अब सिर्फ बारिश में नहीं, पूरे साल फैल रहा डेंगू! डॉक्टरों की बड़ी चेतावनी- बदलते मौसम ने बढ़ाया खतरा
नई दिल्ली: लंबे समय तक डेंगू को केवल मानसून और बारिश के मौसम से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा। आम धारणा थी कि बारिश शुरू होते ही मच्छरों की संख्या बढ़ती है और डेंगू के मामले सामने आने लगते हैं, जबकि सर्दियों तक इसका खतरा कम हो जाता है। लेकिन अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह धारणा तेजी से बदल रही है। भारत के कई शहरों में अब गर्मी, सर्दी और मानसून—तीनों मौसमों में डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं। बदलते मौसम, बढ़ते तापमान, अनियमित बारिश और शहरीकरण के कारण डेंगू अब सालभर का खतरा बनता जा रहा है।
डेंगू अब केवल मानसून की बीमारी नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार पहले डेंगू के मामले मुख्य रूप से जुलाई से नवंबर के बीच देखने को मिलते थे। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यह पैटर्न बदल गया है।
अब कई शहरों में मई-जून की गर्मियों से ही मरीज मिलने लगते हैं और कुछ स्थानों पर सर्दियों में भी संक्रमण पूरी तरह समाप्त नहीं होता। डॉक्टरों का मानना है कि तापमान में वृद्धि और बदलती जलवायु ने एडीज (Aedes) मच्छर के जीवित रहने और प्रजनन की अवधि बढ़ा दी है।
आखिर क्यों बढ़ रहा है खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई कारण बताते हैं—
जलवायु परिवर्तन
अनियमित वर्षा
लंबे समय तक गर्म मौसम
घरों और निर्माण स्थलों पर जमा पानी
तेज शहरीकरण
पानी संग्रह करने की बढ़ती प्रवृत्ति
इन परिस्थितियों में एडीज मच्छर को प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण मिल जाता है, जिससे पूरे वर्ष संक्रमण का खतरा बना रह सकता है।
एडीज मच्छर कब काटता है?
बहुत से लोग मानते हैं कि मच्छर केवल रात में काटते हैं, लेकिन डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय, विशेषकर सुबह और शाम के आसपास अधिक सक्रिय रहता है।
इसी कारण केवल रात में मच्छरदानी लगाने से डेंगू से पूरी सुरक्षा नहीं मिलती। दिन के समय भी बचाव करना जरूरी है।
शुरुआती लक्षण क्या हैं?
डेंगू के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे हो सकते हैं, जिससे कई लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं।
मुख्य लक्षण—
तेज बुखार
सिरदर्द
आंखों के पीछे दर्द
शरीर और जोड़ों में तेज दर्द
मांसपेशियों में दर्द
मतली या उल्टी
त्वचा पर लाल चकत्ते
अत्यधिक कमजोरी
यदि तेज बुखार के साथ ये लक्षण दिखाई दें तो स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
कब हो सकता है गंभीर?
अधिकांश मरीज उचित देखभाल से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
गंभीर डेंगू में—
प्लेटलेट्स तेजी से कम हो सकते हैं।
शरीर में रक्तस्राव हो सकता है।
ब्लड प्रेशर गिर सकता है।
लीवर और किडनी प्रभावित हो सकते हैं।
मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ सकती है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न लोगों में जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है—
छोटे बच्चे
बुजुर्ग
गर्भवती महिलाएं
डायबिटीज के मरीज
हृदय रोगी
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग
पहले डेंगू से संक्रमित रह चुके व्यक्ति
दोबारा होने वाला डेंगू कुछ मामलों में अधिक गंभीर हो सकता है, इसलिए ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
बचाव के लिए क्या करें?
डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों को पनपने से रोकना है।
इसके लिए—
घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
कूलर सप्ताह में कम से कम एक बार साफ करें।
पानी की टंकियों को ढककर रखें।
गमलों की प्लेटों में जमा पानी हटाएं।
पूरी बांह के कपड़े पहनें।
दिन में भी मच्छररोधी क्रीम या स्प्रे का उपयोग करें।
बच्चों को बाहर भेजते समय पूरी सुरक्षा रखें।
नगर निकाय भी हुए अलर्ट
देश के कई शहरों में मानसून के दौरान मच्छरों की संख्या बढ़ने के बाद नगर निकायों ने फॉगिंग, लार्वा नियंत्रण और जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों का सहयोग भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि अधिकांश एडीज मच्छर घरों और आसपास जमा साफ पानी में पनपते हैं।
क्या डेंगू का इलाज है?
डेंगू के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा उपलब्ध नहीं है।
इलाज मुख्य रूप से मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाता है, जिसमें—
पर्याप्त तरल पदार्थ
आराम
डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवाएं
जरूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती
शामिल हो सकते हैं।
बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि कुछ दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं।
डॉक्टरों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि अब डेंगू को केवल बारिश की बीमारी समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। बदलती जलवायु के कारण यह संक्रमण पूरे वर्ष देखने को मिल सकता है।
यदि दो दिन से अधिक तेज बुखार बना रहे, प्लेटलेट्स कम होने लगें या लगातार कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डेंगू अब केवल मानसून तक सीमित बीमारी नहीं रह गया है। बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और शहरी परिस्थितियों ने इसे सालभर का स्वास्थ्य खतरा बना दिया है। इसलिए बचाव के उपाय भी केवल बारिश के मौसम तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि पूरे वर्ष अपनाने की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि घर और आसपास साफ-सफाई, पानी जमा न होने देना और समय पर चिकित्सा सलाह लेना ही डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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