'PM मोदी का वादा कब होगा पूरा?' उमर अब्दुल्ला का BJP पर बड़ा हमला, राज्य का दर्जा और 'ऑपरेशन लोटस' को लेकर लगाए गंभीर आरोप
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रविवार (12 जुलाई 2026) को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कई गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और भाजपा ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का बार-बार वादा किया, लेकिन अब तक उसे पूरा नहीं किया गया। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर विपक्षी दलों को तोड़ने, "ऑपरेशन लोटस" के जरिए सरकारें बनाने और उनकी पार्टी के विधायकों को कथित रूप से पार्टी बदलने के लिए प्रलोभन देने का भी आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) ने 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
'यह मोदी का वादा था, अब तक पूरा क्यों नहीं हुआ?'
उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कटड़ा में ट्रेन सेवा के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा और यह कोई साधारण वादा नहीं बल्कि प्रधानमंत्री का वादा है।
उन्होंने भाजपा के जम्मू-कश्मीर नेताओं से सवाल करते हुए कहा कि जब भी राज्य के दर्जे की बहाली को लेकर प्रश्न पूछा जाता है तो जवाब मिलता है कि "उचित समय आने पर" यह किया जाएगा।
उमर अब्दुल्ला ने पूछा कि आखिर वह "उचित समय" कब आएगा।
'क्या भाजपा सरकार बनने का इंतजार हो रहा है?'
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्णय भाजपा की राजनीतिक स्थिति से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में भाजपा यह मानती है कि राज्य का दर्जा तभी मिलेगा जब प्रदेश में उसकी सरकार बनेगी, तो उसे जनता के सामने स्पष्ट रूप से यह बात कहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि यही नीति है तो भाजपा को सार्वजनिक रूप से यह घोषित करना चाहिए कि जब तक जम्मू-कश्मीर में भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं बनेगा, तब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाएगा।
यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक आरोप है। भाजपा की ओर से इस संबंध में तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
परिसीमन को लेकर भी उठाए सवाल
उमर अब्दुल्ला ने परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया को लेकर भी भाजपा पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा सीटों के पुनर्गठन का उद्देश्य भाजपा और उसके सहयोगियों को राजनीतिक लाभ पहुंचाना था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परिसीमन के दौरान सात नई सीटें बनाई गईं, जिनमें से छह सीटों पर भाजपा को जीत मिली। उनके अनुसार इससे स्पष्ट होता है कि परिसीमन का उद्देश्य राजनीतिक लाभ प्राप्त करना था।
हालांकि परिसीमन आयोग एक स्वतंत्र वैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्य करता है और उसके निर्णयों का आधार जनसंख्या तथा अन्य निर्धारित मानदंड होते हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान एक राजनीतिक टिप्पणी है।
विधायकों को कथित तौर पर दिया गया प्रलोभन
उमर अब्दुल्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा ने उनकी पार्टी के एक विधायक को पार्टी बदलने के लिए कथित तौर पर 20 से 30 करोड़ रुपये और मंत्री पद का प्रस्ताव दिया।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
हालांकि इस आरोप के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है और भाजपा की ओर से भी इस आरोप पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
'भाजपा राजनीतिक दलों को तोड़ती है'
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर देशभर में विपक्षी दलों को कमजोर करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि यदि भाजपा यह दावा करती है कि वह जम्मू-कश्मीर में किसी प्रकार की राजनीतिक साजिश नहीं कर रही है, तो फिर अन्य राज्यों में हुई राजनीतिक घटनाओं को कैसे देखा जाए।
उमर अब्दुल्ला ने महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि विभिन्न राज्यों में विपक्षी दलों के भीतर हुए विभाजन भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और शिवसेना में हुए विभाजन तथा अन्य राज्यों की राजनीतिक घटनाएं इस आरोप को मजबूत करती हैं।
यह सभी टिप्पणियां मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं। इन मामलों पर संबंधित दलों और भाजपा की अपनी-अपनी अलग-अलग व्याख्याएं रही हैं।
'ऑपरेशन लोटस' पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कथित "ऑपरेशन लोटस" का भी उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जहां भाजपा चुनाव के माध्यम से सरकार नहीं बना पाती, वहां वह राजनीतिक दलों में टूट-फूट कराकर सत्ता हासिल करने का प्रयास करती है।
उन्होंने कहा कि अक्सर विपक्षी दलों पर बैकडोर राजनीति करने का आरोप लगाया जाता है, जबकि उनके अनुसार वास्तविक बैकडोर राजनीति भाजपा करती है।
भाजपा ने पूर्व में ऐसे आरोपों से इनकार किया है और विभिन्न राज्यों में हुए राजनीतिक परिवर्तनों को संवैधानिक और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
20 जुलाई को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस ने घोषणा की है कि वह 20 जुलाई 2026 को दिल्ली में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करेगी।
पार्टी का कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल करना जम्मू-कश्मीर के लोकतांत्रिक अधिकारों और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है।
यह प्रदर्शन केंद्र सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राज्य का दर्जा क्यों है बड़ा मुद्दा?
अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35A से जुड़े प्रावधानों में बदलाव करते हुए जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन किया था।
इसके बाद जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, जबकि लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा मिला।
उस समय केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि उपयुक्त समय पर जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा। बाद में केंद्र सरकार ने विभिन्न मंचों, जिनमें सर्वोच्च न्यायालय में भी शामिल है, राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। हालांकि इसके लिए कोई निश्चित समय-सीमा सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य का दर्जा जम्मू-कश्मीर की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।
विश्लेषकों के अनुसार आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संभावित चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक प्रमुख हो सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्णय अंततः केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और इस पर अंतिम फैसला राजनीतिक तथा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही लिया जाएगा।
भाजपा की प्रतिक्रिया पर रहेगी नजर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के आरोपों के बाद अब राजनीतिक नजरें भाजपा की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
संभावना है कि भाजपा इन आरोपों का जवाब देते हुए राज्य के विकास, सुरक्षा और केंद्र सरकार की नीतियों का पक्ष रखे।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी, परिसीमन, कथित "ऑपरेशन लोटस" और विपक्षी दलों को तोड़ने जैसे मुद्दों पर भाजपा पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व बयान का हवाला देते हुए पूछा कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा आखिर कब मिलेगा।
फिलहाल ये सभी बयान राजनीतिक आरोपों और दावों के दायरे में हैं। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। वहीं, 20 जुलाई को प्रस्तावित प्रदर्शन और राज्य के दर्जे की बहाली की मांग को लेकर आने वाले दिनों में जम्मू-कश्मीर की राजनीति और अधिक सक्रिय रहने की संभावना है।

कोई टिप्पणी नहीं