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'मुस्लिम बहुल राज्य होने के बाद भी हम हिन्दू...' कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज का विवादित बयान

 


जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किए जाने की मांग के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सोज ने अनुच्छेद 370 की बहाली और जम्मू-कश्मीर की आंतरिक स्वायत्तता की वकालत करते हुए कहा कि राज्य के लोगों को इसके लिए संघर्ष करना चाहिए। उनके इस बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया।

वहीं दूसरी ओर, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने राज्य का दर्जा बहाल करने की अपनी मांग को दोहराते हुए 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रखने की बात कही है।

सैफुद्दीन सोज ने क्या कहा?

श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को हमेशा के लिए केंद्र शासित प्रदेश नहीं बनाया जा सकता। उनके अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा केवल एक अस्थायी व्यवस्था है और राज्य का दर्जा बहाल होना चाहिए।

सोज ने कहा कि केवल राज्य का दर्जा ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका मुख्य मुद्दा जम्मू-कश्मीर की आंतरिक स्वायत्तता है। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करना चाहिए।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि नई पीढ़ी को यह याद रखना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर ने एक मुस्लिम बहुल राज्य होने के बावजूद भारत के साथ रहने का फैसला किया था। उनके अनुसार, यह फैसला सही था, लेकिन इसे उस समय की संवैधानिक व्यवस्थाओं और शर्तों के अनुरूप देखा जाना चाहिए।

अनुच्छेद 370 पर फिर शुरू हुई बहस

सैफुद्दीन सोज का यह बयान ऐसे समय आया है जब जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार उठ रही है। अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को निरस्त करते हुए जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख—में विभाजित कर दिया था।

इसके बाद से विभिन्न राजनीतिक दल समय-समय पर राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाते रहे हैं। हालांकि, अनुच्छेद 370 की बहाली का मुद्दा अभी भी राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना हुआ है।

बीजेपी का तीखा पलटवार

सैफुद्दीन सोज के बयान पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करना चाहती है।

उन्होंने दावा किया कि यदि कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह अनुच्छेद 370 की वापसी का प्रयास करेगी। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर आतंकवाद के प्रति नरम रुख अपनाने जैसे आरोप भी लगाए।

हालांकि, कांग्रेस की ओर से इस मुद्दे पर पार्टी की आधिकारिक नीति के संबंध में कोई नया बयान सामने नहीं आया है। सैफुद्दीन सोज का बयान उनका व्यक्तिगत राजनीतिक दृष्टिकोण माना जा रहा है।

राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर अडिग नेशनल कॉन्फ्रेंस

इस बीच जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर उनकी पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन के कार्यक्रम में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया जाएगा, भले ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और उनके चाचा शेख मुस्तफा कमाल का हाल ही में निधन हो गया हो।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनके चाचा स्वयं भी यही चाहते कि पार्टी अपने निर्धारित कार्यक्रम को जारी रखे और राज्य के दर्जे की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखे।

20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शन

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी का कहना है कि जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी उचित नहीं है।

पार्टी नेतृत्व का आरोप है कि विधानसभा चुनावों के बाद भी राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया गया, जबकि इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से कई बार आश्वासन दिया गया था।

एनसी का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने और जनता की आकांक्षाओं का सम्मान करने के लिए राज्य का दर्जा जल्द बहाल किया जाना चाहिए।

उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?

पत्रकारों से बातचीत में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उनके चाचा शेख मुस्तफा कमाल की तबीयत 11 जुलाई को गंभीर हो गई थी और डॉक्टरों ने पहले ही उनकी स्थिति के बारे में जानकारी दे दी थी।

उन्होंने बताया कि इसके बावजूद पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने निर्देश दिया था कि पार्टी का राजनीतिक कार्यक्रम किसी भी स्थिति में नहीं रोका जाएगा।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जब 12 जुलाई का जम्मू कार्यक्रम रद्द नहीं किया गया, तो 20 जुलाई को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को भी स्थगित करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।

राज्य का दर्जा बनाम अनुच्छेद 370

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में इस समय दो अलग-अलग मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं।

पहला मुद्दा पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का है, जिसकी मांग कई राजनीतिक दल कर रहे हैं।

दूसरा मुद्दा अनुच्छेद 370 की बहाली का है, जिस पर विभिन्न दलों के अलग-अलग रुख हैं। जहां कुछ नेता इसकी वापसी की मांग करते हैं, वहीं बीजेपी स्पष्ट रूप से इसके विरोध में है और इसे राष्ट्रीय एकता से जुड़ा मुद्दा मानती है।

आगे क्या?

20 जुलाई को दिल्ली में नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रदर्शन पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। वहीं सैफुद्दीन सोज के बयान के बाद अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक रुख स्पष्ट करती है या नहीं और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर केंद्र सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।

फिलहाल, जम्मू-कश्मीर की संवैधानिक स्थिति, राज्य का दर्जा और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दे एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं, जिन पर विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी विचारधारा के अनुरूप अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत कर रहे हैं।

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