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नासा से अलग चीन का बड़ा स्पेस मिशन! 2030 में एस्टेरॉयड से टकराएगा अंतरिक्ष यान, दुनिया की नजरें टिकीं

 


दुनिया की दो सबसे बड़ी अंतरिक्ष शक्तियों के बीच अब प्रतिस्पर्धा केवल चांद और मंगल तक सीमित नहीं रही है। अब नजरें उन खतरनाक क्षुद्रग्रहों (Asteroids) पर हैं, जो भविष्य में पृथ्वी के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। इसी दिशा में चीन ने एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है, जिसके तहत वर्ष 2030 में पृथ्वी के पास से गुजरने वाले एक क्षुद्रग्रह से जानबूझकर अंतरिक्ष यान टकराया जाएगा।

इस मिशन का उद्देश्य किसी ग्रह को नष्ट करना नहीं, बल्कि यह समझना है कि यदि भविष्य में कोई विशाल क्षुद्रग्रह पृथ्वी की ओर बढ़े तो उसे कैसे रोका जा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह मिशन मानव सभ्यता की सुरक्षा से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण अंतरिक्ष परियोजनाओं में से एक साबित हो सकता है।

हालांकि, यह मिशन अभी योजना के चरण में है और इसकी सफलता कई तकनीकी चुनौतियों पर निर्भर करेगी।

क्यों कर रहा है चीन यह प्रयोग?

अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी का इतिहास ऐसे कई उदाहरणों से भरा पड़ा है, जब अंतरिक्ष से आई विशाल चट्टानों ने भारी तबाही मचाई।

सबसे चर्चित घटनाओं में वर्ष 1908 का तुंगुस्का विस्फोट शामिल है, जब साइबेरिया के तुंगुस्का क्षेत्र में एक विशाल उल्कापिंड के विस्फोट से हजारों वर्ग किलोमीटर जंगल तबाह हो गए थे। वहीं 2013 में रूस के चेल्याबिंस्क शहर के ऊपर हुए उल्कापिंड विस्फोट में करीब 1,500 लोग घायल हो गए थे। अधिकांश लोग टूटे हुए शीशों और विस्फोट से पैदा हुई दबाव तरंगों के कारण घायल हुए थे।

इन्हीं घटनाओं ने दुनिया के वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि यदि भविष्य में कोई बड़ा क्षुद्रग्रह पृथ्वी की ओर बढ़े तो उसे पहले से कैसे रोका जाए।

32 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से होगी टक्कर

चीन के प्रस्तावित मिशन में एक अंतरिक्ष यान को लगभग 32,000 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से क्षुद्रग्रह से टकराया जाएगा। इतनी तेज गति से होने वाली टक्कर से वैज्ञानिक यह अध्ययन करेंगे कि क्षुद्रग्रह की दिशा, गति और संरचना पर कितना प्रभाव पड़ता है।

इस प्रयोग से भविष्य में पृथ्वी की ओर आने वाले संभावित खतरनाक क्षुद्रग्रहों को रास्ते से हटाने की तकनीक विकसित करने में मदद मिल सकती है।

नासा के DART मिशन से कैसे अलग है चीन का प्लान?

साल 2022 में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने DART (Double Asteroid Redirection Test) मिशन के तहत डिमॉर्फोस नामक क्षुद्रग्रह से अंतरिक्ष यान टकराया था। उस मिशन का मुख्य उद्देश्य क्षुद्रग्रह की कक्षा में बदलाव करना था और वैज्ञानिकों ने इसे सफल भी बताया था।

लेकिन चीन की रणनीति इससे कुछ अलग मानी जा रही है।

चीनी वैज्ञानिक केवल यह नहीं देखना चाहते कि टक्कर के बाद क्षुद्रग्रह की दिशा बदलती है या नहीं, बल्कि वे यह भी जानना चाहते हैं कि—

  • उसकी आंतरिक संरचना पर क्या असर पड़ता है,

  • सतह से कितना मलबा निकलता है,

  • उसमें मौजूद खनिजों की प्रकृति क्या है,

  • और भविष्य में ऐसी तकनीक को और प्रभावी कैसे बनाया जा सकता है।

यानी यह मिशन रक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान—दोनों उद्देश्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

एक नहीं, दो अंतरिक्ष यान भेजे जाएंगे

इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि चीन केवल एक नहीं बल्कि दो अंतरिक्ष यान लॉन्च करने की योजना बना रहा है।

पहला अंतरिक्ष यान

पहला यान अत्यधिक गति से सीधे क्षुद्रग्रह से टकराएगा। बताया जा रहा है कि इसकी गति ध्वनि की गति से लगभग 26 गुना अधिक होगी।

दूसरा अंतरिक्ष यान

दूसरा यान सुरक्षित दूरी से पूरे मिशन की निगरानी करेगा। यह टक्कर से पहले, टक्कर के दौरान और उसके बाद की तस्वीरें, वीडियो और वैज्ञानिक आंकड़े पृथ्वी तक भेजेगा।

इससे वैज्ञानिकों को टक्कर के वास्तविक प्रभाव को समझने का अवसर मिलेगा।

अंतरिक्ष यान खुद करेगा अंतिम फैसला

इस मिशन की एक और खास विशेषता इसका स्वायत्त (Autonomous) संचालन होगा।

जब अंतरिक्ष यान क्षुद्रग्रह के बेहद करीब पहुंचेगा, तब अंतिम क्षणों में टक्कर का निर्णय वह स्वयं करेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इतनी लंबी दूरी पर पृथ्वी से भेजे गए रेडियो संकेत अंतरिक्ष यान तक समय पर नहीं पहुंच पाएंगे।

इसके लिए अंतरिक्ष यान में अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित नेविगेशन प्रणाली और स्वचालित निर्णय लेने वाली तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

हाई-टेक उपकरणों से होगी गहन जांच

निगरानी करने वाले दूसरे अंतरिक्ष यान में कई आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण लगाए जाएंगे।

इनमें शामिल हैं—

  • हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे

  • स्पेक्ट्रोमीटर

  • धूल और कण मापने वाले सेंसर

  • सतह विश्लेषण उपकरण

इनकी सहायता से वैज्ञानिक क्षुद्रग्रह की सतह, उसकी बनावट, खनिज संरचना और टक्कर के बाद होने वाले बदलावों का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

कौन है 2015 XF261?

चीन ने इस मिशन के लिए 2015 XF261 नामक छोटे क्षुद्रग्रह का चयन किया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार—

  • इसका व्यास लगभग 30 मीटर है।

  • यह सूर्य की परिक्रमा लगभग पृथ्वी जैसी कक्षा में करता है।

  • वर्ष 2030 के आसपास यह पृथ्वी के अपेक्षाकृत करीब से गुजरेगा।

इसी कारण वैज्ञानिकों ने इसे इस परीक्षण के लिए उपयुक्त माना है।

हालांकि वर्तमान जानकारी के अनुसार यह क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराने की पुष्टि किया गया खतरा नहीं माना जाता।

सबसे बड़ी चुनौती अभी भी बाकी

वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस छोटे क्षुद्रग्रह की लगातार निगरानी करना है।

रिपोर्टों के अनुसार पिछले लगभग दस वर्षों में 2015 XF261 का केवल 74 बार ही सफलतापूर्वक अवलोकन किया जा सका है।

छोटे आकार के कारण ऐसे क्षुद्रग्रहों का लगातार पता लगाना आसान नहीं होता। यही वजह है कि इस मिशन में अत्यंत सटीक नेविगेशन और ट्रैकिंग तकनीक की आवश्यकता होगी।

मानव सभ्यता के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?

विशेषज्ञों का मानना है कि पृथ्वी के पास लाखों छोटे और बड़े क्षुद्रग्रह मौजूद हैं। अधिकांश पृथ्वी के लिए खतरा नहीं हैं, लेकिन यदि भविष्य में कोई बड़ा क्षुद्रग्रह पृथ्वी की ओर बढ़ता है तो उसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।

ऐसे में इस प्रकार के परीक्षण भविष्य की "प्लैनेटरी डिफेंस" (Planetary Defense) तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

यदि वैज्ञानिक यह समझने में सफल हो जाते हैं कि किसी क्षुद्रग्रह की दिशा को सुरक्षित रूप से कैसे बदला जाए, तो भविष्य में मानव सभ्यता को संभावित अंतरिक्षीय खतरों से बचाने की संभावना बढ़ सकती है।

दुनिया की नजर अब 2030 पर

चीन का यह प्रस्तावित मिशन अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में बड़ी उत्सुकता पैदा कर रहा है। एक ओर इसे ग्रह सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, तो दूसरी ओर यह चीन की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं का भी संकेत देता है।

हालांकि अभी इस मिशन के सफल होने में कई वर्ष बाकी हैं और इसके सामने अनेक तकनीकी चुनौतियां हैं। इसके बावजूद यदि यह मिशन सफल रहता है, तो भविष्य में पृथ्वी को खतरनाक क्षुद्रग्रहों से बचाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकता है।

नोट: यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और प्रस्तावित मिशन के विवरण पर आधारित है। मिशन के अंतिम स्वरूप, समय-सीमा और परिणामों में भविष्य में बदलाव संभव हैं।

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