WHO की बड़ी चेतावनी! चुपचाप शरीर में पनप रही यह खतरनाक बीमारी ले सकती है जान, हर महिला को जरूर जाननी चाहिए ये 3 बातें
नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बार फिर सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) को लेकर वैश्विक स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह उन चुनिंदा कैंसरों में से एक है, जिन्हें काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके लिए तीन प्रमुख उपाय—HPV वैक्सीन, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर उपचार—सबसे प्रभावी माने जाते हैं।
WHO के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर दुनिया भर में महिलाओं में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में शामिल है। वर्ष 2024 में दुनिया में इसके लगभग 6.04 लाख नए मामले और लगभग 2.8 लाख मौतें दर्ज होने का अनुमान है। इनमें सबसे अधिक बोझ निम्न और मध्यम आय वाले देशों पर है, जहां समय पर जांच और उपचार की सुविधाएं सीमित हैं।
क्या है सर्वाइकल कैंसर?
सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के गर्भाशय के निचले हिस्से (सर्विक्स) में विकसित होने वाला कैंसर है।
यह बीमारी आमतौर पर अचानक नहीं होती, बल्कि कई वर्षों में धीरे-धीरे विकसित होती है। यदि शुरुआती अवस्था में इसकी पहचान हो जाए तो उपचार की सफलता की संभावना काफी अधिक रहती है।
सबसे बड़ा कारण क्या है?
WHO के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के लगभग सभी मामलों का संबंध ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के लगातार बने रहने वाले संक्रमण से होता है।
HPV एक सामान्य वायरस है, जिससे अधिकांश लोग जीवन में कभी न कभी संक्रमित हो सकते हैं। अधिकांश मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण को समाप्त कर देती है, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण लंबे समय तक बना रहने पर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
WHO ने किन तीन उपायों पर दिया सबसे अधिक जोर?
1. HPV वैक्सीन
WHO का कहना है कि 9 से 14 वर्ष की आयु में HPV वैक्सीन लगवाना संक्रमण और आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर के खतरे को काफी कम कर सकता है।
कई देशों ने किशोरियों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किए हैं।
2. नियमित स्क्रीनिंग
संगठन के अनुसार, नियमित स्क्रीनिंग से कैंसर बनने से पहले होने वाले बदलावों की पहचान की जा सकती है।
समय पर जांच होने पर बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही रोका जा सकता है।
3. समय पर इलाज
यदि किसी महिला में शुरुआती बदलाव या कैंसर की पुष्टि होती है, तो समय पर उपचार से अच्छे परिणाम मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
किन महिलाओं को अधिक जोखिम?
WHO के अनुसार, कुछ परिस्थितियों में जोखिम बढ़ सकता है, जैसे—
लगातार HPV संक्रमण,
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली,
HIV संक्रमण,
धूम्रपान,
स्क्रीनिंग न कराना।
विशेष रूप से HIV से संक्रमित महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में कई गुना अधिक पाया गया है।
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते।
लेकिन बाद के चरणों में कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं—
असामान्य रक्तस्राव,
मासिक धर्म के बीच रक्तस्राव,
संभोग के बाद रक्तस्राव,
दुर्गंधयुक्त योनि स्राव,
लगातार श्रोणि (पेल्विक) दर्द।
हालांकि ये लक्षण अन्य कारणों से भी हो सकते हैं, इसलिए ऐसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
WHO का 90-70-90 लक्ष्य
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सर्वाइकल कैंसर को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के लिए 90-70-90 रणनीति निर्धारित की है।
इसके अनुसार—
90% लड़कियों का 15 वर्ष की आयु तक HPV टीकाकरण,
70% महिलाओं की निर्धारित आयु में उच्च गुणवत्ता वाली स्क्रीनिंग,
90% महिलाओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाए।
WHO का मानना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करने से आने वाले दशकों में लाखों महिलाओं की जान बचाई जा सकती है।
भारत में भी बढ़ रहा जागरूकता अभियान
भारत के कई राज्यों में HPV टीकाकरण और जागरूकता अभियान शुरू किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि वे विश्वसनीय जानकारी के आधार पर निर्णय लें और समय पर जांच कराएं।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि—
वैक्सीन लगवाना,
नियमित स्क्रीनिंग कराना,
किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करना,
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के सबसे महत्वपूर्ण उपाय हैं।
साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी निर्धारित अंतराल पर स्क्रीनिंग की आवश्यकता बनी रहती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसे काफी हद तक रोका जा सकता है। HPV वैक्सीन, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर उपचार अपनाकर इस बीमारी से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच इस दिशा में सबसे प्रभावी कदम हैं।

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