राम मंदिर चढ़ावा मामले में बड़ा खुलासा? जांच के दौरान पुलिस को मिली कथित फर्जी रसीद, 40 घंटे की रिमांड पर आरोपियों से गहन पूछताछ
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और चोरी के मामल की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में पुलिस जांच के दौरान एक कथित फर्जी चंदा रसीद मिलने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह रसीद वास्तव में फर्जी है या नहीं, इसे किसने तैयार कराया और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस रसीद की प्रामाणिकता की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस इसका सत्यापन कर रही है और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।
तीनों आरोपियों को मिली 40 घंटे की पुलिस रिमांड
मामले में गिरफ्तार अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को अदालत ने 40 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेजा है।
बुधवार सुबह पुलिस टीम जिला कारागार पहुंची और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों आरोपियों को अपने साथ लेकर पुलिस लाइन पहुंची।
वहां मेडिकल परीक्षण के बाद पूछताछ का सिलसिला शुरू हुआ।
पूरे रिमांड के दौरान पुलिस का प्रयास आरोपियों से अधिक से अधिक जानकारी जुटाना और कथित चोरी की पूरी श्रृंखला को समझना रहा।
पुलिस लाइन में सुरक्षा के कड़े इंतजाम
आरोपियों की रिमांड को देखते हुए पुलिस लाइन में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रखी गई।
सुबह से ही पुलिस लाइन के प्रमुख प्रवेश द्वारों पर बैरिकेडिंग कर दी गई थी।
केवल अधिकृत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को ही प्रवेश की अनुमति दी गई।
आम लोगों और फरियादियों को अंदर जाने से रोका गया, जिसके कारण कुछ स्थानों पर हल्की नोकझोंक की स्थिति भी देखने को मिली।
कथित फर्जी चंदा रसीद बनी जांच का नया केंद्र
पूछताछ के दौरान पुलिस को एक कथित चंदा रसीद मिलने की जानकारी सामने आई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह रसीद देखने में काफी हद तक वास्तविक रसीद जैसी दिखाई देती है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि—
यह रसीद कहां छपी?
किसने तैयार करवाई?
इसका इस्तेमाल कब किया गया?
क्या इसके माध्यम से किसी प्रकार का अवैध धन संग्रह किया गया?
फिलहाल पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया है।
सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पूछताछ
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने पूछताछ के दौरान आरोपियों को कथित रूप से गणना कक्ष की सीसीटीवी फुटेज भी दिखाई।
बताया जा रहा है कि जांच अधिकारी यह जानना चाहते हैं कि—
कथित नकदी कैसे छिपाई गई?
उसे बाहर निकालने की योजना कैसे बनाई गई?
क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे?
हालांकि इन सभी बिंदुओं की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
चोरी की रकम कहां गई?
पूछताछ का सबसे महत्वपूर्ण विषय कथित तौर पर चढ़ावे से प्राप्त धनराशि का उपयोग रहा।
पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि यदि कथित चोरी हुई थी, तो वह धन—
कहां खर्च किया गया,
किस खाते में जमा हुआ,
किस व्यवसाय में लगाया गया,
या किसी अन्य व्यक्ति तक पहुंचा।
इसके लिए बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
संपत्तियों की भी हो रही जांच
पुलिस ने आरोपियों की चल और अचल संपत्तियों की जानकारी भी जुटानी शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने पूछताछ में यह जानने का प्रयास किया कि—
आरोपियों के पास कौन-कौन सी संपत्तियां हैं।
हाल के वर्षों में क्या नई खरीदारी की गई।
संपत्तियों के लिए धन का स्रोत क्या था।
यदि किसी संपत्ति का संबंध कथित अवैध धन से पाया जाता है, तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
जमीन खरीदने के संबंध में भी पूछताछ
जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि आरोपी अनुकल्प मिश्रा कथित रूप से लगभग दो करोड़ रुपये मूल्य की एक जमीन खरीदने के संबंध में जानकारी जुटा रहा था।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने इस विषय में भी उससे पूछताछ की और जमीन खरीदने के लिए धन का स्रोत जानने का प्रयास किया।
हालांकि पुलिस ने इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष जारी नहीं किया है।
राजनीतिक और व्यावसायिक संपर्क भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां आरोपियों के कथित व्यावसायिक और अन्य संपर्कों की भी जांच कर रही हैं।
इसके लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और अन्य दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है।
यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उससे भी पूछताछ की जा सकती है।
पुलिस ने नहीं की आधिकारिक पुष्टि
हालांकि पूरे मामले में कई तरह की जानकारियां सामने आ रही हैं, लेकिन पुलिस ने अब तक कथित फर्जी रसीद या पूछताछ से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
अधिकारियों का कहना है कि—
जांच अभी जारी है।
सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।
जांच पूरी होने के बाद ही विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।
कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में आरोप लगना और अदालत द्वारा दोष सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं।
जब तक सक्षम न्यायालय में आरोप सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक आरोपियों को कानून की दृष्टि में दोषी नहीं माना जा सकता।
इसी कारण जांच एजेंसियां साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच अब नए चरण में पहुंच चुकी है। तीनों आरोपियों की पुलिस रिमांड के दौरान कथित फर्जी चंदा रसीद, बैंक खातों, संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और संभावित निवेश जैसे कई पहलुओं पर पूछताछ की जा रही है। हालांकि इन सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएंगे। ऐसे में मामले से जुड़े सभी दावों को फिलहाल जांच का हिस्सा माना जाना चाहिए, न कि अंतिम सत्य।

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