रात के अंधेरे में चलता था करोड़ों का खेल! लखनऊ में पुलिस ने मारा छापा, 119 लोग हिरासत में, वायरल वीडियो ने मचाई सनसनी
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक कथित अंतरराष्ट्रीय ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस के अनुसार, शहर में संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर के जरिए विदेशी नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा था। इस कार्रवाई में कुल 119 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 92 युवक और 27 युवतियां शामिल हैं। घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को पुलिस वाहनों के माध्यम से थाने ले जाते हुए देखा जा सकता है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह कथित तौर पर अमेरिका सहित कई देशों के नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम देता था। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही है।
रात में ही चलता था कॉल सेंटर
जांच एजेंसियों के मुताबिक, जिस कॉल सेंटर पर छापा मारा गया, उसका संचालन मुख्य रूप से रात के समय किया जाता था। पुलिस का मानना है कि ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि अमेरिका और अन्य देशों के समयानुसार वहां के लोगों से आसानी से संपर्क किया जा सके।
बताया जा रहा है कि कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी विदेशी नागरिकों को फोन कर खुद को अमेरिकी जांच एजेंसी Federal Bureau of Investigation का अधिकारी बताते थे। इसके बाद विभिन्न बहानों से लोगों को डराकर या भ्रमित करके उनसे धनराशि ट्रांसफर कराई जाती थी।
250 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का दावा
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, इस गिरोह ने कथित तौर पर अब तक 250 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी को अंजाम दिया हो सकता है। हालांकि इस राशि का अंतिम सत्यापन जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगा।
अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि वास्तविक ठगी की रकम और पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
विदेशी नागरिकों को बनाया जाता था निशाना
जांच में सामने आया है कि कॉल सेंटर के कर्मचारी विदेशी नागरिकों को फोन कर यह दावा करते थे कि उनके बैंक खाते, सामाजिक सुरक्षा दस्तावेज या अन्य वित्तीय रिकॉर्ड किसी गंभीर जांच के दायरे में हैं।
इसके बाद लोगों को डराकर उनसे विभिन्न खातों में पैसे जमा करवाए जाते थे। पुलिस का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया को बेहद पेशेवर तरीके से संचालित किया जाता था ताकि पीड़ितों को शक न हो।
क्रिप्टोकरेंसी के जरिए रकम को किया जाता था ट्रांसफर
प्रारंभिक जांच में पुलिस को जानकारी मिली है कि कथित ठगी से प्राप्त धनराशि पहले अमेरिका के बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। इसके बाद उसे डिजिटल माध्यमों से क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इसके जरिए धन के स्रोत को छिपाने और रकम को विभिन्न लोगों में बांटने की कोशिश की जाती थी।
मामले में वित्तीय लेन-देन की जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों और अन्य एजेंसियों की भी मदद ली जा रही है।
ऑपरेशन मैनेजर से पूछताछ जारी
पुलिस के अनुसार इस पूरे नेटवर्क के संचालन में अहम भूमिका निभाने के आरोप में अहमदाबाद निवासी ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार से पूछताछ की जा रही है।
जांच अधिकारी यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस कथित गिरोह का संचालन किस स्तर से किया जा रहा था, इसमें कितने लोग शामिल थे और इसका नेटवर्क किन-किन राज्यों या देशों तक फैला हुआ था।
119 लोगों को हिरासत में लिया गया
करीब 24 घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कुल 119 लोगों को हिरासत में लिया।
इनमें—
92 युवक
27 युवतियां
शामिल बताई गई हैं।
पुलिस के अनुसार हिरासत में लिए गए लोगों से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कौन कर्मचारी था, कौन प्रबंधन से जुड़ा था और किसकी भूमिका किस स्तर तक थी।
अधिकारियों ने यह भी बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों में बड़ी संख्या पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से आने वाले युवाओं की बताई जा रही है। हालांकि प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
वायरल वीडियो बना चर्चा का विषय
कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में युवकों और युवतियों को पुलिस थाने ले जाती हुई दिखाई दे रही है।
वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के बीच इस कार्रवाई को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
हालांकि केवल वायरल वीडियो के आधार पर किसी व्यक्ति की भूमिका या दोष तय नहीं किया जा सकता। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन लोगों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।
साइबर अपराध का बदलता तरीका
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब पारंपरिक तरीकों की बजाय हाई-टेक कॉल सेंटर मॉडल का इस्तेमाल कर रहे हैं।
विदेशी उच्चारण की ट्रेनिंग, स्क्रिप्ट आधारित बातचीत, डिजिटल भुगतान प्रणाली और क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग से ऐसे गिरोह जांच एजेंसियों के लिए नई चुनौती बनते जा रहे हैं।
इसी वजह से देशभर में साइबर अपराध के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
लखनऊ मे पकडे गए 92 लड़के, 27 लड़कियां.. 250 करोड़ ₹ से अधिक की कर चुके थे ठगी
— TRUE STORY (@TrueStoryUP) July 2, 2026
UP की राजधानी लखनऊ मे अंतरराष्ट्रीय ठगी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से अमेरिका व अन्य देशो के लोगो के यह गिरोह अब तक 250 करोड़ ₹ का चूना लगा चुका था। यह गैंग डॉलर एप ARQ… pic.twitter.com/csMslGYOzL
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ नागरिकों को सलाह देते हैं कि यदि किसी विदेशी या सरकारी एजेंसी के नाम पर अचानक फोन आए और पैसे जमा करने या बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए कहा जाए तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
कभी भी—
बैंक खाता विवरण,
ओटीपी,
पासवर्ड,
कार्ड की जानकारी,
या किसी डिजिटल वॉलेट की एक्सेस
अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
यदि कोई कॉल करने वाला स्वयं को सरकारी अधिकारी बताकर तत्काल भुगतान का दबाव बनाए, तो पहले संबंधित एजेंसी से आधिकारिक माध्यम से सत्यापन करना जरूरी है।
जांच अभी जारी
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कई स्तरों पर जारी है। जब्त किए गए कंप्यूटर, मोबाइल फोन, सर्वर, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस कथित नेटवर्क का वास्तविक आकार कितना बड़ा था, कितने देशों तक इसकी पहुंच थी और इसमें शामिल लोगों की जिम्मेदारी क्या थी।
लखनऊ में कथित अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के खिलाफ की गई यह कार्रवाई हाल के समय की बड़ी पुलिस कार्रवाइयों में गिनी जा रही है। पुलिस के अनुसार फर्जी कॉल सेंटर के माध्यम से विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी की जा रही थी। इस मामले में 119 लोगों को हिरासत में लिया गया है और कई प्रमुख आरोपियों से पूछताछ जारी है। हालांकि, जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे। ऐसे मामलों से यह भी स्पष्ट होता है कि डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

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