सेक्स रैकेट नहीं शराब के धंधे में गई बंटी की जान, पटना पुलिस का बड़ा दावा; परिवार बोला- पुलिस नई कहानी गढ़ रही
पटना के न्यू करबिगहिया निवासी बंटी कुमार उर्फ बंटी यादव की हत्या का मामला लगातार नया मोड़ ले रहा है। इस सनसनीखेज हत्याकांड में अब पटना पुलिस ने ऐसा दावा किया है, जिससे पूरे मामले को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। पुलिस का कहना है कि बंटी यादव की हत्या शराब तस्करी से होने वाली अवैध कमाई में हिस्सेदारी को लेकर हुए विवाद के कारण की गई। वहीं दूसरी ओर, मृतक के परिजनों ने पुलिस के इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए सबूत सार्वजनिक करने की मांग की है।
इस बीच पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है, जबकि मुख्य आरोपी रविश कुमार उर्फ बीसी और किन्नर मोनी की तलाश अभी भी जारी है। दूसरी ओर, राजनीतिक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बंटी यादव के घर पहुंचने से मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
क्या है पूरा मामला?
बंटी कुमार उर्फ बंटी यादव का अपहरण और हत्या पटना में हाल के दिनों का सबसे चर्चित आपराधिक मामला बन गया है। परिजनों के अनुसार बंटी को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था, जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई।
घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और अब दावा किया है कि हत्या की साजिश पहले से रची गई थी।
पुलिस के मुताबिक यह केवल व्यक्तिगत दुश्मनी का मामला नहीं बल्कि अवैध शराब कारोबार से जुड़े पैसों के बंटवारे का विवाद था।
हालांकि इस दावे की पुष्टि अभी न्यायालय में होनी बाकी है।
पुलिस का दावा क्या है?
पटना पुलिस के अनुसार जांच में सामने आया कि बंटी यादव, रविश कुमार उर्फ बीसी और किन्नर मोनी के बीच शराब तस्करी से होने वाली कथित कमाई को लेकर विवाद चल रहा था।
पुलिस का कहना है कि आरोपियों का आरोप था कि बंटी उन्हें कथित कारोबार से मिलने वाला हिस्सा नहीं दे रहा था।
इसी कारण दोनों घटना से दो दिन पहले उसके घर पहुंचे थे और कथित रूप से उसे धमकी दी थी।
इसके बाद हत्या की योजना बनाई गई।
अपहरण की कैसे रची गई कथित साजिश?
पुलिस के अनुसार छह जुलाई की रात लगभग 12:47 बजे पटना जंक्शन स्थित दूध मंडी इलाके में पहले बंटी का कथित रूप से अपहरण किया गया।
जांच एजेंसियों का दावा है कि इस काम के लिए आठ लोगों को लगाया गया था।
पुलिस के अनुसार इसके बाद बंटी को ऑटो से बाइपास की ओर ले जाया गया और फिर बख्तियारपुर-मोकामा फोरलेन के पास उसकी हत्या कर दी गई।
इन दावों की पुष्टि फिलहाल पुलिस जांच का हिस्सा है।
दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रौशन कुमार और अजीत कुमार के रूप में बताई गई है।
पुलिस का दावा है कि पूछताछ के दौरान दोनों ने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की है।
उनके कब्जे से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
हालांकि आरोपियों के कथित कबूलनामे की पुष्टि अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
मुख्य आरोपी अभी भी फरार
पुलिस के अनुसार इस मामले के मुख्य आरोपी रविश कुमार उर्फ बीसी और किन्नर मोनी की तलाश जारी है।
दोनों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
जांच एजेंसियां उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
पुलिस ने शराब तस्करी का किया दावा
पुलिस का कहना है कि उत्तर प्रदेश से कथित रूप से शराब मंगाई जाती थी और उसके वितरण तथा कमाई के बंटवारे को लेकर विवाद होता था।
इसी विवाद ने बाद में हत्या का रूप ले लिया।
हालांकि अभी तक पुलिस ने सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी दस्तावेज, जब्ती या पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी साझा नहीं की है जिससे इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि हो सके।
परिजनों ने पुलिस के दावे पर उठाए सवाल
बंटी यादव की मां किरण देवी ने पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
उन्होंने कहा कि उनके बेटे का शराब तस्करी से कोई संबंध नहीं था।
उनका कहना है कि यदि पुलिस का दावा सही है तो वह इसके ठोस प्रमाण सामने लाए।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बंटी शराब तस्करी में शामिल था तो क्या उसे कभी इस आरोप में गिरफ्तार किया गया था या उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज हुआ था?
परिजनों का कहना है कि बिना पर्याप्त सबूत के मृतक की छवि खराब करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
परिजनों का दूसरा आरोप
बंटी की मां ने यह भी आरोप लगाया कि इलाके में कथित रूप से अवैध गतिविधियां संचालित होती थीं, जिनका उनका बेटा विरोध करता था।
उनका दावा है कि इसी कारण उसके खिलाफ साजिश रची गई।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
नेताओं का घर पहुंचना बना चर्चा का विषय
मंगलवार को कई प्रमुख राजनीतिक नेता बंटी यादव के घर पहुंचे।
सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने परिजनों से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने भी परिवार से मुलाकात की और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी परिजनों से मुलाकात कर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
जांच के कई पहलू अभी बाकी
पुलिस अभी इस मामले में कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच कर रही है—
मोबाइल कॉल रिकॉर्ड
सीडीआर (Call Detail Record)
सीसीटीवी फुटेज
डिजिटल साक्ष्य
गवाहों के बयान
आरोपियों की लोकेशन
बरामद मोबाइल फोन का डेटा
इन सभी की फॉरेंसिक जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
कानूनी विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस की जांच के दौरान सामने आने वाले दावे अंतिम सत्य नहीं माने जाते।
किसी भी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर होती है।
इसी प्रकार किसी मृत व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों का भी परीक्षण जांच और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना आवश्यक होता है।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं।
कुछ लोग पुलिस के दावों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोग परिजनों द्वारा उठाए गए सवालों का भी समर्थन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी पक्ष के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
बंटी यादव हत्याकांड अब केवल हत्या का मामला नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस और परिजनों के अलग-अलग दावों के कारण यह एक संवेदनशील जांच का विषय बन गया है। पुलिस का कहना है कि हत्या के पीछे शराब तस्करी से जुड़े पैसों का विवाद था, जबकि परिवार इस दावे को पूरी तरह गलत बताते हुए सबूत की मांग कर रहा है। दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और मुख्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई पुलिस जांच, फॉरेंसिक साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।

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