क्या अब डायबिटीज मरीजों को रोज़-रोज़ नहीं लगानी पड़ेगी इंसुलिन? भारत में लॉन्च हुई नई तकनीक ने बढ़ाईं करोड़ों लोगों की उम्मीदें!
नई दिल्ली: देश में मधुमेह (डायबिटीज) से जूझ रहे करोड़ों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रगति सामने आई है। डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में दुनिया की पहली सप्ताह में एक बार दी जाने वाली बेसल इंसुलिन 'अवीक्ली (Awiqli)' लॉन्च करने की घोषणा की है। यह नई इंसुलिन टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए उपलब्ध होगी और इसका उद्देश्य रोजाना इंसुलिन लेने की आवश्यकता को कम करना है।
अब तक अधिकांश इंसुलिन पर निर्भर मरीजों को प्रतिदिन इंजेक्शन लेना पड़ता था, लेकिन नई तकनीक के आने से कई मरीजों के लिए यह प्रक्रिया काफी आसान हो सकती है। यदि किसी मरीज के लिए यह उपचार चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त हो, तो उसे पूरे वर्ष में प्रतिदिन की बजाय सप्ताह में केवल एक बार, यानी लगभग 52 इंजेक्शन लेने होंगे।
रोजाना इंजेक्शन से मिल सकती है राहत
डायबिटीज के कई मरीज वर्षों तक प्रतिदिन इंसुलिन इंजेक्शन लेते हैं। इसका मतलब है कि उन्हें सालभर में लगभग 365 बार इंसुलिन लगानी पड़ती है।
हालांकि यह इलाज जीवनरक्षक होता है, लेकिन कई मरीजों के लिए रोजाना इंजेक्शन लेना मानसिक और शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। कुछ लोग सुई के डर, व्यस्त दिनचर्या या असुविधा के कारण समय पर इंसुलिन नहीं ले पाते, जिससे रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।
नई साप्ताहिक बेसल इंसुलिन का उद्देश्य इसी समस्या को कम करना है, ताकि मरीज उपचार को नियमित रूप से जारी रख सकें।
क्या है 'अवीक्ली'?
अवीक्ली (Awiqli) एक लंबे समय तक प्रभावी रहने वाली बेसल इंसुलिन है, जिसे विशेष रूप से इस तरह विकसित किया गया है कि इसका असर पूरे सप्ताह तक बना रहे।
बेसल इंसुलिन शरीर की सामान्य आवश्यकता के अनुसार पूरे दिन और रात रक्त में इंसुलिन का आधार स्तर बनाए रखने में मदद करती है। यह भोजन के समय दी जाने वाली त्वरित (Rapid-acting) इंसुलिन से अलग होती है।
यह नई दवा केवल सप्ताह में एक बार दी जाती है, लेकिन इसका उपयोग हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
किन मरीजों के लिए है यह दवा?
कंपनी के अनुसार यह इंसुलिन—
टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित वयस्कों,
टाइप-2 डायबिटीज वाले उन वयस्क मरीजों,
के लिए विकसित की गई है जिन्हें डॉक्टर बेसल इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता मानते हैं।
हालांकि हर मरीज के लिए एक ही प्रकार की इंसुलिन उपयुक्त नहीं होती। कौन-सी इंसुलिन किस व्यक्ति के लिए सही रहेगी, इसका निर्णय केवल चिकित्सक मरीज की स्थिति, ब्लड शुगर स्तर, अन्य बीमारियों और उपचार इतिहास को देखते हुए करते हैं।
कीमत कितनी होगी?
कंपनी ने 700 यूनिट वाले पैक की कीमत 2,611 रुपये निर्धारित की है।
इसके अनुसार प्रति यूनिट लागत लगभग 3.73 रुपये बैठती है।
कंपनी का दावा है कि यह कई मौजूदा दैनिक बेसल इंसुलिन विकल्पों की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक किफायती हो सकती है। हालांकि वास्तविक खर्च मरीज की आवश्यक खुराक, उपचार योजना और स्थानीय उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
एक सप्ताह में कितनी इंसुलिन?
यदि किसी मरीज को प्रतिदिन 10 यूनिट बेसल इंसुलिन की आवश्यकता होती है, तो साप्ताहिक योजना के अनुसार उसे लगभग 70 यूनिट इंसुलिन सप्ताह में एक बार दी जा सकती है।
लेकिन यह केवल एक उदाहरण है। वास्तविक खुराक डॉक्टर मरीज की चिकित्सा स्थिति के अनुसार तय करते हैं। मरीजों को स्वयं खुराक बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
भारत में क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है।
देश में करोड़ों लोग मधुमेह से पीड़ित हैं, जबकि बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो प्री-डायबिटीज की अवस्था में हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान, मोटापा, शारीरिक गतिविधि की कमी और आनुवंशिक कारणों से मधुमेह के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है।
ऐसे में उपचार को आसान बनाने वाली नई तकनीकों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
नियमित इलाज में मिल सकती है मदद
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और मधुमेह विशेषज्ञों का मानना है कि कई मरीज रोजाना इंजेक्शन लेने की परेशानी के कारण समय पर इंसुलिन शुरू नहीं करते या बीच में उपचार छोड़ देते हैं।
यदि मरीज को सप्ताह में केवल एक बार इंजेक्शन लेना हो, तो उपचार जारी रखने की संभावना बढ़ सकती है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल इंजेक्शन की संख्या कम होने से ही डायबिटीज नियंत्रित नहीं होगी। इसके लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और डॉक्टर की सलाह का पालन करना उतना ही आवश्यक रहेगा।
फ्लेक्सटच पेन से होगा आसान उपयोग
नई इंसुलिन FlexTouch Pen के माध्यम से दी जाएगी।
यह एक विशेष पेन डिवाइस है जिसे इस प्रकार बनाया गया है कि मरीज या प्रशिक्षित देखभालकर्ता अपेक्षाकृत आसानी से इंसुलिन दे सकें।
इस प्रकार के पेन डिवाइस पारंपरिक सिरिंज की तुलना में अधिक सुविधाजनक माने जाते हैं और सही मात्रा में दवा देने में भी मदद करते हैं।
क्लिनिकल अध्ययन में क्या सामने आया?
कंपनी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार क्लिनिकल अध्ययनों में यह साप्ताहिक बेसल इंसुलिन ब्लड शुगर नियंत्रण के मामले में दैनिक बेसल इंसुलिन के बराबर या कुछ परिस्थितियों में तुलनीय प्रभावी पाई गई।
साथ ही सुरक्षा संबंधी मूल्यांकन में भी इसका प्रोफाइल संतोषजनक बताया गया।
हालांकि किसी भी दवा की तरह इसके भी संभावित दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसलिए इसका उपयोग केवल चिकित्सकीय निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
मरीजों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि—
डॉक्टर की सलाह के बिना इंसुलिन कभी न बदलें।
स्वयं खुराक कम या अधिक न करें।
नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच कराते रहें।
संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम जारी रखें।
यदि इंजेक्शन के बाद कोई असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
भविष्य में बदल सकता है इलाज का तरीका
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नई साप्ताहिक इंसुलिन अधिक मरीजों के लिए उपयुक्त साबित होती है, तो आने वाले वर्षों में डायबिटीज उपचार के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
इससे उपचार का पालन (Treatment Adherence) बेहतर हो सकता है, मरीजों की सुविधा बढ़ सकती है और लंबे समय में मधुमेह से जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
भारत में सप्ताह में एक बार दी जाने वाली बेसल इंसुलिन अवीक्ली का लॉन्च मधुमेह उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे उन मरीजों को सुविधा मिल सकती है जिन्हें लंबे समय तक नियमित इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता होती है। हालांकि यह दवा हर मरीज के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए इसका उपयोग केवल योग्य चिकित्सक की सलाह और निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक दवाएं उपचार को आसान बना सकती हैं, लेकिन डायबिटीज पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संतुलित जीवनशैली, नियमित जांच, समय पर दवा और चिकित्सकीय परामर्श आज भी सबसे महत्वपूर्ण आधार बने हुए हैं।

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