Breaking News

46 दिन तक बाथरूम के फर्श के नीचे दफन रहा पति... पत्नी रोज उसी जगह नहाती रही, फिर ऐसे खुला खौफनाक राज

 


आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। पुलिस के अनुसार एक महिला पर अपने पति की कथित हत्या करने और उसके शव को घर के बाथरूम के फर्श के नीचे दफनाने का आरोप है। मामले का खुलासा तब हुआ जब पति के लापता होने के करीब 46 दिन बाद पुलिस जांच एक नए मोड़ पर पहुंची। फिलहाल पुलिस ने आरोपी पत्नी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है।

जांच अधिकारियों का कहना है कि अभी कई महत्वपूर्ण तथ्य जुटाए जा रहे हैं। पुलिस डिजिटल साक्ष्य, कॉल डिटेल, मोबाइल की सर्च हिस्ट्री और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करने में जुटी है।

46 दिन तक लापता बताया गया पति

पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान सुरेंद्र कुमार शर्मा के रूप में हुई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक उनकी पत्नी ने पुलिस को बताया था कि उनके पति कई दिनों से लापता हैं।

लापता होने की सूचना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की थी, लेकिन शुरुआत में कोई ठोस सुराग नहीं मिला। इस दौरान परिवार और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की गई।

करीब डेढ़ महीने तक मामला गुमशुदगी के रूप में ही चलता रहा, लेकिन बाद में जांच का रुख पूरी तरह बदल गया।

पुलिस सत्यापन के दौरान बढ़ा शक

जांच में सामने आया कि हाल ही में सिकंदरा थाना पुलिस एक पुराने मामले के सिलसिले में सुरेंद्र कुमार शर्मा के घर पहुंची थी।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2017 में उनके खिलाफ ट्रक चोरी का एक मामला दर्ज हुआ था, जिसके संबंध में पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया चल रही थी।

जब पुलिस घर पहुंची तो वहां उनकी पत्नी रूबी मिली। पुलिस ने पति के बारे में जानकारी मांगी तो उसने बताया कि वे कई दिनों से घर से गायब हैं।

पुलिस ने सामान्य प्रक्रिया के तहत महिला की फोटो और अन्य जानकारी दर्ज की। इसी दौरान कथित रूप से महिला घबरा गई और उसने अपने जेठ को घर बुलाया।

परिवार के सामने कथित स्वीकारोक्ति का दावा

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार महिला के जेठ पहले से कुछ पारिवारिक विवादों को लेकर नाराज बताए जा रहे थे।

बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान उन्होंने महिला से शांतिपूर्वक पूरे मामले की जानकारी पूछी।

इसी दौरान कथित रूप से महिला ने अपने पति की हत्या करने की बात स्वीकार की।

हालांकि पुलिस इस कथित स्वीकारोक्ति की पुष्टि अन्य साक्ष्यों के आधार पर कर रही है। केवल कथित बयान के आधार पर मामले को अंतिम रूप नहीं दिया गया है।

खीर में नींद की गोलियां मिलाने का आरोप

पुलिस जांच में यह आरोप सामने आया है कि महिला ने कथित रूप से पति को खीर में नींद की गोलियां मिलाकर खिलाईं।

आरोप है कि जब पति बेहोश हो गया तो उसकी हत्या कर दी गई।

हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और रासायनिक विश्लेषण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मृत्यु का वास्तविक कारण क्या था और क्या वास्तव में किसी नशीले पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था।

बाथरूम के फर्श में दफनाया गया शव

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह बताया जा रहा है कि हत्या के बाद शव को घर के बाथरूम में दफना दिया गया।

पुलिस के अनुसार आरोपी महिला ने कथित रूप से बाथरूम का फर्श तुड़वाकर शव को वहां दबाया और बाद में नया फर्श बनवा दिया।

जब पुलिस ने घर की जांच की तो बाथरूम का फर्श खुदवाया गया, जहां से शव बरामद होने की बात सामने आई।

शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और अन्य फॉरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा गया है।

पुलिस कर रही है फॉरेंसिक जांच

जांच अधिकारी इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से देख रहे हैं।

घटनास्थल से मिट्टी, निर्माण सामग्री, खून के संभावित नमूने तथा अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए गए हैं।

फॉरेंसिक विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि हत्या कब हुई, शव कितने समय तक फर्श के नीचे रहा और क्या घटनास्थल पर किसी प्रकार के बदलाव किए गए थे।

मोबाइल फोन और गूगल सर्च हिस्ट्री भी जांच के दायरे में

पुलिस ने आरोपी महिला का मोबाइल फोन भी जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है।

जांच एजेंसियां मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट, इंटरनेट गतिविधि और गूगल सर्च हिस्ट्री का विश्लेषण कर रही हैं।

पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले इंटरनेट पर क्या खोजा गया था और क्या किसी प्रकार की योजना बनाने के संकेत डिजिटल रिकॉर्ड में मौजूद हैं।

यदि जांच में कोई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिलता है तो उसे अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा।

बेटियों और परिवार से भी पूछताछ

मामले की जांच केवल आरोपी महिला तक सीमित नहीं है।

पुलिस परिवार के अन्य सदस्यों, पड़ोसियों और मृतक की बेटियों से भी बातचीत कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि बच्चों से संवेदनशील तरीके से जानकारी ली जा रही है ताकि यह समझा जा सके कि घर में क्या परिस्थितियां थीं और क्या उन्हें किसी असामान्य गतिविधि का कभी संदेह हुआ था।

'दृश्यम' फिल्म को लेकर भी पूछे गए सवाल

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी महिला से यह भी पूछा कि क्या उसने फिल्म दृश्यम देखी थी।

सूत्रों के अनुसार महिला ने बताया कि उसने यह फिल्म काफी पहले देखी थी।

हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी फिल्म का उल्लेख केवल पूछताछ का हिस्सा है और इससे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता।

जांच का आधार केवल उपलब्ध साक्ष्य और वैज्ञानिक प्रमाण होंगे।

क्या महिला अकेले कर सकती थी यह सब?

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पूरे घटनाक्रम को अकेले अंजाम दिया जा सकता था।

जांच अधिकारियों का कहना है कि हत्या के बाद शव को बाथरूम के फर्श के नीचे दबाना, निर्माण कार्य कराना और पूरे मामले को लंबे समय तक छिपाकर रखना आसान नहीं माना जा सकता।

इसी कारण पुलिस इस संभावना की भी जांच कर रही है कि कहीं इस घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी।

हालांकि अभी तक किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

हत्या की साजिश की आशंका

पुलिस का प्रारंभिक अनुमान है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह घटना पूर्व नियोजित हो सकती है।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या घटना से पहले परिवार के अन्य सदस्यों को किसी बहाने घर से बाहर भेजा गया था और क्या यह पूरी योजना पहले से तैयार की गई थी।

इन सभी सवालों के जवाब पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर तलाश रही है।

अदालत में पेश होंगे वैज्ञानिक साक्ष्य

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में केवल कथित स्वीकारोक्ति पर्याप्त नहीं होती।

हत्या के आरोप को सिद्ध करने के लिए पुलिस को मजबूत वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे, जिनमें शामिल हैं—

  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट

  • फॉरेंसिक जांच

  • मोबाइल डेटा

  • कॉल रिकॉर्ड

  • डिजिटल सर्च हिस्ट्री

  • गवाहों के बयान

  • घटनास्थल से बरामद साक्ष्य

इन्हीं के आधार पर अदालत पूरे मामले पर निर्णय करेगी।

आगरा का यह मामला अपनी प्रकृति और जांच के दौरान सामने आ रहे तथ्यों के कारण बेहद चर्चित बन गया है। पुलिस का दावा है कि जांच तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन अभी कई महत्वपूर्ण रिपोर्ट आना बाकी हैं। मोबाइल डेटा, फॉरेंसिक विश्लेषण और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्य इस मामले की असली तस्वीर सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। कानून के अनुसार, जब तक अदालत किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं करती, तब तक वह आरोपी माना जाता है, दोषी नहीं। ऐसे में पूरे मामले पर अंतिम निर्णय अदालत और जांच एजेंसियों द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही होगा।

कोई टिप्पणी नहीं