वायरल वीडियो में PM मोदी जी के प्रशंसकों के बीच दिखे पत्रकार अजीत अंजुम, रुबिका लियाकत की टिप्पणी पर सोशल मीडिया में छिड़ी बहस
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम भीड़ के बीच घिरे हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो को लेकर विभिन्न तरह के दावे किए जा रहे हैं। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि यह भीड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थकों की थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसी वीडियो को साझा करते हुए पत्रकार रुबिका लियाकत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद यह मामला ऑनलाइन चर्चा का विषय बन गया।
रुबिका लियाकत ने क्या कहा?
रुबिका लियाकत ने वीडियो साझा करते हुए लिखा कि मीडिया के खिलाफ फैलाई गई नफरत का असर अब उसी माहौल में दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों की वजह से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
अपने पोस्ट में उन्होंने एक प्रसिद्ध दोहे का भी उल्लेख किया—
"करता था सो क्यों किया, अब करि क्यों पछताय।
बोया पेड़ बबूल का, आम कहाँ से खाय।"
यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और इस पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पसंद करने वाली पब्लिक की भीड़ में फंसे @ajitanjum पत्रकार अजीत अंजुम जी पंछियों की तरह उड़ने का कर रहे प्रयास लेकिन उड़ नहीं पाए!
— MANOJ SHARMA LUCKNOW UP🇮🇳🇮🇳🇮🇳 (@ManojSh28986262) July 27, 2026
इस वायरल वीडियो को शेयर करते हुए @RubikaLiyaquat रुबिका लियाकत जी ने लिखा 👇
मीडिया के ख़िलाफ़ फैलाई नफ़रत में ख़ुद ही… pic.twitter.com/T4IUN8aQeJ
सोशल मीडिया पर बंटी राय
वीडियो और पोस्ट के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।
एक वर्ग ने रुबिका लियाकत की टिप्पणी का समर्थन करते हुए कहा कि पत्रकारों के प्रति किसी भी प्रकार की आक्रामकता लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल नहीं है।
वहीं दूसरे वर्ग ने इस पूरे घटनाक्रम पर अलग राय व्यक्त की और कहा कि वायरल वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी घटना और उसका संदर्भ सामने आना चाहिए।
घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
समाचार लिखे जाने तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वीडियो कब और कहां का है तथा भीड़ की प्रतिक्रिया किस कारण से हुई। वायरल वीडियो से जुड़े कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
साथ ही, इस विषय पर अजीत अंजुम की ओर से यदि कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी की गई है, तो उसे भी संदर्भ सहित देखा जाना चाहिए।
पत्रकारों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। मीडिया संगठनों और प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पत्रकार से असहमति लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन असहमति हिंसा, धमकी या डराने-धमकाने का रूप नहीं लेनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में सभी पत्रकारों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सोशल मीडिया पर वायरल दावों में बरतें सावधानी
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो अक्सर अधूरी जानकारी के साथ साझा किए जाते हैं। इसलिए किसी भी वायरल क्लिप के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक जानकारी और सभी पक्षों का बयान सामने आना जरूरी है।
अजीत अंजुम से जुड़े वायरल वीडियो और उस पर रुबिका लियाकत की प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, वीडियो से जुड़े कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। ऐसे मामलों में तथ्यों की पुष्टि, सभी पक्षों का दृष्टिकोण और जिम्मेदार सार्वजनिक संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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