जिसका इंतजार वर्षों से था, आखिर भारत ने कर दिखाया वो बड़ा कमाल!
नई दिल्ली। भारत को तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि सामने आई है। जिस सेमीकंडक्टर तकनीक को विकसित करने के लिए दुनिया के बड़े-बड़े देश अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं, उसी क्षेत्र में अब भारतीय विश्वविद्यालयों के छात्र भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। देश में पहली बार बड़ी संख्या में छात्रों द्वारा डिजाइन किए गए सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्माण मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लैबोरेटरी (SCL) में किया जा रहा है। यह उपलब्धि केवल शिक्षा जगत के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस पहल की जानकारी देते हुए कहा कि भारत वर्ष 2047 तक दुनिया की अग्रणी टेक्नोलॉजी सुपरपावर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके लिए सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर निर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है।
क्यों महत्वपूर्ण है सेमीकंडक्टर?
आज का आधुनिक जीवन पूरी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भर हो चुका है। स्मार्टफोन, लैपटॉप, कार, मेडिकल उपकरण, रक्षा प्रणाली, उपग्रह, बैंकिंग सिस्टम, इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और यहां तक कि घरेलू उपकरण भी सेमीकंडक्टर चिप्स के बिना काम नहीं कर सकते।
सेमीकंडक्टर को किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का "दिमाग" कहा जाता है। यदि चिप उपलब्ध न हो तो किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का निर्माण संभव नहीं है। यही कारण है कि दुनिया भर में चिप निर्माण को लेकर जबरदस्त प्रतिस्पर्धा चल रही है।
अब तक भारत अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता रहा है। लेकिन सरकार की नई रणनीति का उद्देश्य इस आयात पर निर्भरता को कम करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।
315 विश्वविद्यालयों में डिजाइन हो रही हैं चिप्स
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सरकार की पहल का सबसे सकारात्मक परिणाम यह है कि आज देश के 315 विश्वविद्यालयों में छात्र सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन कर रहे हैं।
सरकार ने इन संस्थानों को आधुनिक Electronic Design Automation (EDA) टूल्स उपलब्ध कराए हैं ताकि छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक पर काम कर सकें।
इन चिप्स का निर्माण मोहाली स्थित Semiconductor Laboratory (SCL) में किया जा रहा है। इससे छात्रों को केवल सैद्धांतिक शिक्षा ही नहीं बल्कि डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और उत्पादन की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस मॉडल से आने वाले वर्षों में भारत को हजारों प्रशिक्षित सेमीकंडक्टर इंजीनियर मिलेंगे।
SCL मोहाली बना भारत की नई उम्मीद
मोहाली स्थित Semiconductor Laboratory (SCL) भारत के सबसे महत्वपूर्ण सेमीकंडक्टर अनुसंधान एवं निर्माण केंद्रों में से एक है।
सरकार ने इसे आधुनिक तकनीकों से लैस करने के लिए लगभग 4,500 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
28 नवंबर 2025 को केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने SCL का दौरा किया था। उसी दौरान विश्वविद्यालयों के छात्रों द्वारा डिजाइन किए गए चिप्स के निर्माण की प्रक्रिया की शुरुआत की गई।
मंत्री के अनुसार कुल 56 चिप्स पर निर्माण कार्य शुरू किया गया है, जिनमें से 28 चिप्स 17 अलग-अलग शिक्षण संस्थानों के छात्रों द्वारा डिजाइन किए गए हैं।
यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
'Chip to Startup' कार्यक्रम बना बदलाव का आधार
सरकार द्वारा शुरू किया गया Chip to Startup Program इस परिवर्तन का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को कॉलेज स्तर से ही सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया से जोड़ना है।
इसके तहत विद्यार्थियों को उद्योग स्तर के डिजाइन टूल्स, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन, परीक्षण सुविधाएं और वास्तविक निर्माण प्रक्रिया का अनुभव दिया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि यही छात्र भविष्य में भारत की चिप इंडस्ट्री की रीढ़ बनेंगे।
2047 तक टेक्नोलॉजी सुपरपावर बनने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—
सेमीकंडक्टर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
उन्होंने कहा कि भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था इन्हीं तकनीकों पर आधारित होगी। यदि भारत अभी से तैयारी करता है तो वह दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी जगह बना सकता है।
IIT हैदराबाद में शुरू होगा Data Trust पायलट प्रोजेक्ट
सरकार ने उद्योग और शिक्षा संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए एक और महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि IIT हैदराबाद में सेक्टर आधारित Data Trust का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया है।
इसका उद्देश्य स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और उद्योगों को सुरक्षित वातावरण में भारतीय डेटा उपलब्ध कराना है ताकि वे AI आधारित नई तकनीकों का विकास कर सकें।
विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में AI विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण डेटा सबसे बड़ी आवश्यकता होगी और Data Trust इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उद्योग और विश्वविद्यालय मिलकर तैयार करेंगे भविष्य
केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत से अपील की कि वे विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर शिक्षा प्रणाली को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाएं।
उन्होंने कहा कि केवल डिग्री देने से काम नहीं चलेगा बल्कि छात्रों को रोजगार और उद्योग के लिए तैयार करना होगा।
इसके लिए पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण और रिसर्च को उद्योग की मांग के अनुसार लगातार अपडेट करना जरूरी है।
यदि शिक्षा और उद्योग एक साथ काम करेंगे तो भारत वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
AI बदल रहा पूरी दुनिया का IT सेक्टर
बैठक के दौरान अश्विनी वैष्णव ने कहा कि Artificial Intelligence पूरी IT इंडस्ट्री का स्वरूप बदल रही है।
उन्होंने उद्योगों से आग्रह किया कि वे केवल विदेशी तकनीक पर निर्भर रहने के बजाय भारत में नई तकनीकों का विकास करें।
भारत के पास विशाल प्रतिभा, बड़ी युवा आबादी और तेजी से विकसित हो रहा डिजिटल इकोसिस्टम है। यदि इसका सही उपयोग किया जाए तो भारत आने वाले वर्षों में AI और सेमीकंडक्टर दोनों क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व स्थापित कर सकता है।
इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में भी रिकॉर्ड वृद्धि
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अब 13 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।
यह पिछले कुछ वर्षों में हुई सबसे तेज औद्योगिक वृद्धि में से एक मानी जा रही है।
भारत अब केवल घरेलू बाजार की जरूरतें पूरी नहीं कर रहा बल्कि वैश्विक निर्यात में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आज मोबाइल फोन भारत का सबसे बड़ा सिंगल एक्सपोर्ट प्रोडक्ट बन चुका है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स देश का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र बन गया है।
आत्मनिर्भर भारत अभियान को मिलेगा नया बल
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भर हो जाता है तो इससे केवल आयात में कमी नहीं आएगी बल्कि लाखों नए रोजगार भी पैदा होंगे।
इसके साथ ही रक्षा, अंतरिक्ष, दूरसंचार, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
घरेलू चिप निर्माण से विदेशी आपूर्ति पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक संकट के समय भी भारत अपनी तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम रहेगा।
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब केवल सरकारी योजना नहीं बल्कि राष्ट्रीय तकनीकी आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। 315 विश्वविद्यालयों में चिप डिजाइन, छात्रों द्वारा तैयार किए गए सेमीकंडक्टर का SCL मोहाली में निर्माण, 4,500 करोड़ रुपये का निवेश, AI और Data Trust जैसी पहलें यह संकेत देती हैं कि भारत भविष्य की तकनीकी दौड़ में पीछे नहीं रहना चाहता। यदि यही गति बनी रही तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल चिप आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में एक मजबूत और भरोसेमंद खिलाड़ी के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित कर सकता है।

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