दुनिया का अनोखा संकट! इस देश में पुरुषों की भारी कमी, महिलाएं लेने लगीं 'एक घंटे का पति'
यूरोप का छोटा लेकिन बेहद खूबसूरत देश लातविया इन दिनों एक अनोखी सामाजिक समस्या की वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। प्राकृतिक सुंदरता, उच्च शिक्षा स्तर और आधुनिक जीवनशैली के लिए पहचाने जाने वाले इस देश में अब महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती जीवनसाथी तलाशने की बन गई है। हालात ऐसे हैं कि बड़ी संख्या में महिलाएं विवाह योग्य उम्र पार करने के बावजूद अविवाहित हैं और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए अब वे 'एक घंटे का पति' (Hourly Husband) नाम की सेवा का सहारा ले रही हैं।
यह सेवा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और दुनिया भर में लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि इस सेवा का वास्तविक उद्देश्य केवल घरेलू मरम्मत और तकनीकी कार्यों में सहायता देना है, लेकिन इसके नाम ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
आखिर क्यों कम हो गए पुरुष?
लातविया की जनसंख्या संरचना पिछले कई वर्षों से असंतुलित होती जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में हर 100 महिलाओं पर केवल लगभग 84 से 85 पुरुष हैं। उम्र बढ़ने के साथ यह अंतर और भी अधिक हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई कारण हैं—
बड़ी संख्या में युवा पुरुष बेहतर रोजगार और अधिक आय की तलाश में दूसरे यूरोपीय देशों में पलायन कर जाते हैं।
पुरुषों में धूम्रपान और शराब की लत अपेक्षाकृत अधिक है।
अस्वस्थ जीवनशैली के कारण पुरुषों की औसत आयु महिलाओं से लगभग 10 वर्ष कम बताई जाती है।
पुरुषों में आत्महत्या की दर भी महिलाओं की तुलना में काफी अधिक है।
उच्च मृत्यु दर ने भी पुरुष आबादी को प्रभावित किया है।
इन सभी कारणों का संयुक्त प्रभाव यह हुआ कि देश में महिलाओं की संख्या लगातार पुरुषों से अधिक होती चली गई।
पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर महिलाएं, लेकिन साथी की तलाश मुश्किल
लातविया की महिलाएं शिक्षा, करियर और सामाजिक भागीदारी के मामले में यूरोप की सबसे आगे रहने वाली महिलाओं में गिनी जाती हैं। बड़ी संख्या में महिलाएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं।
लेकिन यही स्थिति कई बार उनके लिए विवाह के क्षेत्र में चुनौती भी बन जाती है।
कई समाजशास्त्रियों का कहना है कि अधिकांश महिलाएं ऐसा जीवनसाथी चाहती हैं जो शिक्षा, करियर, सोच और सामाजिक स्तर पर उनके बराबर हो। लेकिन जब देश में योग्य पुरुषों की संख्या ही कम हो जाए तो उपयुक्त साथी मिलना स्वाभाविक रूप से कठिन हो जाता है।
'एक घंटे का पति' आखिर है क्या?
नाम सुनकर यह सेवा भले ही अजीब लगे, लेकिन इसका उद्देश्य पूरी तरह व्यावहारिक है।
लातविया की राजधानी रीगा समेत कई शहरों में ऐसी कंपनियां काम कर रही हैं जो प्रशिक्षित तकनीशियन और घरेलू मरम्मत करने वाले कर्मचारियों को ग्राहकों के घर भेजती हैं।
इन सेवाओं के तहत ग्राहक ऑनलाइन या फोन के माध्यम से बुकिंग करते हैं और कुछ ही समय में एक कुशल कर्मचारी उनके घर पहुंच जाता है।
ये कर्मचारी कई तरह के घरेलू काम करते हैं, जैसे—
खराब नल या पाइप की मरम्मत
बिजली से जुड़े छोटे-मोटे कार्य
बल्ब बदलना
टीवी या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगाना
फर्नीचर असेंबल करना
अलमारी या शेल्फ फिट करना
दरवाजे-खिड़की की मरम्मत
घरेलू रखरखाव से जुड़े अन्य छोटे काम
अधिकांश कंपनियां दावा करती हैं कि बुकिंग के लगभग 60 मिनट के भीतर कर्मचारी ग्राहक के घर पहुंच जाता है।
नाम ने बढ़ाई लोकप्रियता
हालांकि यह सेवा मूल रूप से एक तकनीकी सहायता सेवा है, लेकिन 'एक घंटे का पति' नाम ने इसे सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय बना दिया है।
इंटरनेट पर लोग इस सेवा को लेकर तरह-तरह के मजेदार मीम्स और टिप्पणियां साझा कर रहे हैं।
कई महिलाएं मजाकिया अंदाज में कहती हैं—
"शादी का इंतजार करने से अच्छा है कि जरूरत पड़ने पर एक घंटे का पति बुला लिया जाए।"
हालांकि अधिकांश लोग स्पष्ट करते हैं कि इस सेवा का विवाह या व्यक्तिगत संबंधों से कोई लेना-देना नहीं है।
महिलाओं के लिए क्यों बनी उपयोगी सेवा?
आधुनिक शहरों में अकेले रहने वाली महिलाओं या बुजुर्ग लोगों के लिए छोटी-छोटी घरेलू मरम्मत भी कभी-कभी बड़ी परेशानी बन जाती है।
ऐसे में यह सेवा कई कारणों से उपयोगी मानी जा रही है—
तुरंत सहायता उपलब्ध हो जाती है।
अलग-अलग कारीगर खोजने की जरूरत नहीं पड़ती।
समय की बचत होती है।
काम पेशेवर तरीके से पूरा किया जाता है।
अकेले रहने वाले लोगों को सुविधा मिलती है।
कई महिलाएं इसे आत्मनिर्भर जीवनशैली का हिस्सा भी मानती हैं।
समाज में बदलते रिश्तों की तस्वीर
विशेषज्ञों का कहना है कि लातविया की स्थिति केवल एक देश की समस्या नहीं है, बल्कि कई विकसित देशों में जनसंख्या संरचना तेजी से बदल रही है।
कम जन्मदर, विदेश पलायन, बदलती पारिवारिक सोच और विवाह की बढ़ती औसत आयु जैसे कारण पारंपरिक सामाजिक ढांचे को प्रभावित कर रहे हैं।
आज बड़ी संख्या में लोग विवाह की बजाय करियर और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं जो लोग विवाह करना चाहते हैं, उनके सामने उपयुक्त साथी खोजने की चुनौती भी बढ़ रही है।
लेखिका ने जताई चिंता
लातविया की प्रसिद्ध लेखिका और कॉलमिस्ट डेस रुक्साने ने भी इस विषय पर अपनी चिंता व्यक्त की है।
उनके अनुसार देश की कई प्रतिभाशाली और शिक्षित महिलाएं इसलिए अकेली रह जाती हैं क्योंकि वे ऐसे साथी की तलाश करती हैं जो उनके बौद्धिक और पेशेवर स्तर की बराबरी कर सके। लेकिन ऐसे पुरुषों की संख्या लगातार घटती जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कई महिलाएं समझौता करने की बजाय अकेले रहना पसंद करती हैं।
स्वास्थ्य संबंधी कारण भी बड़ी वजह
रिपोर्टों के अनुसार लातविया में पुरुषों की कम होती संख्या के पीछे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी अहम भूमिका निभाती हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि—
पुरुषों में हृदय रोग का खतरा अधिक रहता है।
शराब और धूम्रपान की आदतें मृत्यु दर बढ़ाती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी गंभीर चुनौती हैं।
आत्महत्या के मामलों में अधिकांश पीड़ित पुरुष होते हैं।
इन कारणों से पुरुषों की औसत आयु महिलाओं की तुलना में काफी कम बनी हुई है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही चर्चा
'एक घंटे का पति' सेवा को लेकर सोशल मीडिया पर लाखों लोग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
कुछ लोग इसे आधुनिक जीवन की जरूरत बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे बदलते सामाजिक ढांचे का प्रतीक मान रहे हैं।
कई यूजर्स का कहना है कि यदि ऐसी सेवाएं पेशेवर और सुरक्षित तरीके से संचालित हों तो अकेले रहने वाले लोगों के लिए यह काफी उपयोगी साबित हो सकती हैं।
क्या यह भविष्य का नया ट्रेंड है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में दुनिया के कई देशों में घरेलू सहायता सेवाओं की मांग तेजी से बढ़ सकती है। शहरीकरण, एकल परिवारों की बढ़ती संख्या और व्यस्त जीवनशैली ऐसे व्यवसायों को बढ़ावा दे रही है।
हालांकि लातविया की 'एक घंटे का पति' सेवा केवल घरेलू तकनीकी सहायता तक सीमित है, लेकिन इसका नाम और वहां की सामाजिक परिस्थितियां इसे अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना रही हैं।
लातविया की कहानी केवल पुरुषों और महिलाओं के अनुपात की नहीं, बल्कि बदलते समाज, जनसंख्या संतुलन, स्वास्थ्य, रोजगार और आधुनिक जीवनशैली की भी कहानी है। जहां एक ओर महिलाएं शिक्षा और करियर में नई ऊंचाइयों तक पहुंच रही हैं, वहीं दूसरी ओर उपयुक्त जीवनसाथी की कमी उनके सामने नई सामाजिक चुनौती बनकर उभर रही है। ऐसे माहौल में 'एक घंटे का पति' जैसी सेवाएं घरेलू जरूरतों का व्यावहारिक समाधान तो दे रही हैं, लेकिन वे उस भावनात्मक खालीपन को नहीं भर सकतीं जिसे एक वास्तविक जीवनसाथी ही पूरा कर सकता है। यही कारण है कि लातविया का यह अनोखा सामाजिक परिदृश्य आज पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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