अल्लाह का आदेश' बोलते ही बरसने लगे चाकू! गर्भवती महिला समेत 3 पर हमला, VIDEO देख कांप उठेंगे
फ्रांस की राजधानी पेरिस एक बार फिर हिंसा की दर्दनाक घटना से दहल उठी। सोमवार (27 जुलाई) को शहर के व्यस्त इलाके पोर्ट डे क्लिची (Porte de Clichy) में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर दो बड़े रसोई के चाकू लेकर राह चल रही तीन महिलाओं पर हमला कर दिया। इस हमले में एक गर्भवती महिला भी घायल हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर वार करते समय बार-बार "यह अल्लाह का आदेश है" चिल्ला रहा था, जिससे घटना को लेकर आतंकवाद से जुड़े एंगल पर भी चर्चा शुरू हो गई।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो ने पूरे यूरोप में सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ते चरमपंथी खतरे को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
व्यस्त सड़क पर अचानक शुरू हुआ हमला
जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार दोपहर करीब 11:30 बजे (पेरिस स्थानीय समय) की है। पेरिस कोर्ट के नजदीक स्थित पोर्ट डे क्लिची इलाके में एक व्यक्ति लंबे काले बालों और क्रीम रंग के ट्रैकसूट में घूमता दिखाई दिया। उसके हाथों में दो बड़े रसोई के चाकू थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ ही क्षण बाद उसने अचानक महिलाओं को निशाना बनाना शुरू कर दिया। उसने क्रमशः 19 वर्षीय, 24 वर्षीय और 36 वर्षीय तीन महिलाओं पर चाकू से हमला किया। हमला इतना तेज था कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले कई वार हो चुके थे।
गर्भवती महिला भी बनी हमले का शिकार
घायल महिलाओं में एक महिला गर्भवती बताई जा रही है। चिकित्सकों ने सभी घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। शुरुआती जानकारी के अनुसार दो महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है, हालांकि डॉक्टरों ने उनके बचने की उम्मीद जताई है।
गर्भवती महिला की स्थिति को लेकर अस्पताल प्रशासन लगातार निगरानी बनाए हुए है। फिलहाल उसके और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य को लेकर विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
वीडियो में दिखी अफरा-तफरी
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि जैसे ही हमला शुरू हुआ, इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। कई लोग जोर-जोर से चिल्लाते हुए दूसरों को सतर्क कर रहे थे।
वीडियो में एक व्यक्ति लोगों को दूर रहने की चेतावनी देता दिखाई देता है, जबकि कुछ बहादुर नागरिक हमलावर को रोकने की कोशिश करते नजर आते हैं।
ऑफ-ड्यूटी पुलिस अधिकारी ने दिखाई बहादुरी
घटना के दौरान संयोग से एक पुलिस अधिकारी, जो उस समय ड्यूटी पर नहीं था, घटनास्थल के आसपास मौजूद था। उसने कुछ स्थानीय लोगों के साथ मिलकर हमलावर को काबू करने की कोशिश की।
काफी संघर्ष के बाद हमलावर को जमीन पर गिराकर दबोच लिया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि गिरफ्तारी के दौरान भी वह लगातार चिल्ला रहा था कि "यह अल्लाह का आदेश है।"
हमलावर के पास से दोनों चाकू बरामद कर लिए गए और पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में ले लिया।
फ्रांस के गृह मंत्री ने की बहादुरी की सराहना
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर बड़ी त्रासदी को टाल दिया।
उन्होंने विशेष रूप से ऑफ-ड्यूटी पुलिस अधिकारी की बहादुरी की सराहना करते हुए कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो पीड़ितों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी।
गृह मंत्री ने घायल महिलाओं के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की और मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
L’assaillant de l’attaque au couteau à Paris porte de Clichy #paris #attaque pic.twitter.com/WIc6NSs004
— mel (@melindadjezz) July 27, 2026
कौन है आरोपी?
अब तक फ्रांसीसी प्रशासन ने आरोपी की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं की है।
हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरोपी की उम्र लगभग 31 वर्ष है और वह Seine-Saint-Denis क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के बयान काफी अस्पष्ट थे। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है ताकि उसके इरादों और पृष्ठभूमि का पता लगाया जा सके।
क्या आतंकवाद से जुड़ा है मामला?
हमले के पीछे का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है।
फ्रांस का राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी अभियोजक कार्यालय (PNAT) इस मामले की जांच अपने हाथ में लेने पर विचार कर रहा है।
हालांकि पुलिस फिलहाल सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है, जिनमें शामिल हैं—
आतंकवादी प्रेरणा
धार्मिक कट्टरता
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
व्यक्तिगत कारण
जांच एजेंसियों का कहना है कि केवल हमलावर के कथित धार्मिक नारे के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट हो सकेगी।
यूरोप में सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब यूरोप पहले से ही सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस, जर्मनी, बेल्जियम और अन्य यूरोपीय देशों में कई हिंसक घटनाएं सामने आई हैं, जिनके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी बढ़ाई है।
पेरिस की इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत है।
बर्लिन की घटना के बाद दूसरा बड़ा झटका
पेरिस की घटना से कुछ दिन पहले 25 जुलाई 2026 को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित Christopher Street Day (प्राइड फेस्टिवल) के दौरान भी एक गंभीर हमला हुआ था।
उस मामले में एक वैन भीड़ में घुस गई थी, जिसमें एक महिला की मौत हो गई जबकि 29 लोग घायल हुए थे।
जर्मन अधिकारियों ने उस मामले में कहा था कि आरोपी कथित तौर पर कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था। पुलिस कार्रवाई के दौरान वह मारा गया।
इन दोनों घटनाओं के बाद यूरोप में सुरक्षा एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया
पेरिस हमले का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लाखों लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
कुछ लोग सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कई लोग घायल महिलाओं के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
वहीं बड़ी संख्या में लोग उन नागरिकों और ऑफ-ड्यूटी पुलिस अधिकारी की बहादुरी की भी सराहना कर रहे हैं जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर हमलावर को पकड़ने में मदद की।
जांच अभी जारी
फ्रांसीसी पुलिस ने पूरे इलाके को कुछ समय के लिए सील कर दिया था और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कई साक्ष्य एकत्र किए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और उसके संपर्कों की भी जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने अकेले हमला किया या किसी अन्य व्यक्ति से उसका कोई संबंध था।
जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह हमला आतंकवाद से प्रेरित था, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा मामला था या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
पेरिस की इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। गर्भवती महिला समेत तीन महिलाओं पर हुए इस हमले ने पूरे फ्रांस को झकझोर दिया है। हालांकि बहादुर नागरिकों और एक ऑफ-ड्यूटी पुलिस अधिकारी की तत्परता से आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया गया, लेकिन इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। फिलहाल जांच एजेंसियां हर पहलू की जांच कर रही हैं और आधिकारिक निष्कर्ष आने का इंतजार किया जा रहा है।

कोई टिप्पणी नहीं