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वाराणसी में विजिलेंस का बड़ा एक्शन: GST की डिप्टी कमिश्नर ₹50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार, मचा हड़कंप, वीडियो में देखें...

 


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (विजिलेंस) की वाराणसी इकाई ने राज्य कर (GST) विभाग की सेक्टर-6 की डिप्टी कमिश्नर अंबिका को कथित तौर पर ₹50,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद राज्य कर विभाग में हड़कंप मच गया है और सरकारी महकमे में इस मामले की व्यापक चर्चा हो रही है।

शिकायत के बाद बिछाया गया ट्रैप

जानकारी के अनुसार, एक निजी कंपनी की फाइल के निस्तारण और फरवरी 2023 के जीएसटी रिटर्न से जुड़े मामले में डिप्टी कमिश्नर पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर रिश्वत देने के बजाय पूरे मामले की सूचना उत्तर प्रदेश विजिलेंस को दी।

विजिलेंस अधिकारियों ने पहले शिकायत का सत्यापन किया। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद टीम ने पूरी योजना के साथ ट्रैप बिछाया और आरोपी अधिकारी को रंगे हाथ पकड़ने की रणनीति तैयार की।

दादा रेस्टोरेंट के पास हुई गिरफ्तारी

विजिलेंस टीम ने शिकायतकर्ता को निर्धारित योजना के अनुसार रिश्वत की रकम लेकर भेजा। तय स्थान चेतगंज स्थित दादा रेस्टोरेंट के पास जैसे ही डिप्टी कमिश्नर ने कथित रूप से ₹50 हजार की रिश्वत स्वीकार की, पहले से मौजूद विजिलेंस टीम ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

कार्रवाई इतनी तेज और गोपनीय तरीके से की गई कि आरोपी अधिकारी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। गिरफ्तारी के बाद रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई।

भागने की कोशिश और हाथापाई का आरोप

कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान डिप्टी कमिश्नर ने मौके से निकलने की कोशिश की। इस दौरान विजिलेंस टीम और महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर हाथापाई भी हुई। हालांकि, टीम ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए आरोपी अधिकारी को हिरासत में ले लिया।

किस मामले में मांगी गई थी रिश्वत?

बताया जा रहा है कि शिकायतकर्ता की कंपनी की एक फाइल लंबे समय से लंबित थी। इसके अलावा फरवरी 2023 के जीएसटी रिटर्न से जुड़े प्रकरण के निस्तारण के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई थी।

शिकायतकर्ता ने इस मांग को अवैध बताते हुए विजिलेंस से संपर्क किया। इसके बाद पूरी कार्रवाई की गई। फिलहाल जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं या नहीं।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

विजिलेंस अधिकारियों ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या इस मामले में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका भी रही है।

विभागीय कार्रवाई भी संभव

कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय स्तर पर भी डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

सरकारी सेवा नियमों के तहत रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े जाने की स्थिति में निलंबन, विभागीय जांच और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाएगा।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ समय से विजिलेंस और अन्य जांच एजेंसियां रिश्वतखोरी के मामलों में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। विभिन्न सरकारी विभागों में ट्रैप ऑपरेशन के जरिए रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

व्यापारी वर्ग में चर्चा का विषय

वाराणसी के व्यापारी संगठनों और जीएसटी से जुड़े कारोबारियों के बीच भी इस कार्रवाई की चर्चा तेज है। व्यापारियों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी द्वारा अवैध धन की मांग की जाती है, तो उसकी शिकायत संबंधित जांच एजेंसी से की जानी चाहिए ताकि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।

जांच जारी

फिलहाल विजिलेंस की टीम पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि शिकायत, रिश्वत की मांग और बरामदगी से जुड़े सभी पहलुओं की जांच के बाद नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में अन्य तथ्यों का खुलासा होता है तो उसके आधार पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

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