Breaking News

Re-NEET रिजल्ट में बड़ा खेल? 668 अंकों की उम्मीद, लेकिन OMR में दिखे सिर्फ 41 सवाल... छात्रा का आरोप सुन हर कोई हैरान, वीडियो देखें

 


देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। इस बार मामला कर्नाटक के हावेरी जिले से सामने आया है, जहां एक छात्रा ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रा का दावा है कि परीक्षा के दौरान उसने 165 प्रश्नों के उत्तर दिए थे और उसे लगभग 668 अंक मिलने की उम्मीद थी, लेकिन जब OMR शीट जारी हुई तो उसमें केवल 41 प्रश्नों का प्रयास दर्ज दिखाया गया। इतना ही नहीं, उसका स्कोर महज 11 अंक दर्शाया गया, जिससे छात्रा और उसका परिवार पूरी तरह हैरान रह गया।

इस मामले ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और मूल्यांकन प्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब छात्रा ने न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट का रुख करने का फैसला किया है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार कर्नाटक के हावेरी जिले की रहने वाली छात्रा बिंदूश्री पवार ने हाल ही में आयोजित NEET परीक्षा में हिस्सा लिया था। परीक्षा समाप्त होने के बाद उन्हें विश्वास था कि उनका प्रदर्शन काफी अच्छा रहा है। छात्रा का कहना है कि उसने कुल 165 प्रश्नों के उत्तर दिए थे और अपने प्रदर्शन के आधार पर लगभग 668 अंक मिलने की उम्मीद कर रही थी।

लेकिन जब NTA की ओर से OMR शीट और परिणाम जारी किए गए तो तस्वीर पूरी तरह अलग थी। छात्रा के अनुसार जारी OMR शीट में केवल 41 प्रश्नों का प्रयास दर्ज किया गया और परिणाम में उनका स्कोर सिर्फ 11 अंक दिखाया गया।

OMR शीट पर उठाए गंभीर सवाल

बिंदूश्री पवार का आरोप है कि NTA द्वारा जारी की गई OMR शीट उनके वास्तविक उत्तरों से मेल नहीं खाती। उनका कहना है कि उन्होंने परीक्षा के दौरान सावधानीपूर्वक उत्तर भरे थे और OMR शीट में इतने कम प्रश्न दिखना संभव नहीं है।

छात्रा का कहना है कि यदि उनकी मूल OMR शीट और परीक्षा केंद्र पर जमा की गई उत्तर-पत्रिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ सकती है।

परिवार ने जताई चिंता

छात्रा के परिवार का कहना है कि बिंदूश्री ने परीक्षा की तैयारी के लिए लंबे समय तक कड़ी मेहनत की थी। परिवार को भरोसा था कि वह अच्छे अंकों के साथ मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने की दौड़ में शामिल होगी।

लेकिन परिणाम आने के बाद पूरा परिवार सदमे में है। उनका कहना है कि यदि वास्तव में तकनीकी या मूल्यांकन संबंधी कोई गलती हुई है तो उसे तुरंत सुधारा जाना चाहिए ताकि छात्रा के भविष्य पर कोई असर न पड़े।

हाईकोर्ट जाने का फैसला

मामले को लेकर छात्रा और उसके परिवार ने कानूनी रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि वे इस कथित गड़बड़ी के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे।

याचिका के माध्यम से NTA की OMR रिकॉर्ड, परीक्षा संबंधी दस्तावेजों और मूल्यांकन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की जाएगी। परिवार का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

छात्रों के बीच बढ़ी चिंता

यह मामला सामने आने के बाद कई अभ्यर्थियों के बीच भी चिंता बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ छात्र परीक्षा प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, जबकि कई लोग आधिकारिक जांच के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की बात कह रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी उम्मीदवार को अपनी OMR शीट या परिणाम में गड़बड़ी का संदेह हो तो उपलब्ध आधिकारिक प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करानी चाहिए और आवश्यक होने पर कानूनी विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं।

NTA की ओर से क्या कहा गया?

इस मामले में समाचार लिखे जाने तक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से बिंदूश्री पवार के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि एजेंसी इस मामले की जांच करेगी या नहीं।

जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई

फिलहाल यह मामला आरोपों के स्तर पर है और इसकी पुष्टि न्यायिक या आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि छात्रा के दावों में सच्चाई पाई जाती है तो यह परीक्षा प्रणाली के लिए गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है। वहीं यदि जांच में कोई तकनीकी त्रुटि नहीं मिलती है तो स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।

अब सभी की नजर हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और NTA की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। यह मामला न केवल एक छात्रा के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पर भी महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।

कोई टिप्पणी नहीं