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क्या मोसाद के गढ़ में घुस गया ईरान? इजरायल में 'स्लीपर नेटवर्क' के दावे से मचा हड़कंप, खुफिया एजेंसियां अलर्ट

 


तेल अवीव: दुनिया की सबसे ताकतवर और खतरनाक खुफिया एजेंसियों में गिनी जाने वाली इजरायल की मोसाद (Mossad) को लंबे समय से गुप्त अभियानों, दुश्मन देशों में जासूसी नेटवर्क खड़ा करने और हाई-प्रोफाइल ऑपरेशनों के लिए जाना जाता है। लेकिन अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के भीतर ईरान के लिए काम करने वाले संदिग्ध जासूसी नेटवर्क का दायरा पहले की तुलना में काफी बड़ा हो सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्कों के जरिए इजरायली नागरिकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है और कुछ मामलों में नागरिकों पर ईरान के लिए जासूसी करने के आरोप भी लगे हैं।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और आरोपित मामलों पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है, लेकिन रिपोर्ट ने इजरायल की आंतरिक सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

मोसाद के लिए नई चुनौती?

मोसाद को वर्षों से दुनिया की सबसे प्रभावी विदेशी खुफिया एजेंसियों में माना जाता है। उसके कई ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे हैं। ऐसे में यदि किसी प्रतिद्वंद्वी देश का नेटवर्क इजरायल के भीतर सक्रिय होने में सफल होता है, तो इसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती माना जाता है।

इजरायली सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हाल के वर्षों में ईरान ने पारंपरिक जासूसी के बजाय डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचने की रणनीति अपनाई है।

किस समुदाय का नाम आया सामने?

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मामलों में हरेदी (Haredi) यहूदी समुदाय से जुड़े व्यक्तियों पर ईरान के लिए काम करने के आरोप लगाए गए हैं। यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि ऐसे आरोप पूरे समुदाय पर नहीं, बल्कि कुछ व्यक्तिगत मामलों पर आधारित हैं।

हरेदी समुदाय इजरायल का एक अत्यंत धार्मिक यहूदी समुदाय माना जाता है। इसकी आबादी लगभग 14 लाख बताई जाती है। यह समुदाय धार्मिक परंपराओं का कड़ाई से पालन करता है और जीवनशैली के कई मामलों में आधुनिक समाज से अलग पहचान रखता है।

शबात (Sabbath) के दौरान समुदाय के कई सदस्य मोबाइल फोन, कंप्यूटर, टेलीविजन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग नहीं करते। साथ ही धार्मिक शिक्षा को प्राथमिकता देने के कारण समुदाय के कुछ लोगों की आर्थिक स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है।

क्यों बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चिंता?

इजरायली सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से विदेशी एजेंसियों द्वारा लोगों तक पहुंचने की घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 के दौरान ईरान के लिए कथित जासूसी के आरोपों में कई इजरायली नागरिकों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए। कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि पिछले वर्ष की तुलना में ऐसे मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

हालांकि इन मामलों में अंतिम कानूनी निर्णय संबंधित अदालतों द्वारा ही लिया जाएगा।

सोशल मीडिया कैसे बन रहा है हथियार?

जांच एजेंसियों के अनुसार, कथित ईरानी नेटवर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे—

  • फेसबुक

  • इंस्टाग्राम

  • एक्स (पूर्व ट्विटर)

पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों से संपर्क स्थापित करता है।

शुरुआत में खुद को पत्रकार, शोधकर्ता, कारोबारी या किसी मीडिया संगठन का सदस्य बताया जाता है। धीरे-धीरे बातचीत बढ़ने पर संपर्क को अधिक सुरक्षित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म जैसे टेलीग्राम पर स्थानांतरित किया जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका दुनिया भर में कई साइबर जासूसी नेटवर्क अपनाते रहे हैं।

कैसे फंसाए जाते हैं लोग?

रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में लोगों को बेहद छोटे और सामान्य कार्य दिए जाते हैं।

जैसे—

  • किसी सार्वजनिक स्थान की तस्वीर लेना।

  • किसी इमारत का वीडियो बनाना।

  • किसी सड़क या इलाके की जानकारी देना।

इन कार्यों के बदले उन्हें छोटी रकम दी जाती है ताकि भरोसा बनाया जा सके।

यदि व्यक्ति लगातार संपर्क में रहता है, तो धीरे-धीरे उससे अधिक संवेदनशील जानकारी जुटाने की कोशिश की जाती है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भुगतान के लिए पेपाल और क्रिप्टोकरेंसी जैसे डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी किया गया।

आयरन डोम से जुड़ी जानकारी का दावा

मीडिया रिपोर्टों में एक ऐसे आरोपी का भी उल्लेख किया गया है, जिसने कथित रूप से पहले इजरायली सेना की आयरन डोम प्रणाली से जुड़े विभाग में काम किया था।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि उसने कथित रूप से सैन्य प्रतिष्ठानों, रडार प्रणाली और रक्षा तैनाती से जुड़ी जानकारी साझा की।

हालांकि इन आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय में चल रही प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

पूर्व मंत्री का नाम भी चर्चा में

रिपोर्ट में इजरायल के पूर्व ऊर्जा मंत्री गोनन सेगेव का भी उल्लेख किया गया है।

सेगेव पहले इजरायल की राजनीति का हिस्सा रहे थे। बाद में उन पर अलग-अलग मामलों में कार्रवाई हुई और जेल भी जाना पड़ा। रिहाई के बाद वे विदेश में रह रहे थे।

इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों ने अतीत में उन पर ईरानी अधिकारियों के साथ संपर्क रखने और संवेदनशील जानकारी साझा करने के आरोप लगाए थे। यह मामला उस समय इजरायल की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में काफी चर्चा का विषय बना था।

क्या आर्थिक तंगी भी बन रही है कारण?

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ मामलों में आर्थिक समस्याएं भी लोगों को विदेशी नेटवर्क के संपर्क में आने के लिए प्रेरित कर सकती हैं।

हरेदी समुदाय के कुछ हिस्सों में धार्मिक शिक्षा को प्राथमिकता मिलने के कारण आधुनिक रोजगार के अवसर सीमित बताए जाते हैं। इससे कुछ परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हैं।

हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि आर्थिक कठिनाई किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि का औचित्य नहीं बन सकती और ऐसे मामलों में प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाती है।

सरकार ने क्या कदम उठाए?

रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली सरकार और सुरक्षा एजेंसियां अब केवल तकनीकी निगरानी पर ही निर्भर नहीं रहना चाहतीं।

वे धार्मिक नेताओं और सामुदायिक प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद कर रही हैं ताकि लोगों को विदेशी एजेंसियों के संभावित जाल से सावधान किया जा सके।

साथ ही सोशल मीडिया पर संदिग्ध संपर्कों की पहचान करने और साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों की राय

राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक जासूसी अब केवल पारंपरिक एजेंटों तक सीमित नहीं रही।

आज सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप, डिजिटल भुगतान और साइबर तकनीक ने जासूसी के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है।

ऐसी स्थिति में केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा, डिजिटल जागरूकता और नागरिकों की सतर्कता भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावों ने इजरायल की आंतरिक सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान सोशल मीडिया और स्थानीय संपर्कों के जरिए कथित जासूसी नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहा है, जबकि इजरायली सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं। हालांकि इन मामलों में कई आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष अदालतों तथा आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आएंगे। इसके बावजूद यह घटनाक्रम इस बात का संकेत जरूर देता है कि आधुनिक दौर में जासूसी की लड़ाई अब सीमाओं से निकलकर डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है।

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