Breaking News

हार्ट अटैक का सबसे बड़ा दुश्मन आ गया! नई गोली को लेकर डॉक्टरों का दावा- लाखों लोगों की बच सकती है जान

 


दुनियाभर में हर साल करोड़ों लोग हृदय संबंधी बीमारियों की चपेट में आते हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, तनाव, धूम्रपान, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने हार्ट डिजीज के मामलों में तेजी से इजाफा किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं के पीछे सबसे बड़ा कारणों में से एक हाई LDL कोलेस्ट्रॉल (खराब कोलेस्ट्रॉल) है।

ऐसे समय में एक नई दवा ने डॉक्टरों और मरीजों दोनों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। Lipfendra नाम की नई ओरल दवा को अमेरिका में मंजूरी मिलने के बाद इसे हाई कोलेस्ट्रॉल के इलाज में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसके परिणाम अपेक्षा के अनुसार रहे, तो यह उन लाखों मरीजों के लिए राहत लेकर आ सकती है जिन्हें पारंपरिक दवाओं से पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता।

भारत में हार्ट डिजीज क्यों बनी बड़ी चुनौती?

विश्व हार्ट फाउंडेशन के अनुसार, वर्ष 2024 में भारत में लगभग 31 लाख लोगों की मौत हृदय संबंधी बीमारियों के कारण हुई। इनमें करीब 80 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक से जुड़ी थीं।

कार्डियोलॉजिस्ट बताते हैं कि अधिकांश मामलों में हाई कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे धमनियों में जमा होकर उन्हें संकरा कर देता है। जब रक्त का प्रवाह बाधित होता है, तब हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

समस्या यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देता। इसी कारण इसे कई बार "साइलेंट रिस्क फैक्टर" भी कहा जाता है।

क्या है नई दवा Lipfendra?

नई दवा Lipfendra को PCSK9 Inhibitor श्रेणी की दवा बताया जा रहा है। फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली के कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी के अनुसार, यह दवा हाई कोलेस्ट्रॉल के इलाज में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।

उन्होंने बताया कि पहले इसी श्रेणी की दवाएं मुख्य रूप से इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध थीं, जबकि अब गोली के रूप में विकल्प मिलने से मरीजों के लिए उपचार अधिक सुविधाजनक हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह दवा विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जिनमें पारंपरिक उपचार के बावजूद LDL कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित नहीं हो पाता।

डॉक्टर इसे "गेम चेंजर" क्यों मान रहे हैं?

डॉ. त्रिपाठी के अनुसार, लंबे समय से हाई कोलेस्ट्रॉल के इलाज में स्टैटिन दवाओं का व्यापक उपयोग किया जाता रहा है। हालांकि कई मरीजों में इन दवाओं के कारण मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी और अन्य दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं।

कुछ मरीज ऐसे भी होते हैं जिनका कोलेस्ट्रॉल स्टैटिन लेने के बाद भी लक्ष्य स्तर तक नहीं पहुंचता।

इसके अलावा Familial Hypercholesterolemia जैसी आनुवंशिक स्थिति वाले मरीजों में शरीर स्वयं अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल बनाता है। ऐसे मामलों में पारंपरिक उपचार हमेशा पर्याप्त प्रभावी नहीं होता।

ऐसे मरीजों के लिए नई दवा एक बेहतर विकल्प बन सकती है।

आखिर यह दवा काम कैसे करती है?

मानव शरीर में लिवर की कोशिकाओं पर LDL रिसेप्टर्स मौजूद होते हैं। इनका काम रक्त में मौजूद खराब LDL कोलेस्ट्रॉल को पकड़कर लिवर के अंदर ले जाना और उसे हटाना होता है।

लेकिन शरीर में मौजूद PCSK9 प्रोटीन इन रिसेप्टर्स को नष्ट करने लगता है। जब रिसेप्टर्स कम हो जाते हैं, तब रक्त में LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने लगता है।

नई दवा इसी PCSK9 प्रोटीन की गतिविधि को रोकने का काम करती है। इससे LDL रिसेप्टर्स सुरक्षित रहते हैं और उनकी संख्या बढ़ती है। परिणामस्वरूप लिवर अधिक मात्रा में खराब कोलेस्ट्रॉल को रक्त से हटाने लगता है।

यही वजह है कि इस तकनीक को हाई कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि माना जा रहा है।

नई तकनीक पर आधारित उपचार

विशेषज्ञों के अनुसार, PCSK9 को रोकने वाली आधुनिक दवाएं मोनोक्लोनल एंटीबॉडी अथवा नई RNA-आधारित तकनीकों का उपयोग करती हैं।

इनका उद्देश्य केवल कोलेस्ट्रॉल कम करना नहीं, बल्कि उस जैविक प्रक्रिया को प्रभावित करना है जिसके कारण शरीर में PCSK9 प्रोटीन बनता या सक्रिय रहता है।

इसी कारण इन दवाओं को अधिक लक्षित (Targeted Therapy) माना जाता है।

किन मरीजों को मिल सकता है सबसे अधिक फायदा?

विशेषज्ञों के अनुसार यह दवा विशेष रूप से इन मरीजों के लिए उपयोगी हो सकती है—

  • जिनका LDL कोलेस्ट्रॉल लगातार बहुत अधिक रहता है।

  • जिन्हें पहले हार्ट अटैक या स्ट्रोक हो चुका है।

  • जिनमें पारिवारिक (जेनेटिक) हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है।

  • जो स्टैटिन दवाओं को सहन नहीं कर पाते।

  • जिनमें स्टैटिन लेने के बावजूद लक्ष्य स्तर तक कोलेस्ट्रॉल नहीं पहुंचता।

हालांकि किसी भी नई दवा का उपयोग डॉक्टर की सलाह और मरीज की मेडिकल स्थिति के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

क्या भारत में भी जल्द मिलेगी यह दवा?

फिलहाल Lipfendra को अमेरिका के दवा नियामक से मंजूरी मिली है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो भविष्य में यह भारत सहित अन्य देशों में भी उपलब्ध हो सकती है।

शुरुआती दौर में इसकी कीमत अधिक रहने की संभावना है। हालांकि आमतौर पर पेटेंट अवधि समाप्त होने के बाद ऐसी दवाओं के जेनेरिक संस्करण आने से कीमतें कम हो जाती हैं, जिससे अधिक मरीज इसका लाभ उठा सकते हैं।

क्या सिर्फ दवा ही काफी है?

हृदय रोग विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर देते हैं कि कोई भी दवा स्वस्थ जीवनशैली का विकल्प नहीं हो सकती।

हार्ट अटैक के खतरे को कम करने के लिए जरूरी है कि लोग—

  • संतुलित भोजन लें।

  • तली-भुनी और ट्रांस फैट वाली चीजों से बचें।

  • नियमित व्यायाम करें।

  • धूम्रपान और तंबाकू से दूरी रखें।

  • वजन नियंत्रित रखें।

  • ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराते रहें।

  • डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं को बिना सलाह बंद न करें।

हाई कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए विकसित नई दवा Lipfendra को विशेषज्ञ एक महत्वपूर्ण मेडिकल प्रगति के रूप में देख रहे हैं। यह विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है जिन्हें पारंपरिक उपचार से पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा। हालांकि किसी भी नई दवा की तरह इसके उपयोग का निर्णय चिकित्सकीय सलाह के आधार पर ही होना चाहिए। यदि आने वाले समय में यह दवा व्यापक रूप से उपलब्ध होती है और अपेक्षित परिणाम देती है, तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

कोई टिप्पणी नहीं