अगर अभी नहीं चेते तो देर हो सकती है! WHO ने कैंसर को लेकर जारी की ऐसी चेतावनी, जिसने पूरी दुनिया की बढ़ा दी चिंता
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कैंसर को लेकर एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है। संगठन का कहना है कि यदि दुनिया भर के देश अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाते, तो वर्ष 2050 तक कैंसर के नए मामलों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। WHO के अनुसार, बदलती जीवनशैली, बढ़ता प्रदूषण, तंबाकू और शराब का सेवन, मोटापा तथा समय पर जांच की कमी जैसे कई कारण कैंसर के मामलों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर आज केवल विकसित देशों की समस्या नहीं रह गया है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, शुरुआती पहचान और समय पर इलाज सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकते हैं।
क्या कहती है WHO की रिपोर्ट?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, यदि वर्तमान रुझान जारी रहे तो वर्ष 2050 तक दुनिया भर में कैंसर के नए मामलों की संख्या लगभग दोगुनी होने की आशंका है। इसके साथ ही कैंसर से होने वाली मौतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
WHO ने सभी देशों से अपील की है कि वे कैंसर की रोकथाम, स्क्रीनिंग, शुरुआती पहचान, टीकाकरण और आधुनिक उपचार सुविधाओं को मजबूत करें। संगठन का कहना है कि यदि सरकारें और स्वास्थ्य संस्थान मिलकर काम करें, तो बड़ी संख्या में कैंसर के मामलों को रोका जा सकता है या शुरुआती चरण में पहचान कर सफल इलाज संभव हो सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह चेतावनी?
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में स्तन कैंसर, मुंह का कैंसर, फेफड़ों का कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर और बड़ी आंत (कोलोरेक्टल) कैंसर के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
भारत में बड़ी आबादी होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले से ही दबाव रहता है। यदि आने वाले वर्षों में कैंसर के मामलों में तेजी आती है, तो अस्पतालों, डॉक्टरों और उपचार व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
कैंसर क्यों बढ़ रहा है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें प्रमुख हैं—
तंबाकू और धूम्रपान का सेवन
शराब का अत्यधिक उपयोग
असंतुलित और प्रोसेस्ड भोजन
मोटापा
नियमित व्यायाम की कमी
वायु प्रदूषण
बढ़ती उम्र
कुछ संक्रमण और आनुवंशिक कारण
हालांकि हर कैंसर का कारण समान नहीं होता और कई मामलों में बीमारी के पीछे एक से अधिक कारण भी हो सकते हैं।
कौन-कौन से कैंसर सबसे अधिक देखने को मिल रहे हैं?
भारत में विशेषज्ञों के अनुसार निम्न प्रकार के कैंसर अपेक्षाकृत अधिक पाए जाते हैं—
1. स्तन कैंसर
महिलाओं में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में स्तन कैंसर प्रमुख है। समय पर जांच और शुरुआती पहचान से उपचार की सफलता की संभावना बढ़ सकती है।
2. मुंह का कैंसर
तंबाकू, गुटखा और पान मसाला खाने वालों में मुंह के कैंसर का जोखिम अधिक माना जाता है।
3. फेफड़ों का कैंसर
धूम्रपान इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। हालांकि गैर-धूम्रपान करने वालों में भी अन्य कारणों से यह बीमारी हो सकती है।
4. सर्वाइकल कैंसर
महिलाओं में होने वाले इस कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीन और नियमित स्क्रीनिंग महत्वपूर्ण मानी जाती है।
5. कोलोरेक्टल कैंसर
बदलती खानपान की आदतों और जीवनशैली के कारण इसके मामलों में भी वृद्धि देखी जा रही है।
क्या कैंसर से बचाव संभव है?
विशेषज्ञों का कहना है कि सभी प्रकार के कैंसर को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन कई मामलों में जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
इसके लिए निम्न उपाय अपनाए जा सकते हैं—
तंबाकू और धूम्रपान से दूरी बनाएं।
शराब का सेवन सीमित करें या न करें।
संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
नियमित व्यायाम करें।
स्वस्थ वजन बनाए रखें।
हेपेटाइटिस-बी और HPV जैसे उपलब्ध टीकों के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं।
शुरुआती पहचान क्यों है जरूरी?
डॉक्टरों का कहना है कि यदि कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो कई मामलों में इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है।
इसलिए शरीर में लंबे समय तक बने रहने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इन लक्षणों में शामिल हो सकते हैं—
बिना कारण वजन कम होना
लगातार खांसी या आवाज बैठना
लंबे समय तक रहने वाला घाव
शरीर के किसी हिस्से में गांठ महसूस होना
असामान्य रक्तस्राव
निगलने में लगातार कठिनाई
हालांकि इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन ऐसे मामलों में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
WHO ने क्या सुझाव दिए हैं?
WHO ने देशों से कहा है कि—
कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए।
लोगों को जागरूक किया जाए।
प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाया जाए।
कैंसर के इलाज तक सभी की पहुंच आसान बनाई जाए।
तंबाकू नियंत्रण कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
विशेषज्ञों की सलाह
ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) का कहना है कि कैंसर को लेकर डरने की बजाय जागरूक होना अधिक जरूरी है।
आज आधुनिक चिकित्सा में कई प्रकार के कैंसर का सफल इलाज संभव है, विशेषकर तब जब बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए।
विशेषज्ञ लोगों से सोशल मीडिया पर मिलने वाली अपुष्ट जानकारी के बजाय डॉक्टरों और विश्वसनीय स्वास्थ्य संस्थानों की सलाह पर भरोसा करने की अपील भी कर रहे हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की यह चेतावनी पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है। यदि अभी से कैंसर की रोकथाम, समय पर जांच और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले वर्षों में यह चुनौती और गंभीर हो सकती है। अच्छी जीवनशैली अपनाना, तंबाकू से दूरी, नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना कैंसर के जोखिम को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

कोई टिप्पणी नहीं