हर दिन की छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ी बीमारी! विशेषज्ञों ने बताया क्यों खुद का ख्याल रखना अब सबसे जरूरी
हर साल 24 जुलाई को दुनिया भर में इंटरनेशनल सेल्फ-केयर डे (International Self-Care Day) मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को यह याद दिलाना है कि अच्छी सेहत केवल अस्पताल जाने या बीमारी का इलाज कराने से नहीं मिलती, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी स्वस्थ आदतों से भी बनती है। इस वर्ष भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे अपने शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। 24/7 यानी दिन के 24 घंटे और सप्ताह के 7 दिन स्वयं की देखभाल करने का संदेश ही इस दिवस की सबसे बड़ी पहचान है।
क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल सेल्फ-केयर डे?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, सेल्फ-केयर का अर्थ है कि व्यक्ति, परिवार और समुदाय स्वयं अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने, बीमारियों से बचाव करने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सही ढंग से सामना करने की क्षमता विकसित करें। इसका मतलब यह नहीं है कि डॉक्टर की जरूरत खत्म हो जाती है, बल्कि यह स्वास्थ्य प्रणाली का पूरक है।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम, पढ़ाई और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि अपने स्वास्थ्य को सबसे आखिर में रखते हैं। यही आदत आगे चलकर कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
24/7 का क्या है मतलब?
इंटरनेशनल सेल्फ-केयर डे 24 जुलाई को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 24/7 यह संदेश देता है कि स्वयं की देखभाल कोई एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि हर दिन अपनाई जाने वाली जीवनशैली है। इसका उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि स्वास्थ्य की रक्षा रोजाना छोटे-छोटे प्रयासों से होती है।
सेल्फ-केयर में क्या-क्या शामिल है?
विशेषज्ञों के अनुसार सेल्फ-केयर केवल योग या जिम तक सीमित नहीं है। इसमें कई महत्वपूर्ण बातें शामिल हैं—
संतुलित और पौष्टिक भोजन करना।
प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करना।
पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता की नींद लेना।
तनाव को नियंत्रित करने का प्रयास करना।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीना।
समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना।
धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाना।
शराब का सीमित या बिल्कुल उपयोग न करना।
मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना।
परिवार और मित्रों के साथ सकारात्मक समय बिताना।
मानसिक स्वास्थ्य भी है उतना ही जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी भी गंभीर परिणाम दे सकती है। लगातार तनाव, चिंता, नींद की कमी और काम का अत्यधिक दबाव व्यक्ति की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित कर सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रखने के लिए ध्यान, मेडिटेशन, गहरी सांस लेने के अभ्यास, शौक के लिए समय निकालना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी माना जाता है।
नींद क्यों है सबसे जरूरी?
डॉक्टरों का कहना है कि अच्छी नींद शरीर की मरम्मत का समय होती है। पर्याप्त नींद न लेने से मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
वयस्कों के लिए सामान्यतः 7 से 9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लाभदायक मानी जाती है। सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का कम उपयोग करने की भी सलाह दी जाती है।
संतुलित भोजन की भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार हमारे भोजन का सीधा संबंध हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली और संपूर्ण स्वास्थ्य से होता है।
दैनिक भोजन में शामिल करें—
हरी सब्जियां
मौसमी फल
साबुत अनाज
दालें
दूध एवं दुग्ध उत्पाद
पर्याप्त प्रोटीन
वहीं अत्यधिक चीनी, नमक, तली हुई चीजें और प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित रखना चाहिए।
नियमित व्यायाम क्यों जरूरी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम कर सकती है। तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना, योग, तैराकी या हल्का व्यायाम भी लाभदायक हो सकता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट सक्रिय रहने से शरीर और मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।
नियमित स्वास्थ्य जांच भी जरूरी
कई बीमारियां शुरुआती चरण में बिना किसी लक्षण के विकसित होती हैं। इसलिए समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अन्य जांच कराना फायदेमंद हो सकता है।
मोबाइल और सोशल मीडिया से भी लें ब्रेक
डिजिटल दुनिया में लगातार स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव, नींद की समस्या और मानसिक थकान बढ़ सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि—
सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें।
दिन में कुछ समय मोबाइल से दूरी रखें।
परिवार के साथ बिना फोन के समय बिताएं।
प्रकृति के बीच समय निकालें।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सेल्फ-केयर का अर्थ महंगे उत्पाद खरीदना नहीं है। अच्छी नींद, संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, मानसिक शांति और समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी साधारण आदतें ही सबसे प्रभावी सेल्फ-केयर हैं।
वे यह भी कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक तनाव, उदासी, लगातार थकान या किसी बीमारी के लक्षण महसूस हों तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
इंटरनेशनल सेल्फ-केयर डे हमें यह याद दिलाता है कि सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने स्वास्थ्य की भी है। यदि हम रोजमर्रा की छोटी-छोटी अच्छी आदतों को अपनाएं, तो न केवल कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है, बल्कि बेहतर मानसिक स्वास्थ्य, अधिक ऊर्जा और बेहतर जीवन गुणवत्ता भी प्राप्त की जा सकती है। आज के समय में सेल्फ-केयर कोई विलासिता नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन की आवश्यकता बन चुकी है।

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