भारत में कोरोना की फिर दस्तक! नए केसों के बीच डॉक्टरों ने बताया कितनी है चिंता
देश के अलग-अलग हिस्सों से एक बार फिर कोविड-19 संक्रमण के नए मामले सामने आने लगे हैं। आंध्र प्रदेश में संक्रमण से दो लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि कुछ नए एक्टिव केस भी दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी कोरोना संक्रमण के नए मामलों की पुष्टि हुई है। इन खबरों के बाद लोगों के मन में एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या कोरोना वायरस फिर से तेजी से फैलने लगा है और क्या देश में एक और कोविड लहर आने वाली है?
हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं है जिससे घबराने की जरूरत हो। उनका कहना है कि कोविड-19 अब पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन इसकी वर्तमान स्थिति पहले जैसी महामारी वाली नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार लोगों को अफवाहों से बचते हुए केवल आवश्यक सावधानियां अपनानी चाहिए।
क्या फिर लौट रहा है कोरोना?
कोविड-19 के नए मामलों के सामने आने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कोरोना वायरस फिर से देश में वापसी कर रहा है। डॉक्टरों के अनुसार फिलहाल जो मामले सामने आ रहे हैं, वे स्थानीय स्तर पर सीमित संख्या में हैं। पूरे देश में संक्रमण की व्यापक लहर जैसी स्थिति नहीं बनी है।
स्वास्थ्य विभाग संबंधित राज्यों में लगातार निगरानी रख रहा है। जहां नए मामले मिल रहे हैं, वहां टेस्टिंग बढ़ाई जा रही है और अस्पतालों को आवश्यक तैयारियां बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान हालात की तुलना वर्ष 2020 या 2021 की महामारी से करना उचित नहीं होगा क्योंकि अब परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं।
कोविड अब एंडेमिक संक्रमण बन चुका है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि SARS-CoV-2 वायरस पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब यह एंडेमिक संक्रमण का रूप ले चुका है। एंडेमिक का अर्थ है कि यह वायरस समय-समय पर सीमित संख्या में लोगों को संक्रमित करता रहेगा, लेकिन हर बार महामारी जैसी स्थिति पैदा नहीं करेगा।
डॉक्टरों का कहना है कि दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी कोविड अब मौसमी संक्रमणों की तरह बीच-बीच में सामने आ सकता है। इसलिए नए मामलों का मिलना अपने आप में किसी बड़ी आपदा का संकेत नहीं माना जा सकता।
क्यों बढ़ रहे हैं कोविड के नए मामले?
विशेषज्ञों के अनुसार कोविड संक्रमण में हल्की बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख कारण मौसम में बदलाव माना जा रहा है। मौसम बदलने के दौरान वायरल संक्रमण बढ़ना सामान्य बात है।
इसके अलावा लोगों की यात्रा और आवाजाही पहले की तुलना में काफी बढ़ गई है। त्योहारों, छुट्टियों और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण लोग लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहे हैं, जिससे संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
कुछ मामलों में वायरस के नए वैरिएंट भी सामने आते रहते हैं। हालांकि अब तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसे वैरिएंट गंभीर बीमारी का कारण नहीं बन रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस का बदलना एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है और इसका मतलब हमेशा खतरनाक लहर आना नहीं होता।
क्या यह नई कोविड लहर है?
डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान स्थिति को नई कोविड लहर कहना जल्दबाजी होगी। किसी भी महामारी की नई लहर घोषित करने के लिए लगातार बड़ी संख्या में मामलों का बढ़ना, अस्पतालों में मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि और गंभीर संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी जैसे कई संकेत आवश्यक होते हैं।
फिलहाल उपलब्ध आंकड़े इस प्रकार की स्थिति नहीं दर्शाते। अधिकांश मरीजों में हल्के लक्षण देखे जा रहे हैं और बहुत कम लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता पड़ रही है।
गंभीर बीमारी का खतरा पहले से क्यों कम है?
कोविड महामारी के शुरुआती वर्षों में बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से संक्रमित हुए थे क्योंकि उस समय अधिकांश आबादी के शरीर में वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा मौजूद नहीं थी।
अब स्थिति बदल चुकी है। देश में करोड़ों लोगों को कोविड वैक्सीन लग चुकी है। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग पहले संक्रमण का सामना भी कर चुके हैं। इन दोनों कारणों से अधिकांश लोगों के शरीर में वायरस के खिलाफ पर्याप्त प्रतिरक्षा विकसित हो चुकी है।
डॉक्टरों का कहना है कि इसी वजह से आज अधिकांश संक्रमित मरीजों में हल्के लक्षण दिखाई देते हैं और गंभीर बीमारी, आईसीयू में भर्ती होने या मृत्यु का खतरा पहले की तुलना में काफी कम हो गया है।
किन लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए?
हालांकि सामान्य लोगों के लिए स्थिति चिंताजनक नहीं मानी जा रही है, लेकिन कुछ लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
इनमें शामिल हैं—
60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग
हृदय रोग, मधुमेह, किडनी या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित मरीज
कैंसर का इलाज करा रहे लोग
जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है
गर्भवती महिलाएं (डॉक्टर की सलाह के अनुसार)
विशेषज्ञों का कहना है कि इन लोगों को संक्रमण के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
डॉक्टरों ने क्या सलाह दी है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे घबराने की बजाय सामान्य स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां अपनाएं। उनका कहना है कि कोरोना वायरस अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, इसलिए व्यक्तिगत स्वच्छता और जिम्मेदार व्यवहार अपनाना आवश्यक है।
डॉक्टरों की प्रमुख सलाह इस प्रकार है—
भीड़भाड़ वाली बंद जगहों पर आवश्यकता होने पर मास्क पहनें।
साबुन से नियमित रूप से हाथ धोएं या सैनिटाइजर का उपयोग करें।
यदि सर्दी, खांसी या बुखार हो तो दूसरों के संपर्क में आने से बचें।
बुजुर्गों और गंभीर बीमार लोगों के संपर्क में जाने से पहले सावधानी रखें।
सांस लेने में तकलीफ, लगातार तेज बुखार या सीने में दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का सेवन न करें।
क्या बूस्टर डोज की जरूरत है?
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड वैक्सीन अभी भी गंभीर बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम है। जिन लोगों की उम्र अधिक है, जिन्हें पहले से गंभीर बीमारियां हैं या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है, वे डॉक्टर की सलाह लेकर बूस्टर डोज लगवाने पर विचार कर सकते हैं।
हालांकि सभी लोगों के लिए तत्काल बूस्टर डोज की आवश्यकता है या नहीं, इसका निर्णय व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार लिया जाना चाहिए।
क्या फिर लगेगा लॉकडाउन?
नए मामलों के बीच लोगों के मन में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या एक बार फिर लॉकडाउन जैसी स्थिति बन सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसी संभावना बेहद कम है। देश की स्वास्थ्य व्यवस्था अब पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है। अस्पतालों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं, टेस्टिंग की क्षमता बढ़ चुकी है और निगरानी प्रणाली भी पहले से अधिक प्रभावी ढंग से काम कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान स्थिति स्थानीय स्तर पर निगरानी और सामान्य स्वास्थ्य उपायों से नियंत्रित की जा सकती है। इसलिए फिलहाल लॉकडाउन जैसी किसी व्यापक पाबंदी की आवश्यकता नहीं दिखाई देती।
अफवाहों से बचें, सतर्क रहें
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली अपुष्ट सूचनाओं से बचना बेहद जरूरी है। कोविड-19 से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल स्वास्थ्य विभाग और विश्वसनीय चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह पर भरोसा करना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण दिखाई दें तो समय पर जांच कराना और डॉक्टर की सलाह का पालन करना सबसे बेहतर उपाय है।
देश के कुछ राज्यों में कोविड-19 के नए मामले सामने आने के बावजूद स्वास्थ्य विशेषज्ञ फिलहाल किसी बड़ी महामारी या नई कोविड लहर की आशंका नहीं जता रहे हैं। उनका कहना है कि कोरोना वायरस अब एंडेमिक संक्रमण का रूप ले चुका है और समय-समय पर सीमित संख्या में मामले सामने आना सामान्य माना जा सकता है। वर्तमान में अधिकांश लोगों में वैक्सीन और पूर्व संक्रमण के कारण पर्याप्त प्रतिरक्षा मौजूद है, जिससे गंभीर बीमारी का खतरा पहले की तुलना में काफी कम हो गया है। ऐसे में घबराने के बजाय सतर्क रहना, स्वच्छता बनाए रखना, आवश्यक होने पर मास्क का उपयोग करना और लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना ही सबसे बेहतर तरीका है।

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