डॉक्टरों ने बताए ऐसे संकेत जिन्हें लोग अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं... बाद में पता चलती है डायबिटीज़!
डायबिटीज़ (मधुमेह) आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। भारत को लंबे समय से "डायबिटीज़ कैपिटल" कहे जाने की चर्चा होती रही है, क्योंकि यहां इस बीमारी से प्रभावित लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड शुगर सामान्य स्तर से ऊपर जा चुका है। ऐसे में बीमारी धीरे-धीरे शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करना शुरू कर देती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए और जीवनशैली में आवश्यक बदलाव किए जाएं, तो कई मामलों में डायबिटीज़ को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।
क्या है डायबिटीज़?
डायबिटीज़ एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर या तो पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता। इसके कारण रक्त में ग्लूकोज़ (शुगर) का स्तर बढ़ने लगता है।
लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर रहने पर हृदय, किडनी, आंखों, नसों और रक्त वाहिकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
शरीर के ये 7 संकेत हो सकते हैं चेतावनी
1. बार-बार प्यास लगना
यदि बिना किसी विशेष कारण के बार-बार प्यास लग रही है और पानी पीने के बाद भी राहत नहीं मिल रही, तो यह बढ़े हुए ब्लड शुगर का संकेत हो सकता है।
2. बार-बार पेशाब आना
रक्त में शुगर का स्तर बढ़ने पर शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज़ को पेशाब के माध्यम से बाहर निकालने की कोशिश करता है। इसके कारण सामान्य से अधिक बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है।
3. लगातार थकान महसूस होना
पर्याप्त नींद लेने के बावजूद यदि शरीर में कमजोरी और थकान बनी रहती है, तो इसका कारण यह हो सकता है कि शरीर ग्लूकोज़ का प्रभावी उपयोग नहीं कर पा रहा है।
4. अचानक वजन कम होना
बिना डाइटिंग या अधिक व्यायाम के वजन तेजी से कम होना भी कुछ लोगों में डायबिटीज़ का संकेत हो सकता है।
5. धुंधला दिखाई देना
उच्च ब्लड शुगर आंखों की लेंस प्रणाली को प्रभावित कर सकता है, जिससे कुछ समय के लिए धुंधला दिखाई देने की शिकायत हो सकती है।
6. घाव का देर से भरना
यदि छोटी चोट या घाव सामान्य से अधिक समय में ठीक हो रहे हैं, तो यह भी बढ़े हुए ब्लड शुगर से जुड़ा संकेत हो सकता है।
7. बार-बार संक्रमण होना
त्वचा, मसूड़ों या मूत्र मार्ग में बार-बार संक्रमण होना भी कुछ मामलों में डायबिटीज़ से जुड़ा हो सकता है।
किन लोगों को ज्यादा रहता है खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न परिस्थितियों में डायबिटीज़ का जोखिम बढ़ सकता है—
परिवार में पहले से डायबिटीज़ का इतिहास होना।
मोटापा या बढ़ता वजन।
शारीरिक गतिविधि की कमी।
असंतुलित खान-पान।
उच्च रक्तचाप।
बढ़ती उम्र।
लंबे समय तक तनाव।
हालांकि कम उम्र के लोगों में भी आजकल टाइप-2 डायबिटीज़ के मामले बढ़ रहे हैं।
समय पर जांच क्यों है जरूरी?
डॉक्टर सलाह देते हैं कि यदि किसी व्यक्ति में ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई दें या वह जोखिम वाले समूह में आता हो, तो ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए।
सामान्यतः डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार निम्न जांच लिख सकते हैं—
फास्टिंग ब्लड शुगर
पोस्टप्रांडियल (भोजन के बाद) ब्लड शुगर
HbA1c टेस्ट
इन जांचों के आधार पर चिकित्सक आगे की सलाह देते हैं।
क्या डायबिटीज़ को रोका जा सकता है?
टाइप-1 डायबिटीज़ को रोकना संभव नहीं माना जाता, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज़ के जोखिम को स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञ निम्न उपाय अपनाने की सलाह देते हैं—
संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
नियमित व्यायाम या तेज़ चाल से पैदल चलें।
वजन नियंत्रित रखें।
पर्याप्त नींद लें।
धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें।
डॉक्टर की सलाह के बिना दवा न लें
स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि सोशल मीडिया या इंटरनेट पर उपलब्ध घरेलू नुस्खों के आधार पर स्वयं दवा शुरू या बंद करना खतरनाक हो सकता है। यदि ब्लड शुगर बढ़ा हुआ मिले, तो योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
डायबिटीज़ एक ऐसी बीमारी है जो कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी विकसित हो सकती है। हालांकि बार-बार प्यास लगना, अधिक पेशाब आना, लगातार थकान, धुंधला दिखाई देना, घाव का देर से भरना और बार-बार संक्रमण जैसे संकेतों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच, संतुलित जीवनशैली और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार अपनाकर इस बीमारी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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