बारिश में हो रहा है वायरल या फिर लौट आया कोरोना? ये 5 संकेत बता सकते हैं बड़ा फर्क, गलती पड़ सकती है भारी
बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं यह कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। वातावरण में नमी बढ़ने, जलभराव और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण इस मौसम में बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। यही वजह है कि मानसून को अक्सर बीमारियों का मौसम भी कहा जाता है।
इस दौरान सर्दी, जुकाम, बुखार, गले में संक्रमण, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया जैसी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। अब इसी बीच देश के कुछ राज्यों में कोविड-19 के नए मामलों के सामने आने से लोगों की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। आंध्र प्रदेश, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में कोविड संक्रमण के मामले दर्ज होने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सतर्क हो गया है और कई जगह लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
ऐसे में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कोविड-19 और सामान्य वायरल बुखार के शुरुआती लक्षण काफी हद तक एक जैसे दिखाई देते हैं। यही कारण है कि कई लोग कोरोना संक्रमण को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और संक्रमण दूसरों तक भी फैल सकता है।
कोविड के नए वेरिएंट में बदले हैं लक्षण
यथार्थ अस्पताल, आगरा के सलाहकार पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. ऋषि यादव के अनुसार, कोविड-19 के नए वेरिएंट पहले की तुलना में अपेक्षाकृत हल्के हो सकते हैं, लेकिन इनके लक्षणों में कुछ बदलाव देखने को मिले हैं। संक्रमण होने पर कई मरीजों में गले में तेज दर्द, लगातार खांसी, बुखार, नाक बंद होना, शरीर और मांसपेशियों में दर्द तथा अत्यधिक थकान महसूस होती है।
कुछ मरीजों में पेट से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। मतली, उल्टी, दस्त या पेट खराब होने जैसी शिकायतें भी नए वेरिएंट के दौरान देखने को मिल सकती हैं। हालांकि सभी मरीजों में एक जैसे लक्षण नहीं होते, इसलिए किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
वायरल बुखार और कोविड में क्यों होता है भ्रम?
बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण बहुत सामान्य होता है। वायरल बुखार होने पर भी मरीज को बुखार, गले में खराश, खांसी, नाक बहना, सिरदर्द, शरीर दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है।
यही लक्षण कोविड-19 में भी दिखाई देते हैं। इस वजह से दोनों बीमारियों के बीच अंतर करना आम लोगों के लिए आसान नहीं होता।
अक्सर लोग मेडिकल स्टोर से दवा लेकर घर पर ही इलाज शुरू कर देते हैं। कई मामलों में मरीज बिना जांच कराए ही सामान्य वायरल मान लेते हैं, जबकि वास्तव में उन्हें कोविड संक्रमण हो सकता है। इससे परिवार के अन्य सदस्यों तक भी संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बुखार लगातार बना रहे, दवाओं के बावजूद आराम न मिले, सांस लेने में तकलीफ महसूस हो, स्वाद या गंध में बदलाव आए या कमजोरी तेजी से बढ़ने लगे तो इसे सामान्य वायरल मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
यदि हाल ही में किसी कोविड संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हों और उसके बाद ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना और कोविड जांच करवाना बेहतर विकल्प माना जाता है।
समय पर जांच होने से संक्रमण की पुष्टि जल्दी हो जाती है और आवश्यक उपचार भी समय रहते शुरू किया जा सकता है।
कोविड-19 के नए लक्षण कौन-कौन से हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार कोविड-19 के नए वेरिएंट में निम्न लक्षण देखने को मिल सकते हैं—
गले में तेज दर्द
लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी
हल्का या तेज बुखार
नाक बंद होना या बहना
मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
अत्यधिक थकान
सिरदर्द
स्वाद और गंध में बदलाव
सांस लेने में तकलीफ
मतली या उल्टी
दस्त या पेट खराब होना
इनमें से सभी लक्षण हर मरीज में दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। इसलिए लक्षणों की गंभीरता और अवधि पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
सामान्य वायरल बुखार कितने दिन में ठीक होता है?
डॉक्टरों के अनुसार सामान्य वायरल बुखार अधिकतर मामलों में तीन से पांच दिनों के भीतर ठीक होने लगता है। मरीज को पर्याप्त आराम, पौष्टिक भोजन और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने से तेजी से राहत मिलती है।
लेकिन यदि बुखार लंबे समय तक बना रहे, कमजोरी लगातार बढ़ती जाए या सांस लेने में परेशानी शुरू हो जाए, तो तुरंत चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।
बारिश में क्यों बढ़ जाती हैं बीमारियां?
मानसून के दौरान वातावरण में नमी अधिक होने से वायरस और बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन जाती हैं।
इसके अलावा बारिश के कारण कई जगह पानी जमा हो जाता है, जहां मच्छर तेजी से बढ़ते हैं। यही मच्छर डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं।
इस मौसम में कई लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है, जिससे संक्रमण जल्दी फैलता है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि निम्न में से कोई भी स्थिति हो तो देर नहीं करनी चाहिए—
लगातार 3–4 दिन तक तेज बुखार रहना
सांस लेने में कठिनाई होना
ऑक्सीजन स्तर कम महसूस होना
अत्यधिक कमजोरी
लगातार खांसी बढ़ना
स्वाद या गंध अचानक खत्म होना
बुजुर्ग, गर्भवती महिला या गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण दिखाई देना
ऐसी स्थिति में स्वयं दवा लेने की बजाय डॉक्टर की सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान कुछ सामान्य सावधानियां अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
हाथों को समय-समय पर साबुन से धोएं।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकें।
बीमार व्यक्ति से आवश्यक दूरी बनाए रखें।
भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
पर्याप्त नींद और आराम करें।
बुखार या खांसी होने पर दूसरों के संपर्क में आने से बचें।
डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक दवाएं न लें।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही भी नहीं करनी चाहिए। कोविड-19 के नए मामलों को देखते हुए सतर्क रहना बेहद जरूरी है। यदि बीमारी के लक्षण सामान्य वायरल जैसे लगें लेकिन वे लंबे समय तक बने रहें या लगातार गंभीर होते जाएं, तो जांच कराना ही समझदारी है।
बारिश के मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने के लिए पौष्टिक भोजन, पर्याप्त पानी, स्वच्छता और नियमित दिनचर्या का पालन करना बेहद जरूरी है। साथ ही डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों से बचने के लिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
मानसून का मौसम स्वास्थ्य के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इस समय वायरल संक्रमण और कोविड-19 के शुरुआती लक्षण काफी समान हो सकते हैं, इसलिए किसी भी बुखार या लगातार खांसी को हल्के में लेना ठीक नहीं है। यदि लक्षण सामान्य से अधिक समय तक बने रहें, सांस लेने में दिक्कत हो या स्वाद-गंध में बदलाव महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान, उचित उपचार और सावधानी ही संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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