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घर की बेटियों पर ही टूटा दरिंदा! गूगल क्लाउड में छिपा था ऐसा काला राज, पुलिस भी देखकर रह गई सन्न

 


कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों की मर्यादा और इंसानियत दोनों को शर्मसार कर दिया। पुलिस ने 26 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसने अपनी ही नाबालिग चचेरी बहनों के साथ यौन उत्पीड़न किया, उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बनाए तथा उन्हें अपने गूगल क्लाउड अकाउंट में सुरक्षित करके रखा। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले का खुलासा एक ईमेल अलर्ट के बाद हुआ, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई।

हालांकि पुलिस ने अभी तक आरोपी की पहचान सार्वजनिक नहीं की है क्योंकि मामले में नाबालिग पीड़िताएं शामिल हैं और जांच जारी है।

गूगल से मिले इनपुट के बाद खुली जांच

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस को एक तकनीकी सूचना (ईमेल) मिलने के बाद संबंधित डिजिटल अकाउंट की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान कथित रूप से क्लाउड स्टोरेज में कई आपत्तिजनक फोटो और वीडियो मिले। इसके बाद साइबर टीम और स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने मोबाइल फोन के जरिए आपत्तिजनक सामग्री रिकॉर्ड कर उसे ऑनलाइन क्लाउड स्टोरेज में सेव कर रखा था।

15 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो मिलने का दावा

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी के डिजिटल डिवाइस और क्लाउड स्टोरेज से 15 से अधिक आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें बरामद होने का दावा किया गया है। इनमें अधिकांश सामग्री परिवार की नाबालिग लड़कियों से संबंधित बताई जा रही है।

फॉरेंसिक जांच के लिए मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर लिया गया है। विशेषज्ञ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या यह सामग्री कहीं साझा भी की गई थी या केवल स्टोर करके रखी गई थी।

परिवार को भी नहीं था शक

बताया जा रहा है कि आरोपी लंबे समय से परिवार के बीच सामान्य व्यवहार करता था। किसी को इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि वह कथित रूप से इस तरह के अपराध को अंजाम दे रहा है। पुलिस अब पीड़ित बच्चियों और उनके परिजनों के बयान दर्ज कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की जा सके।

आरोपी को भेजा गया जेल

पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं, बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की उपयुक्त धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। अंतिम धाराएं जांच के आधार पर तय होंगी।

डिजिटल सबूत बने सबसे बड़ा आधार

जांच एजेंसियों का मानना है कि आज के समय में डिजिटल साक्ष्य कई गंभीर अपराधों का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मोबाइल फोन, क्लाउड स्टोरेज, ईमेल और अन्य ऑनलाइन सेवाओं से प्राप्त जानकारी कई मामलों में जांच को नई दिशा देती है।

इस मामले में भी डिजिटल डेटा की फॉरेंसिक जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बच्चों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा केवल बाहरी लोगों से ही नहीं, बल्कि परिचितों और परिवार के भीतर भी सुनिश्चित करना आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को 'गुड टच-बैड टच' की जानकारी देना, उनकी बातों को गंभीरता से सुनना और किसी भी असामान्य व्यवहार पर तुरंत ध्यान देना बेहद जरूरी है।

पुलिस की अपील

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी बच्चे के साथ किसी भी प्रकार के यौन उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग या आपत्तिजनक वीडियो बनाने जैसी घटना की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। समय पर शिकायत मिलने से पीड़ितों को न्याय दिलाने और अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलती है।

महत्वपूर्ण नोट

यह समाचार उपलब्ध प्रारंभिक पुलिस जानकारी और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अदालत का अंतिम निर्णय आना बाकी है। इसलिए आरोपी को दोषी मानना न्यायालय के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा।

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