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गले लगाने का दबाव, देर रात अशोभनीय व्हाट्सएप मैसेज....राई खेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पर यौन उत्पीड़न का आरोप सिद्ध

 


हरियाणा के राई स्थित खेल विश्वविद्यालय में एक महिला अधिकारी द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। विश्वविद्यालय की ओर से गठित आंतरिक शिकायत समिति (Internal Committee) ने अपनी जांच पूरी कर गोपनीय रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, समिति ने अपनी जांच में पत्रकारिता विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. जयपाल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पुष्ट माना है। रिपोर्ट मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी प्रोफेसर को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है। जवाब मिलने के बाद नियमानुसार आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

यह मामला विश्वविद्यालय परिसर में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम को लेकर एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।

अप्रैल में दर्ज कराई गई थी लिखित शिकायत

मिली जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय की एक महिला अधिकारी ने अप्रैल 2026 में कुलपति को लिखित शिकायत सौंपी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पत्रकारिता विभाग के सहायक प्रोफेसर ने दिसंबर 2025 के दौरान कई बार व्हाट्सएप पर कथित रूप से अशोभनीय संदेश भेजे।

महिला अधिकारी का आरोप है कि आरोपी देर रात फोन कॉल भी करता था और व्यक्तिगत संबंध बनाने, दोस्ती करने तथा गले लगाने के लिए दबाव डालता था। शिकायत में कहा गया कि इन घटनाओं से वह मानसिक रूप से परेशान हो गई थीं।

विभाग बदलने के बाद भी संपर्क करने का आरोप

शिकायत में महिला अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि लगातार हो रही कथित परेशानियों के कारण उन्होंने अपना विभाग तक बदलवा लिया। इसके बावजूद जनवरी 2026 में भी आरोपी द्वारा संपर्क करने की कोशिश जारी रही।

महिला अधिकारी का कहना है कि स्थिति सामान्य न होने पर उन्होंने मामले की औपचारिक शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से की और उचित कार्रवाई की मांग की।

व्हाट्सएप चैट को बनाया गया साक्ष्य

शिकायत के साथ महिला अधिकारी ने कथित व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी विश्वविद्यालय प्रशासन को उपलब्ध कराए। इन्हीं दस्तावेजों को जांच के दौरान महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देखा गया।

आंतरिक शिकायत समिति ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों सहित अन्य तथ्यों का परीक्षण किया। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद समिति ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट डीन अकादमिक को सौंप दी।

समिति की रिपोर्ट में क्या कहा गया?

विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, समिति ने जांच में आरोपी सहायक प्रोफेसर के खिलाफ लगाए गए आरोपों को पुष्ट माना है। हालांकि, रिपोर्ट का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है क्योंकि ऐसी जांच रिपोर्टें गोपनीय रखी जाती हैं।

रिपोर्ट मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोपी प्रोफेसर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और निर्धारित समय के भीतर उनका लिखित जवाब मांगा है।

जवाब मिलने के बाद होगी कार्रवाई

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आरोपी का पक्ष प्राप्त होने के बाद नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि संस्थान कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लेता है और प्रत्येक मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है।

यदि जांच रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर आरोप सिद्ध होते हैं, तो विश्वविद्यालय सेवा नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

POSH कानून के तहत होती है ऐसी शिकायतों की जांच

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में भारत में "कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम, 2013" (POSH Act) लागू है।

इस कानून के तहत प्रत्येक संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति (Internal Committee) का गठन किया जाता है, जो शिकायत मिलने पर दोनों पक्षों को सुनती है, उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करती है और अपनी सिफारिश संस्थान को सौंपती है।

जांच के दौरान प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया जाता है, यानी शिकायतकर्ता और आरोपी—दोनों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है।

आरोप और दोषसिद्धि में अंतर समझना जरूरी

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी मामले में जांच समिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है, लेकिन अंतिम प्रशासनिक या कानूनी परिणाम संबंधित प्राधिकरण और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही तय होते हैं।

इसलिए किसी भी आरोपी को अंतिम रूप से दोषी तभी माना जाता है, जब लागू प्रक्रिया पूरी हो जाए और सक्षम प्राधिकारी अपना अंतिम निर्णय दे।

कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल की जरूरत

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान या कार्यालय में सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करना संस्थान की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि किसी कर्मचारी को अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ता है, तो उसे बिना किसी भय के शिकायत दर्ज कराने का अधिकार है।

साथ ही यह भी आवश्यक है कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष, गोपनीय और तथ्यों के आधार पर जांच की जाए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो और पीड़ित को भी न्याय मिल सके।

विश्वविद्यालयों में बढ़ रही जागरूकता

पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में POSH नीति को लेकर जागरूकता बढ़ी है। अधिकांश संस्थानों में आंतरिक शिकायत समितियां सक्रिय हैं और कर्मचारियों व छात्रों को समय-समय पर लैंगिक संवेदनशीलता तथा कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार को लेकर प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी व्यवस्थाएं शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

राई स्थित खेल विश्वविद्यालय में महिला अधिकारी द्वारा लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच पूरी होने के बाद आंतरिक शिकायत समिति ने अपनी गोपनीय रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी है। विश्वविद्यालय के अनुसार, रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपी सहायक प्रोफेसर को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा गया है। जवाब प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला संस्थान की प्रशासनिक प्रक्रिया के अधीन है और अंतिम निर्णय संबंधित प्राधिकरण द्वारा लिया जाना बाकी है।

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