25 की उम्र में ही खत्म हो रही है मां बनने की क्षमता? डॉक्टरों ने किया बड़ा खुलासा, हर युवती को जाननी चाहिए ये 7 चेतावनी
Health News | आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता तनाव और बदलती स्वास्थ्य संबंधी आदतों के बीच महिलाओं में एक ऐसी समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो न केवल उनकी प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) बल्कि पूरे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार अब 25 से 30 वर्ष की महिलाओं में भी प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर (Premature Ovarian Failure - POF) या प्राइमरी ओवेरियन इंसफिशिएंसी (Primary Ovarian Insufficiency - POI) के मामले पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रहे हैं।
फर्टिलिटी विशेषज्ञों का कहना है कि पहले यह समस्या मुख्य रूप से अधिक उम्र की महिलाओं में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र की महिलाओं में भी इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यदि समय रहते इसकी पहचान नहीं की जाए तो भविष्य में गर्भधारण करने में कठिनाई, हार्मोनल असंतुलन और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
कम उम्र में क्यों बढ़ रही है यह समस्या?
पुणे स्थित नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी सेंटर की फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. रश्मि निफाडकर के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में 24 से 30 वर्ष की महिलाओं में इस बीमारी के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
उनका कहना है कि पहले 30 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में यह समस्या बेहद कम दिखाई देती थी, लेकिन अब 25-26 वर्ष की युवतियों में भी इसका निदान हो रहा है। उनके अनुसार हर महीने लगभग तीन से चार नए मरीज इस समस्या के साथ उनके पास पहुंच रहे हैं।
यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि कई महिलाएं तब तक डॉक्टर के पास नहीं पहुंचतीं, जब तक उन्हें गर्भधारण में परेशानी नहीं होने लगती या लंबे समय तक मासिक धर्म अनियमित नहीं रहता।
क्या होता है प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर?
प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर एक ऐसी स्थिति है जिसमें 40 वर्ष की आयु से पहले ही ओवरी सामान्य रूप से काम करना कम कर देती है।
सामान्यतः महिलाओं की ओवरी अंडाणु (Eggs) और एस्ट्रोजन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन बनाती है। लेकिन इस बीमारी में ओवरी पर्याप्त मात्रा में अंडाणु और हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती।
इसके परिणामस्वरूप—
गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।
हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है।
मासिक धर्म प्रभावित हो सकता है।
हड्डियों और हृदय के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि कुछ महिलाओं में कभी-कभी ओव्यूलेशन होता रहता है, लेकिन प्राकृतिक रूप से गर्भधारण की संभावना काफी कम हो सकती है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए—
1. मासिक धर्म का अनियमित होना
यदि पीरियड्स बार-बार लेट हो रहे हैं या उनका पैटर्न बदल गया है, तो यह शुरुआती संकेत हो सकता है।
2. कई महीनों तक पीरियड्स न आना
यदि लगातार कई महीनों तक मासिक धर्म नहीं आता है, तो इसकी जांच कराना जरूरी है।
3. गर्भधारण में कठिनाई
यदि नियमित प्रयासों के बावजूद गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो फर्टिलिटी जांच करानी चाहिए।
4. अचानक शरीर में गर्मी महसूस होना
हॉट फ्लैशेज केवल मेनोपॉज में ही नहीं, बल्कि हार्मोनल असंतुलन के कारण भी हो सकते हैं।
5. मूड में बार-बार बदलाव
चिड़चिड़ापन, चिंता या अवसाद जैसी समस्याएं भी हार्मोनल बदलाव से जुड़ी हो सकती हैं।
6. योनि में सूखापन
एस्ट्रोजन की कमी के कारण यह समस्या उत्पन्न हो सकती है।
7. हड्डियों का कमजोर होना
लंबे समय तक एस्ट्रोजन की कमी रहने पर हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है।
किन कारणों से बढ़ रही है यह बीमारी?
डॉ. रश्मि निफाडकर के अनुसार इसके पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं है, बल्कि कई जैविक और पर्यावरणीय कारक मिलकर इस स्थिति को जन्म दे सकते हैं।
आनुवंशिक कारण
यदि परिवार में किसी महिला को यह समस्या रही है, तो जोखिम बढ़ सकता है।
ऑटोइम्यून बीमारियां
कुछ ऑटोइम्यून रोग शरीर की अपनी कोशिकाओं पर हमला करते हैं, जिससे ओवरी प्रभावित हो सकती है।
लगातार तनाव
लंबे समय तक मानसिक तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
बदलती जीवनशैली
अनियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद की कमी और असंतुलित खान-पान भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
धूम्रपान
विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान ओवरी की कार्यक्षमता को प्रभावित करने वाले प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है।
पर्यावरणीय कारक
प्रदूषण, रसायनों का अधिक संपर्क और कुछ विषैले तत्व भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
कुछ चिकित्सा उपचार
कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या कुछ विशेष दवाओं का प्रभाव भी ओवरी पर पड़ सकता है।
समय पर जांच क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ी समस्या जागरूकता की कमी है।
अधिकांश युवा महिलाएं यह मानती हैं कि फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याएं केवल 35 या 40 वर्ष की उम्र के बाद होती हैं। इसी गलत धारणा के कारण शुरुआती लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
यदि समय रहते जांच हो जाए तो—
बीमारी की पहचान जल्दी हो सकती है।
उपचार समय पर शुरू किया जा सकता है।
भविष्य की फर्टिलिटी को सुरक्षित रखने के विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
हार्मोनल स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
केवल फर्टिलिटी ही नहीं, पूरे स्वास्थ्य पर पड़ता है असर
विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी केवल मां बनने की क्षमता तक सीमित नहीं है।
इसका असर कई अन्य स्वास्थ्य पहलुओं पर भी पड़ सकता है—
मानसिक स्वास्थ्य
हड्डियों की मजबूती
हार्ट हेल्थ
हार्मोनल संतुलन
यौन स्वास्थ्य
जीवन की गुणवत्ता
इसी कारण किसी भी प्रकार के हार्मोनल बदलाव या मासिक धर्म की अनियमितता को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
आधुनिक जीवनशैली की भूमिका
आज की महिलाएं करियर, नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और सामाजिक दबाव के बीच लगातार व्यस्त रहती हैं।
हालांकि विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि केवल तनाव या देर से परिवार शुरू करना सीधे तौर पर प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर का कारण नहीं माना जा सकता, लेकिन ये कारक समग्र प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, नियमित व्यायाम करना, संतुलित आहार लेना और पर्याप्त नींद लेना महिलाओं के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
कब डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें?
यदि किसी महिला को—
लगातार तीन महीने या उससे अधिक समय तक पीरियड्स न आएं,
बार-बार मासिक धर्म अनियमित हो,
कम उम्र में गर्भधारण में कठिनाई हो,
बार-बार हॉट फ्लैशेज हों,
या हार्मोनल बदलाव के अन्य लक्षण दिखाई दें,
तो बिना देरी किए स्त्री रोग विशेषज्ञ या फर्टिलिटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।
कम उम्र की महिलाओं में प्रीमैच्योर ओवेरियन फेल्योर के बढ़ते मामले एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनते जा रहे हैं। यह समस्या केवल गर्भधारण की क्षमता को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि हार्मोनल संतुलन, हड्डियों की मजबूती, मानसिक स्वास्थ्य और दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान, नियमित स्वास्थ्य जांच और चिकित्सकीय सलाह के माध्यम से इस स्थिति का बेहतर प्रबंधन किया जा सकता है। यदि मासिक धर्म में किसी भी प्रकार का असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो उसे सामान्य मानकर नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।

कोई टिप्पणी नहीं