदा स्थिति पर भी रहस्य

रिपोर्ट में कहा गया कि मालखाने के एक पुलिसकर्मी ने दावा किया कि ट्रक फिलहाल कालीबाड़ी मार्ग स्थित ट्रैफिक पिट में रखा गया है।

हालांकि जब रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम वहां पहुंची तो कथित तौर पर ट्रक वहां मौजूद नहीं मिला।

यही कारण है कि अब यह सवाल भी उठ रहा है कि ट्रक वास्तव में इस समय कहां है और उसकी आवाजाही का आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहता है।

उठ रहे हैं कई अहम सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आ रहे हैं—

  • यदि ट्रक पुलिस की हिरासत में था तो वह जंतर-मंतर तक कैसे पहुंचा?

  • जब्त वाहन की निगरानी और आवाजाही का रिकॉर्ड क्या है?

  • पुलिस अधिकारियों के बयान अलग-अलग क्यों हैं?

  • यदि ट्रक 19 जुलाई को खाली कर दिया गया था, तो प्रदर्शन के दौरान वह पत्थरों से भरा हुआ क्यों दिखाई दिया?

  • यूथ कांग्रेस कार्यालय के बाहर वही ट्रक कैसे पहुंच गया?

  • दुर्घटनाग्रस्त वैन की वास्तविक स्थिति और स्थान को लेकर विरोधाभासी दावे क्यों सामने आए?

दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इन सभी दावों पर दिल्ली पुलिस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। जांच रिपोर्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जब्त वाहनों की आवाजाही को लेकर कोई भ्रम या विरोधाभास है, तो उसे दूर करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाने चाहिए। इससे पूरे घटनाक्रम पर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकेगा और पारदर्शिता बनी रहेगी।

इस बीच, यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है। एक ओर रिपोर्ट में उठाए गए सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है, वहीं दूसरी ओर यह भी अपेक्षा की जा रही है कि संबंधित एजेंसियां आधिकारिक तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करें ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रम की गुंजाइश न रहे। फिलहाल जांच रिपोर्ट के दावों और आधिकारिक पक्ष के बीच मौजूद अंतर ही इस पूरे मामले को चर्चा के केंद्र में बनाए हुए है।

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