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मानसून बना महाकाल! असम में 41 मौतें, कई राज्यों में बाढ़ का कहर, IMD के अलर्ट से बढ़ी टेंशन

 


देश के कई हिस्सों में मानसून अब राहत की जगह बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण असम, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में बाढ़, जलभराव और भूस्खलन की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। नदियां उफान पर हैं, सड़कें पानी में डूब चुकी हैं और हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कई इलाकों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जबकि राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।

सबसे गंभीर स्थिति असम में बनी हुई है, जहां बाढ़ ने लाखों लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है। वहीं जम्मू-कश्मीर में मौसम विभाग ने भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है। गुजरात में भी लगातार बारिश के चलते औरंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे कई इलाकों में पानी भर गया है।

असम में बाढ़ से हालात बेहद गंभीर

असम इस समय देश के सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल है। राज्य में लगातार हो रही बारिश और ब्रह्मपुत्र सहित कई नदियों के उफान पर आने से बाढ़ की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 10 और लोगों की मौत हुई है, जिनमें चार बच्चे भी शामिल हैं। इसके साथ ही इस मानसून सीजन में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 41 तक पहुंच गई है।

राज्य के 11 जिलों के लगभग 6.53 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से टूट गया है और लोगों को नावों के सहारे सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।

राहत शिविरों में रह रहे लाखों लोग

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार—

  • 6.53 लाख से अधिक लोग प्रभावित

  • लगभग 3.13 लाख लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली

  • हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न

  • पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचने की आशंका

राज्य सरकार के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और भारतीय सेना राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई है।

ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

लगातार बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

जलस्तर बढ़ने के कारण तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है और निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है। प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है और संवेदनशील क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

गुवाहाटी में अर्बन फ्लडिंग का खतरा

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने असम की राजधानी गुवाहाटी और आसपास के क्षेत्रों के लिए अगले तीन से चार दिनों तक मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है।

पूर्वानुमान के अनुसार—

  • 7 से 11 सेंटीमीटर तक बारिश हो सकती है।

  • निचले इलाकों में जलभराव बढ़ सकता है।

  • ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

  • पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बना रहेगा।

जिला प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी सलाह का पालन करने की अपील की है।

जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट

जम्मू-कश्मीर में भी मौसम लगातार खराब बना हुआ है।

मौसम विभाग ने घाटी और पीर पंजाल क्षेत्र के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है।

संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं।

स्कूलों की छुट्टियां बढ़ाईं

बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने कश्मीर संभाग तथा जम्मू के शीतकालीन क्षेत्रों के सभी स्कूलों की छुट्टियां 26 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी हैं।

प्रशासन का कहना है कि मौसम सामान्य होने के बाद ही स्कूलों को दोबारा खोला जाएगा।

अगले कुछ दिन रह सकते हैं चुनौतीपूर्ण

मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक जम्मू-कश्मीर में रुक-रुक कर तेज बारिश जारी रह सकती है।

विशेष रूप से—

  • पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन

  • छोटे नालों में अचानक पानी बढ़ने

  • फ्लैश फ्लड

  • सड़क अवरोध

जैसी घटनाओं की संभावना बनी हुई है।

यात्रियों और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने तथा प्रशासन की सलाह का पालन करने के लिए कहा गया है।

गुजरात में औरंगा नदी उफान पर

गुजरात के वलसाड जिले में लगातार बारिश के कारण औरंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है।

नदी का पानी शहर के कई हिस्सों में प्रवेश कर चुका है, जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

दाना बाजार सहित कई इलाकों में भारी जलभराव की स्थिति बन गई है।

कई वाहन पानी में डूबे

लगातार बारिश और जलभराव के कारण कई स्थानों पर सड़कें पूरी तरह पानी में डूब गईं।

दाना बाजार क्षेत्र में खड़ी कई कारें और अन्य वाहन पानी में डूब गए।

जलभराव के कारण—

  • यातायात प्रभावित हुआ।

  • बाजारों में कारोबार ठप पड़ गया।

  • लोगों को घरों से निकलने में परेशानी हुई।

स्थानीय प्रशासन पानी निकालने और राहत कार्यों में जुटा हुआ है।

महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में भी असर

मानसून की सक्रियता का असर महाराष्ट्र सहित कई अन्य राज्यों में भी देखने को मिल रहा है।

कई जिलों में भारी बारिश के चलते—

  • नदी-नाले उफान पर हैं।

  • निचले इलाकों में जलभराव हो गया है।

  • कुछ स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है।

राज्य सरकारें स्थानीय प्रशासन के माध्यम से स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

राहत और बचाव कार्य जारी

देश के विभिन्न राज्यों में राहत एवं बचाव कार्य तेजी से चल रहे हैं।

कई जगहों पर—

  • NDRF की टीमें तैनात हैं।

  • SDRF बचाव अभियान चला रही है।

  • सेना और स्थानीय प्रशासन लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं।

  • राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

लोगों के लिए प्रशासन की सलाह

मौसम विभाग और प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि—

  • अनावश्यक यात्रा से बचें।

  • जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से परहेज करें।

  • नदी और नालों के किनारे न जाएं।

  • मौसम विभाग की आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखें।

  • किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें।

जलवायु विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान अत्यधिक वर्षा की घटनाएं हाल के वर्षों में अधिक देखने को मिल रही हैं। तेज बारिश कम समय में अधिक पानी गिरने के कारण शहरी जलभराव, बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में समय पर मौसम पूर्वानुमान, मजबूत जल निकासी व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियां नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

देश के कई राज्यों में मानसून इस समय गंभीर चुनौती बन गया है। असम में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित हैं और मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश और भूस्खलन की आशंका के चलते स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं, जबकि गुजरात में नदियों के उफान और जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन, आपदा प्रबंधन बल और राहत एजेंसियां लगातार स्थिति पर नजर रखते हुए बचाव कार्यों में जुटी हैं। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और केवल आधिकारिक सलाह का पालन करने की अपील की है।

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