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टॉयलेट में दिखा खून तो भूलकर भी न करें नजरअंदाज! यह सिर्फ बवासीर नहीं, गंभीर बीमारी का भी हो सकता है संकेत



नई दिल्ली। टॉयलेट के दौरान खून आना एक ऐसा लक्षण है जिसे कई लोग शर्म, डर या लापरवाही की वजह से नजरअंदाज कर देते हैं। अधिकांश लोग इसे सीधे बवासीर (पाइल्स) मानकर घरेलू नुस्खों या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का सहारा लेने लगते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार मल के साथ खून आना केवल बवासीर का संकेत नहीं होता। कई मामलों में यह फिशर, आंतों की सूजन, संक्रमण या यहां तक कि कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

यही वजह है कि यदि यह समस्या बार-बार हो रही है या इसके साथ दर्द, वजन कम होना, लगातार कब्ज या कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर पहचान होने से अधिकांश बीमारियों का इलाज आसान हो सकता है।

आखिर बवासीर क्या होती है?

बवासीर एक ऐसी स्थिति है जिसमें गुदा (एनस) या मलाशय (रेक्टम) के आसपास की नसें सूज जाती हैं। यह अंदरूनी (Internal Hemorrhoids) या बाहरी (External Hemorrhoids) दोनों प्रकार की हो सकती है।

जब सूजी हुई नसों पर अधिक दबाव पड़ता है तो मल त्याग के दौरान खून निकल सकता है। कई बार यह खून चमकीले लाल रंग का होता है और टॉयलेट पेपर या कमोड में दिखाई देता है।

किन कारणों से होती है बवासीर?

विशेषज्ञों के अनुसार बवासीर होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • लंबे समय तक कब्ज रहना

  • मल त्याग के दौरान अधिक जोर लगाना

  • घंटों तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहना

  • कम फाइबर वाला भोजन

  • पर्याप्त पानी न पीना

  • मोटापा

  • गर्भावस्था

  • लंबे समय तक बैठे रहने वाली जीवनशैली

  • नियमित शारीरिक गतिविधि की कमी

इन कारणों से गुदा की नसों पर दबाव बढ़ता है और धीरे-धीरे बवासीर विकसित हो सकती है।

शुरुआती लक्षण जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं

बवासीर की शुरुआत में लक्षण हल्के हो सकते हैं, इसलिए कई लोग इन्हें सामान्य समस्या समझकर टाल देते हैं।

इन लक्षणों में शामिल हैं—

  • मल त्याग के दौरान खून आना

  • गुदा के आसपास खुजली

  • जलन या दर्द

  • बैठने में असहजता

  • गुदा के पास सूजन या गांठ महसूस होना

  • मल त्याग के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास

  • बार-बार टॉयलेट जाने की इच्छा

यदि ये लक्षण लगातार बने रहें तो चिकित्सा सलाह लेना आवश्यक है।

हर बार खून आए तो सिर्फ बवासीर नहीं मानें

डॉक्टरों का कहना है कि मल के साथ खून आने के कई कारण हो सकते हैं।

इनमें शामिल हैं—

  • एनल फिशर (गुदा में दरार)

  • इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD)

  • आंतों में संक्रमण

  • डाइवर्टीकुलर डिजीज

  • पॉलिप्स

  • कोलोरेक्टल कैंसर

इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद ही बवासीर मान लेना सही नहीं है। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

यदि निम्न स्थितियां हों तो देर नहीं करनी चाहिए—

  • बार-बार खून आना

  • खून की मात्रा अधिक होना

  • तेज दर्द या सूजन

  • लगातार कब्ज या दस्त

  • तेजी से वजन घटना

  • अत्यधिक कमजोरी या चक्कर आना

  • परिवार में आंतों के कैंसर का इतिहास

ऐसे मामलों में डॉक्टर आवश्यक जांच जैसे शारीरिक परीक्षण, रक्त जांच या जरूरत पड़ने पर एंडोस्कोपी/कोलोनोस्कोपी की सलाह दे सकते हैं।

क्या बिना ऑपरेशन के इलाज संभव है?

शुरुआती अवस्था की बवासीर का इलाज अक्सर जीवनशैली में बदलाव और दवाओं से किया जा सकता है।

डॉक्टर निम्न उपायों की सलाह दे सकते हैं—

  • फाइबर युक्त भोजन बढ़ाना

  • प्रतिदिन पर्याप्त पानी पीना

  • नियमित व्यायाम

  • कब्ज से बचना

  • जरूरत पड़ने पर दवाएं या मलहम

  • गर्म पानी से बैठकर सिकाई (सिट्ज बाथ)

यदि बवासीर गंभीर हो जाए या बार-बार खून आए तो लेजर उपचार, रबर बैंड लिगेशन या सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। उपचार का चुनाव रोग की अवस्था और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।

खानपान में क्या बदलाव करें?

विशेषज्ञ बवासीर से बचाव और राहत के लिए संतुलित आहार की सलाह देते हैं।

फायदेमंद चीजें—

  • हरी पत्तेदार सब्जियां

  • फल

  • साबुत अनाज

  • दालें

  • सलाद

  • पर्याप्त पानी

सीमित मात्रा में लें—

  • अत्यधिक तला-भुना भोजन

  • बहुत अधिक मसालेदार भोजन (यदि इससे लक्षण बढ़ते हों)

  • प्रोसेस्ड फूड

  • कम फाइबर वाला आहार

क्या बवासीर से बचा जा सकता है?

अधिकांश मामलों में स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बवासीर का खतरा कम किया जा सकता है।

इसके लिए—

  • कब्ज न होने दें।

  • मल त्याग की इच्छा को न रोकें।

  • टॉयलेट पर मोबाइल लेकर लंबे समय तक न बैठें।

  • रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें।

  • पर्याप्त पानी और फाइबर लें।

  • वजन को नियंत्रित रखें।

बवासीर एक आम लेकिन असुविधाजनक समस्या है, जिसका समय रहते इलाज संभव है। हालांकि, मल के साथ खून आना हमेशा बवासीर का संकेत नहीं होता। यह कई अन्य बीमारियों का लक्षण भी हो सकता है। इसलिए बार-बार खून आना, तेज दर्द, वजन घटना या लंबे समय तक समस्या बने रहने पर स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित कदम है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। यह किसी डॉक्टर की सलाह, जांच या उपचार का विकल्प नहीं है। यदि आपको ऐसे लक्षण हैं, तो योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

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