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कपड़े बदल रही थीं छात्राएं, तभी रोशनदान पर दिखा मोबाइल... स्कूल में मच गया हड़कंप



नई दिल्ली/संवाददाता: शहर के एक निजी स्कूल में छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल के स्विमिंग पूल परिसर में बने चेंजिंग रूम के पास एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने छात्राओं के कपड़े बदलते समय चोरी-छिपे मोबाइल फोन से उनका वीडियो बनाने का प्रयास किया। छात्राओं की सतर्कता के चलते मामला सामने आया, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी कर्मचारी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट समेत अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले की जांच जारी है और जब्त किए गए मोबाइल फोन सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, संबंधित छात्राएं सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित एक निजी स्कूल में पढ़ाई करती हैं। स्कूल परिसर में स्विमिंग पूल है, जहां विद्यार्थियों को नियमित रूप से तैराकी का प्रशिक्षण दिया जाता है।

शिकायत में कहा गया है कि 21 जुलाई को स्विमिंग प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद कुछ छात्राएं परिसर में बने चेंजिंग रूम में कपड़े बदलने गई थीं। आरोप है कि उसी दौरान स्कूल का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी गौरव रोशनदान के पास पहुंच गया और मोबाइल फोन के जरिए छात्राओं का वीडियो बनाने लगा।

छात्राओं की सतर्कता से खुला मामला

परिजनों के अनुसार, कपड़े बदलने के दौरान छात्राओं की नजर कथित तौर पर आरोपी पर पड़ गई। छात्राओं ने बिना कोई हंगामा किए पहले अपने परिजनों को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी।

सूचना मिलने पर परिजन तुरंत स्कूल पहुंचे और स्कूल प्रबंधन को घटना से अवगत कराया। शिकायत के मुताबिक, इस दौरान आरोपी वहां से निकलने की कोशिश करने लगा, लेकिन परिजनों ने उसे पकड़ लिया।

इसके बाद कथित रूप से आरोपी के मोबाइल फोन की जांच की गई, जिसमें छात्राओं के कपड़े बदलते समय बनाए गए वीडियो मिलने का दावा किया गया। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

हालांकि मोबाइल से क्या-क्या सामग्री बरामद हुई है, इसकी अंतिम पुष्टि पुलिस की डिजिटल फॉरेंसिक जांच के बाद ही होगी।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

डीएसपी रमेश चंद्र ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में लिया।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट तथा अन्य संबंधित कानूनी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की। पूछताछ के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मोबाइल की होगी डिजिटल जांच

जांच अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है।

फॉरेंसिक विशेषज्ञ यह जांच करेंगे कि—

  • मोबाइल में कितने वीडियो या फोटो मौजूद हैं।

  • क्या किसी सामग्री को डिलीट करने की कोशिश की गई थी।

  • क्या कोई डेटा किसी अन्य व्यक्ति को भेजा गया।

  • मोबाइल में अन्य आपत्तिजनक सामग्री मौजूद है या नहीं।

  • वीडियो कब रिकॉर्ड किए गए।

इन सभी तथ्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी।

POCSO Act क्या है?

POCSO (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया विशेष कानून है।

यदि किसी नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न, अश्लील हरकत, अनुचित वीडियो रिकॉर्डिंग या अन्य यौन अपराध का आरोप सामने आता है, तो पुलिस इस कानून के तहत कार्रवाई कर सकती है।

इस कानून में बच्चों की पहचान गोपनीय रखना अनिवार्य है। मीडिया और अन्य सार्वजनिक मंचों पर पीड़ित बच्चों की पहचान उजागर करना कानूनन प्रतिबंधित है।

स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद स्कूल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन स्थानों पर छात्र-छात्राएं कपड़े बदलते हैं, वहां पर्याप्त गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

स्कूलों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि—

  • चेंजिंग रूम पूरी तरह सुरक्षित हों।

  • रोशनदान और अन्य स्थानों का डिजाइन ऐसा हो कि बाहर से कोई अंदर न देख सके।

  • संवेदनशील क्षेत्रों में अनधिकृत कर्मचारियों की आवाजाही पर रोक हो।

  • बच्चों की सुरक्षा संबंधी शिकायतों के लिए त्वरित व्यवस्था उपलब्ध हो।

अभिभावकों के लिए भी जरूरी है जागरूकता

बाल सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को अपने बच्चों से नियमित रूप से संवाद करना चाहिए ताकि यदि उनके साथ किसी प्रकार की अनुचित घटना हो तो वे बिना डर के इसकी जानकारी दे सकें।

बच्चों को यह भी समझाया जाना चाहिए कि यदि कोई व्यक्ति उनकी निजी सीमा (Personal Boundary) का उल्लंघन करता है या अनुचित व्यवहार करता है, तो वे तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक या किसी विश्वसनीय वयस्क को इसकी सूचना दें।

सोशल मीडिया पर वीडियो साझा न करें

पुलिस और बाल अधिकार विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि यदि इस मामले से जुड़ी कोई फोटो, वीडियो या अन्य सामग्री सोशल मीडिया पर सामने आती है तो उसे साझा न करें।

ऐसी सामग्री का प्रसार न केवल जांच को प्रभावित कर सकता है, बल्कि पीड़ित बच्चों की निजता और कानूनी अधिकारों का भी उल्लंघन हो सकता है।

जांच जारी

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। अदालत में अपराध सिद्ध होने तक आरोपी को कानून की दृष्टि में दोषी नहीं माना जाता।

निजी स्कूल में छात्राओं के कथित वीडियो बनाए जाने का यह मामला बच्चों की सुरक्षा और स्कूल परिसरों में निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा करता है। छात्राओं की सतर्कता और परिजनों की त्वरित कार्रवाई के कारण मामला समय रहते पुलिस तक पहुंचा। अब जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएं तथा कानून के अनुसार उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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