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लंबे अनशन के बाद क्या खाया जाता है? जानें रीफीडिंग सिंड्रोम से बचने और तेजी से रिकवर करने के 5 आसान तरीके

 


लंबे समय तक चले आमरण अनशन के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में वापस लाना जितना महत्वपूर्ण होता है, उतना ही महत्वपूर्ण होता है सही तरीके से भोजन की शुरुआत करना। हाल ही में NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक द्वारा अपना आमरण अनशन समाप्त करने के बाद यह विषय फिर चर्चा में आ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक भोजन न करने के बाद यदि कोई व्यक्ति अचानक सामान्य या भारी भोजन कर लेता है, तो यह उसके लिए गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकता है।

डॉक्टरों के अनुसार, कई दिनों तक भूखे रहने के बाद शरीर की कार्यप्रणाली पूरी तरह बदल जाती है। ऐसे समय में भोजन शुरू करने की प्रक्रिया बेहद सावधानी से और चिकित्सकीय निगरानी में की जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो रीफीडिंग सिंड्रोम (Refeeding Syndrome) जैसी खतरनाक स्थिति विकसित हो सकती है, जो कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकती है।

लंबे उपवास के बाद शरीर में क्या बदलाव होते हैं?

जब कोई व्यक्ति कई दिनों तक भोजन नहीं करता, तब शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए पहले ग्लाइकोजन का उपयोग करता है। इसके बाद शरीर धीरे-धीरे अपनी वसा और फिर मांसपेशियों को ऊर्जा के स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने लगता है।

इस दौरान शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे फॉस्फेट, पोटैशियम और मैग्नीशियम का स्तर कम होने लगता है। शरीर इस नई स्थिति के अनुसार खुद को ढाल लेता है, लेकिन जैसे ही अचानक अधिक मात्रा में भोजन दिया जाता है, खासकर कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन, तब शरीर में इंसुलिन का स्तर तेजी से बढ़ जाता है।

यहीं से रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा शुरू होता है।

क्या है रीफीडिंग सिंड्रोम?

रीफीडिंग सिंड्रोम एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जो लंबे समय तक भूखे रहने या कुपोषण के बाद अचानक भोजन शुरू करने पर विकसित हो सकती है।

भोजन मिलने के बाद शरीर कोशिकाओं के भीतर तेजी से ग्लूकोज और इलेक्ट्रोलाइट्स को भेजना शुरू करता है। इससे रक्त में फॉस्फेट, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक खनिजों का स्तर तेजी से गिर सकता है।

इन इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी का असर कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ता है।

  • हृदय की धड़कन अनियमित हो सकती है।

  • सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।

  • मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं।

  • भ्रम, दौरे या बेहोशी की स्थिति बन सकती है।

  • गंभीर मामलों में हृदय गति रुकने का खतरा भी पैदा हो सकता है।

इसी कारण डॉक्टर लंबे अनशन के बाद भोजन शुरू करने में विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

अनशन खत्म होते ही सबसे पहले क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे उपवास के बाद सबसे पहली जरूरत शरीर को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ उपलब्ध कराने की होती है।

भोजन शुरू करने से पहले शरीर को धीरे-धीरे हाइड्रेट किया जाना चाहिए।

इसके लिए डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार निम्न विकल्पों की सलाह दे सकते हैं—

  • सादा पानी

  • ओआरएस घोल

  • इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त पेय

  • चिकित्सकीय सलाह के अनुसार तरल पदार्थ

इससे शरीर में पानी और आवश्यक मिनरल्स की कमी धीरे-धीरे पूरी होने लगती है।

हल्के भोजन से करें शुरुआत

डॉक्टरों के अनुसार, लंबे अनशन के बाद पहले दिन भारी भोजन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

शुरुआत ऐसे खाद्य पदार्थों से करनी चाहिए जो आसानी से पच सकें और पाचन तंत्र पर अतिरिक्त दबाव न डालें।

प्रारंभिक भोजन में शामिल किए जा सकते हैं—

  • पतली खिचड़ी

  • दलिया

  • सब्जियों का हल्का सूप

  • दही

  • नारियल पानी

  • पका हुआ पपीता

  • उबले हुए नरम खाद्य पदार्थ

वहीं शुरुआत में इन चीजों से बचना चाहिए—

  • तला-भुना भोजन

  • अधिक मसालेदार खाना

  • बहुत ज्यादा मीठे पदार्थ

  • फास्ट फूड

  • अत्यधिक तेल वाले खाद्य पदार्थ

एक बार में भरपेट भोजन न करें

लंबे उपवास के बाद सबसे बड़ी गलती एक साथ अधिक मात्रा में खाना खाना हो सकती है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि भोजन की मात्रा कम रखी जाए और दिन में कई बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में भोजन लिया जाए।

इस तरीके से—

  • पाचन तंत्र पर दबाव कम पड़ता है।

  • ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ती।

  • इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन धीरे-धीरे सामान्य होता है।

  • शरीर भोजन को बेहतर तरीके से स्वीकार करता है।

धीरे-धीरे बढ़ाएं प्रोटीन और पोषण

जब शरीर हल्का भोजन आसानी से पचाने लगे, तब धीरे-धीरे पोषण की मात्रा बढ़ाई जा सकती है।

रिकवरी के अगले चरण में डॉक्टर निम्न खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह दे सकते हैं—

  • दाल

  • पनीर

  • दही

  • उबला अंडा (यदि व्यक्ति सेवन करता हो)

  • मूंग दाल

  • ताजे फल

  • हरी सब्जियां

इससे शरीर को आवश्यक प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स मिलने लगते हैं, जो लंबे उपवास के दौरान हुई कमजोरी को दूर करने में मदद करते हैं।

डॉक्टर की निगरानी क्यों है जरूरी?

यदि किसी व्यक्ति ने कई दिनों या हफ्तों तक आमरण अनशन किया हो, तो केवल घर पर भोजन शुरू करना पर्याप्त नहीं माना जाता।

डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामलों में चिकित्सकीय निगरानी बेहद आवश्यक होती है।

जरूरत पड़ने पर डॉक्टर निम्न जांच कर सकते हैं—

  • फॉस्फेट का स्तर

  • पोटैशियम

  • मैग्नीशियम

  • ब्लड शुगर

  • किडनी की कार्यक्षमता

  • हृदय की जांच

  • अन्य आवश्यक रक्त परीक्षण

यदि किसी प्रकार की कमी या असंतुलन पाया जाता है तो समय रहते उपचार शुरू किया जा सकता है।

किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?

यदि लंबे अनशन के बाद भोजन शुरू करने के दौरान निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए—

  • अत्यधिक कमजोरी

  • बार-बार चक्कर आना

  • दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना

  • सांस फूलना

  • हाथ-पैरों में सूजन

  • भ्रम या बेहोशी

  • लगातार उल्टी

  • मांसपेशियों में गंभीर कमजोरी

ये रीफीडिंग सिंड्रोम या अन्य गंभीर जटिलताओं के संकेत हो सकते हैं।

किन लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ लोगों में जोखिम सामान्य से अधिक होता है।

विशेष रूप से—

  • लंबे समय तक आमरण अनशन करने वाले लोग

  • गंभीर कुपोषण से पीड़ित मरीज

  • बुजुर्ग

  • अत्यधिक कमजोर व्यक्ति

  • कैंसर या अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज

  • लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने वाले मरीज

इन सभी मामलों में भोजन शुरू करने की पूरी योजना डॉक्टर या क्लिनिकल न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह के अनुसार ही बनाई जानी चाहिए।

पहले से बीमारी हो तो क्या करें?

यदि किसी व्यक्ति को पहले से—

  • डायबिटीज

  • किडनी की बीमारी

  • हृदय रोग

  • लिवर की समस्या

  • उच्च रक्तचाप

  • अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्या

है, तो भोजन शुरू करने का तरीका सामान्य व्यक्ति से अलग हो सकता है।

ऐसे मरीजों को स्वयं कोई प्रयोग करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह का पालन करना चाहिए।

लंबे समय तक चले आमरण अनशन के बाद केवल अनशन समाप्त करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सही तरीके से शरीर की रिकवरी कराना सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक भारी भोजन करना रीफीडिंग सिंड्रोम जैसी गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। इसलिए पहले शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ देना, फिर हल्के और सुपाच्य भोजन से शुरुआत करना, भोजन की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाना और पूरे समय डॉक्टर की निगरानी में रहना सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

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