40 की उम्र पार करते ही मर्द हो जाएं सतर्क! हर साल जरूर कराएं ये 5 मेडिकल टेस्ट, वरना चुपचाप घेर लेंगी गंभीर बीमारियां
नई दिल्ली: अक्सर कहा जाता है कि जिंदगी की असली शुरुआत 40 साल की उम्र के बाद होती है। इस उम्र तक व्यक्ति अपने करियर, परिवार और आर्थिक जिम्मेदारियों में काफी हद तक स्थिर हो चुका होता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यही वह दौर भी है, जब शरीर में कई ऐसे बदलाव शुरू होते हैं जो भविष्य में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
दुर्भाग्य से अधिकांश पुरुष अपनी सेहत को तब तक नजरअंदाज करते रहते हैं, जब तक बीमारी गंभीर रूप नहीं ले लेती। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, फैटी लिवर, किडनी की बीमारी और प्रोस्टेट संबंधी समस्याएं शुरुआती चरण में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती हैं। यही वजह है कि डॉक्टर 40 वर्ष की आयु के बाद नियमित हेल्थ चेकअप कराने की सलाह देते हैं।
नई दिल्ली के वीएनए अस्पताल के एंड्रोलॉजिस्ट एवं पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, यदि पुरुष हर वर्ष कुछ जरूरी मेडिकल जांच कराते रहें तो कई गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाया जा सकता है और उनका प्रभावी इलाज भी संभव हो सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है 40 के बाद नियमित हेल्थ चेकअप?
40 वर्ष के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म धीरे-धीरे कम होने लगता है। हार्मोनल बदलाव, बढ़ता तनाव, अनियमित खान-पान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा देती है।
कई बीमारियां वर्षों तक बिना किसी लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाती रहती हैं। जब तक लक्षण दिखाई देते हैं, तब तक बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। इसलिए नियमित जांच को बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।
1. ब्लड प्रेशर की नियमित जांच
उच्च रक्तचाप को "साइलेंट किलर" कहा जाता है क्योंकि अधिकांश लोगों को लंबे समय तक इसके कोई लक्षण महसूस नहीं होते।
डॉ. विनीत मल्होत्रा के अनुसार, 40 वर्ष की उम्र के बाद प्रत्येक पुरुष को कम से कम महीने में एक बार अपना ब्लड प्रेशर अवश्य जांचना चाहिए।
यदि समय रहते हाई ब्लड प्रेशर का पता चल जाए तो खान-पान, व्यायाम और आवश्यकता पड़ने पर दवाओं की मदद से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। अनियंत्रित ब्लड प्रेशर हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और आंखों की समस्याओं का कारण बन सकता है।
2. हार्ट हेल्थ की जांच कराना बेहद जरूरी
भारत में हृदय रोग तेजी से बढ़ रहे हैं और अब कम उम्र के लोगों में भी हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, 40 वर्ष की उम्र के बाद हर साल निम्नलिखित जांच करानी चाहिए—
ईसीजी (ECG)
लिपिड प्रोफाइल
आवश्यकता होने पर ईकोकार्डियोग्राफी या ट्रेडमिल टेस्ट (डॉक्टर की सलाह अनुसार)
लिपिड प्रोफाइल के जरिए शरीर में अच्छे और खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर पता चलता है। यदि खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है तो यह हृदय की धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है।
यदि रिपोर्ट सामान्य सीमा से ऊपर आती है, तो डॉक्टर हर छह महीने में जांच कराने और जीवनशैली में बदलाव की सलाह दे सकते हैं।
3. ब्लड शुगर टेस्ट को न करें नजरअंदाज
भारत दुनिया में सबसे अधिक डायबिटीज मरीजों वाले देशों में शामिल है। अनुमान है कि देश में करोड़ों लोग मधुमेह से प्रभावित हैं और बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्हें अपनी बीमारी की जानकारी तक नहीं होती।
आजकल टाइप-2 डायबिटीज 30-35 वर्ष की उम्र में भी देखने को मिल रही है।
इसलिए 40 वर्ष के बाद प्रत्येक पुरुष को साल में कम से कम एक बार—
फास्टिंग ब्लड शुगर
HbA1c टेस्ट
जरूर कराना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति में प्री-डायबिटीज की स्थिति पाई जाती है, तो नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और वजन नियंत्रित करके भविष्य में डायबिटीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
4. प्रोस्टेट हेल्थ की जांच भी है जरूरी
40 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों में प्रोस्टेट संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ने लगता है।
प्रोस्टेट एक छोटी ग्रंथि होती है, जो मूत्राशय के नीचे स्थित रहती है और पुरुष प्रजनन प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
डॉ. विनीत मल्होत्रा बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट का आकार बढ़ सकता है। इससे पेशाब की नली पर दबाव पड़ने लगता है और कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
इनमें शामिल हैं—
बार-बार पेशाब आना
रात में कई बार उठना
पेशाब करने में कठिनाई
पेशाब का धीमा प्रवाह
पेशाब पूरी तरह साफ न होना
ऐसी स्थिति में डॉक्टर PSA (Prostate Specific Antigen) टेस्ट सहित अन्य जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
यदि समय रहते समस्या का पता चल जाए तो अधिकांश मामलों में दवा या अन्य उपचार से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है।
5. लिवर और किडनी फंक्शन टेस्ट भी कराएं
आधुनिक जीवनशैली के कारण फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
ज्यादा तला-भुना भोजन, मोटापा, शराब का सेवन, डायबिटीज और शारीरिक गतिविधियों की कमी लिवर और किडनी दोनों पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि 40 वर्ष के बाद प्रत्येक पुरुष को वर्ष में कम से कम एक बार—
लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT)
जरूर कराना चाहिए।
इन जांचों से यह पता लगाया जा सकता है कि दोनों अंग सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं।
सिर्फ टेस्ट ही नहीं, जीवनशैली भी बदलनी होगी
डॉक्टरों का कहना है कि केवल मेडिकल जांच कराना ही पर्याप्त नहीं है।
यदि अच्छी सेहत बनाए रखनी है तो इन आदतों को भी अपनाना जरूरी है—
प्रतिदिन कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम करें।
संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।
शराब का सेवन सीमित करें या पूरी तरह छोड़ दें।
पर्याप्त नींद लें।
तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान करें।
वजन को नियंत्रित रखें।
कब तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?
यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए चिकित्सकीय सलाह लें—
सीने में दर्द
सांस फूलना
लगातार थकान
बार-बार प्यास लगना
वजन का अचानक घटना
पेशाब में जलन या खून आना
पैरों में सूजन
लगातार हाई ब्लड प्रेशर
विशेषज्ञों की सलाह
डॉ. विनीत मल्होत्रा का कहना है कि 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित हेल्थ स्क्रीनिंग को खर्च नहीं बल्कि भविष्य के लिए निवेश समझना चाहिए। अधिकांश गंभीर बीमारियां शुरुआती अवस्था में पकड़ में आ जाएं तो उनका इलाज आसान, कम खर्चीला और अधिक प्रभावी होता है।
40 वर्ष की उम्र के बाद स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हृदय रोग, प्रोस्टेट, लिवर और किडनी से जुड़ी कई बीमारियां शुरुआती दौर में बिना लक्षण के बढ़ती रहती हैं। ऐसे में नियमित मेडिकल जांच, संतुलित जीवनशैली और समय पर डॉक्टर की सलाह ही स्वस्थ और लंबी जिंदगी की सबसे मजबूत कुंजी है।

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