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क्या सफेद दाग छूने से फैलता है? डॉक्टर ने बताया विटिलिगो का पूरा सच, जानिए कारण, लक्षण और इलाज

 


शरीर पर अचानक सफेद धब्बे या सफेद दाग दिखाई देना कई लोगों के लिए चिंता का कारण बन जाता है। इतना ही नहीं, समाज में इस बीमारी को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं भी फैली हुई हैं। अक्सर लोग मान लेते हैं कि सफेद दाग यानी विटिलिगो (Vitiligo) छूने से फैलता है या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से दूसरे लोगों को भी हो जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा पूरी तरह गलत है।

त्वचा रोग विशेषज्ञों के अनुसार विटिलिगो कोई संक्रामक बीमारी नहीं है। यह न तो छूने से फैलती है, न साथ बैठने, खाने-पीने या सामान्य संपर्क से किसी दूसरे व्यक्ति को होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही जानकारी के अभाव में इस बीमारी से पीड़ित लोगों को शारीरिक से ज्यादा मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

क्या है विटिलिगो?

विटिलिगो एक ऐसी त्वचा संबंधी बीमारी है, जिसमें शरीर के कुछ हिस्सों की त्वचा अपना प्राकृतिक रंग खोने लगती है। धीरे-धीरे वहां सफेद या हल्के रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं। यह समस्या शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है और कुछ मामलों में समय के साथ बढ़ भी सकती है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी त्वचा में मौजूद मेलानोसाइट्स नामक कोशिकाओं के प्रभावित होने के कारण होती है। यही कोशिकाएं त्वचा को उसका प्राकृतिक रंग देने वाला मेलानिन बनाती हैं।

डॉक्टर ने दूर की सबसे बड़ी गलतफहमी

उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. युगल राजपूत के अनुसार विटिलिगो एक ऑटोइम्यून बीमारी है।

उन्होंने बताया कि इस बीमारी में शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) गलती से अपनी ही त्वचा की रंग बनाने वाली कोशिकाओं पर हमला कर देता है। इसके कारण प्रभावित हिस्से की त्वचा धीरे-धीरे सफेद दिखाई देने लगती है।

डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि यह बीमारी किसी भी प्रकार से संक्रामक नहीं होती। किसी मरीज को छूने, उसके साथ रहने, भोजन करने या सामान्य संपर्क में आने से यह बीमारी दूसरे व्यक्ति तक नहीं पहुंचती।

आखिर क्यों होती है विटिलिगो?

हालांकि अभी तक विटिलिगो का कोई एक निश्चित कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि कई कारण इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।

सबसे प्रमुख कारण ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया मानी जाती है। इसके अलावा आनुवंशिक कारण, थायरॉइड से जुड़ी समस्याएं, मानसिक तनाव, त्वचा पर गंभीर चोट, जलन या कुछ अन्य ऑटोइम्यून रोग भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

यदि परिवार में पहले किसी सदस्य को विटिलिगो रहा हो तो कुछ लोगों में इसकी संभावना बढ़ सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को यह बीमारी अवश्य होगी।

विटिलिगो के प्रमुख लक्षण

विशेषज्ञों के अनुसार विटिलिगो का सबसे स्पष्ट लक्षण शरीर पर सफेद या हल्के रंग के धब्बों का बनना है।

ये धब्बे अक्सर—

  • चेहरे पर

  • हाथों और पैरों पर

  • आंखों के आसपास

  • होंठों के पास

  • उंगलियों पर

  • कोहनी और घुटनों के आसपास

  • या शरीर के किसी भी हिस्से में दिखाई दे सकते हैं।

कुछ मरीजों में समय के साथ इन धब्बों का आकार बढ़ सकता है। कई मामलों में प्रभावित हिस्से के बाल भी सफेद होने लगते हैं।

क्या यह बीमारी दर्द देती है?

अधिकांश मामलों में विटिलिगो से दर्द या खुजली जैसी समस्या नहीं होती।

हालांकि कुछ लोगों में शुरुआती चरण में हल्की संवेदनशीलता महसूस हो सकती है, लेकिन यह बीमारी मुख्य रूप से त्वचा के रंग में बदलाव से जुड़ी होती है।

इसके बावजूद इसका मानसिक प्रभाव काफी गहरा हो सकता है, क्योंकि कई मरीज सामाजिक भेदभाव और गलत धारणाओं का सामना करते हैं।

क्या विटिलिगो का इलाज संभव है?

डॉक्टरों के अनुसार विटिलिगो का इलाज उपलब्ध है, लेकिन हर मरीज में उसका परिणाम अलग-अलग हो सकता है।

आज के समय में कई आधुनिक उपचार उपलब्ध हैं, जिनमें—

  • विशेष दवाइयां

  • मेडिकेटेड क्रीम

  • फोटोथेरेपी (Light Therapy)

  • लेजर आधारित उपचार

  • और कुछ मामलों में सर्जिकल विकल्प भी शामिल हैं।

इन उपचारों से कई मरीजों में त्वचा का प्राकृतिक रंग आंशिक या काफी हद तक वापस आ सकता है।

हालांकि इलाज लंबा चल सकता है और मरीज को धैर्य के साथ डॉक्टर की सलाह का पालन करना पड़ता है।

इलाज के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?

विशेषज्ञों का कहना है कि विटिलिगो के मरीजों को स्वयं इलाज करने या घरेलू नुस्खों पर पूरी तरह निर्भर रहने से बचना चाहिए।

उन्हें नियमित रूप से त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए और निर्धारित दवाओं का समय पर उपयोग करना चाहिए।

धूप में लंबे समय तक रहने से पहले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि प्रभावित त्वचा सूर्य की किरणों के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकती है।

मानसिक स्वास्थ्य भी है महत्वपूर्ण

डॉक्टरों का कहना है कि विटिलिगो केवल त्वचा की बीमारी नहीं है, बल्कि इसका असर मरीज के आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

समाज में फैली गलत धारणाओं के कारण कई लोग मरीजों से दूरी बनाने लगते हैं, जिससे उनमें तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं।

ऐसे में परिवार और समाज का सहयोग मरीज के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है।

विटिलिगो को लेकर 5 बड़ी सच्चाई

1. यह छूने से नहीं फैलती

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विटिलिगो संक्रामक बीमारी नहीं है। मरीज को छूने, साथ बैठने, हाथ मिलाने या भोजन साझा करने से यह किसी दूसरे व्यक्ति को नहीं होती।

2. यह ऑटोइम्यून बीमारी है

इसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र स्वयं त्वचा की रंग बनाने वाली कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।

3. तनाव और आनुवंशिक कारण भूमिका निभा सकते हैं

मानसिक तनाव, पारिवारिक इतिहास और कुछ अन्य ऑटोइम्यून बीमारियां इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

4. इलाज संभव है

आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों की मदद से कई मरीजों में अच्छे परिणाम देखने को मिलते हैं, लेकिन उपचार में समय लग सकता है।

5. सामाजिक जागरूकता जरूरी

गलत धारणाओं के कारण मरीजों को अनावश्यक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। सही जानकारी ही इस समस्या को कम कर सकती है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

यदि शरीर पर अचानक सफेद धब्बे दिखाई दें, उनका आकार बढ़ने लगे या त्वचा के रंग में असामान्य बदलाव महसूस हो, तो बिना देरी किए त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

समय पर पहचान और उपचार से कई मामलों में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।

विटिलिगो यानी सफेद दाग एक संक्रामक बीमारी नहीं, बल्कि एक ऑटोइम्यून त्वचा रोग है। यह किसी व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में छूने, साथ रहने या सामान्य संपर्क से नहीं फैलता। इस बीमारी को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना बेहद जरूरी है ताकि मरीजों को अनावश्यक भेदभाव का सामना न करना पड़े। यदि किसी व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई दें, तो घबराने के बजाय त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर नियमित उपचार शुरू करना सबसे उचित कदम है। सही जानकारी, समय पर इलाज और सामाजिक सहयोग से विटिलिगो के साथ भी सामान्य और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जिया जा सकता है।

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