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"मेरा अपहरण हो गया... बचाओ!" 12 साल के बच्चे की एक चीख से रातभर दौड़ती रही पुलिस, सुबह सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

 


गोरखपुर (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पहले पुलिस और स्थानीय लोगों को घंटों तक परेशान रखा, लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो हर कोई हैरान रह गया। 12 वर्षीय एक छात्र ने सड़क पर जोर-जोर से चिल्लाकर दावा किया कि उसका अपहरण कर लिया गया है। उसकी चीख-पुकार सुनकर राहगीरों में हड़कंप मच गया और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए देर रात तक तलाश अभियान चलाया, सीसीटीवी फुटेज खंगाले और मोटरसाइकिल का पीछा करते हुए परिवार तक पहुंच गई। जांच पूरी होने पर पता चला कि किसी प्रकार का अपहरण नहीं हुआ था। पुलिस के अनुसार, बच्चे ने गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल और पढ़ाई शुरू होने से बचने के लिए यह पूरा नाटक किया था।

सड़क पर अचानक गूंजने लगी चीख

पुलिस के अनुसार, घटना मंगलवार रात की है।

12 वर्षीय आर्यन, जो कक्षा छह का छात्र है, गर्मी की छुट्टियां अपने मामा रवि मिश्रा के घर, राप्तीनगर में बिता रहा था।

मंगलवार को उसकी मां शालिनी देवी उसे वापस अपने घर ले जाने के लिए अपने भाई के यहां पहुंचीं। रात लगभग 10 बजे तीनों एक मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे।

बताया गया कि घर से लगभग 100 मीटर दूर पहुंचते ही आर्यन अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगा।

उसने कथित तौर पर राह चलते लोगों से कहा—

"मेरा अपहरण हो गया है... मुझे बचाइए... ये लोग मुझे जबरदस्ती ले जा रहे हैं।"

इतना सुनते ही आसपास मौजूद लोग चौंक गए।

लोगों ने तुरंत पुलिस को दी सूचना

बच्चे की आवाज सुनकर स्थानीय लोगों को लगा कि वास्तव में किसी बच्चे का अपहरण हो रहा है।

कई लोगों ने बिना देर किए पुलिस कंट्रोल रूम और स्थानीय थाने को सूचना दे दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस तत्काल सक्रिय हो गई।

रातभर चला पुलिस का सर्च ऑपरेशन

सूचना मिलने के बाद चिलुआताल और शाहपुर थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की।

पुलिस ने सबसे पहले आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली ताकि मोटरसाइकिल और उसमें बैठे लोगों की पहचान की जा सके।

सीसीटीवी के आधार पर पुलिस मोटरसाइकिल तक पहुंची और देर रात लगभग 2 बजे शास्त्री नगर स्थित परिवार के घर पहुंच गई।

खुला पूरा राज

जब पुलिस ने परिवार और बच्चे से अलग-अलग पूछताछ की तो पूरा मामला सामने आ गया।

पुलिस के अनुसार, आर्यन का किसी ने अपहरण नहीं किया था।

दरअसल, वह अपने मामा और नानी के साथ ही रहना चाहता था और वापस अपने घर नहीं जाना चाहता था।

उसका मानना था कि घर लौटते ही गर्मी की छुट्टियां खत्म हो जाएंगी और उसे फिर से स्कूल जाना पड़ेगा।

इसी कारण उसने रास्ते में अपहरण का नाटक किया ताकि लोग उसे अपने मामा के घर से ले जाने से रोक दें।

मां ने भी बताई वजह

पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आर्यन की मां ने भी बताया कि उनका बेटा ननिहाल में काफी खुश था और वापस घर लौटना नहीं चाहता था।

परिजनों ने बताया कि वह छुट्टियों के दौरान अपने मामा और नानी के साथ काफी समय बिता चुका था और वहीं रहना चाहता था।

पुलिस अधिकारी ने क्या कहा?

चिलुआताल थाना प्रभारी सूरज सिंह ने बताया कि जांच में स्पष्ट हो गया कि बच्चे का कोई अपहरण नहीं हुआ था।

उन्होंने बताया कि—

  • बच्चा अपनी मां और मामा के साथ ही था।

  • किसी अज्ञात व्यक्ति की भूमिका नहीं मिली।

  • बच्चा केवल ननिहाल में रहना चाहता था।

  • पढ़ाई और स्कूल शुरू होने के कारण उसने ऐसा कदम उठाया।

पुलिस ने बताया कि मामला पूरी तरह पारिवारिक था और किसी आपराधिक घटना की पुष्टि नहीं हुई।

मासूम की सोच ने सबको चौंकाया

इस घटना ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कई बार छोटे बच्चे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए ऐसे तरीके अपनाते हैं, जिनके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के मन में स्कूल, पढ़ाई या वातावरण बदलने को लेकर कई बार तनाव या असहजता हो सकती है।

ऐसे में अभिभावकों को बच्चों से खुलकर बातचीत करनी चाहिए ताकि वे अपनी भावनाएं बिना डर के व्यक्त कर सकें।

झूठी सूचना से बढ़ सकता था बड़ा संकट

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपहरण जैसी सूचना हमेशा अत्यंत गंभीर मानी जाती है।

ऐसी सूचना मिलने पर—

  • कई पुलिस टीमें सक्रिय होती हैं।

  • संसाधनों का उपयोग होता है।

  • अन्य महत्वपूर्ण मामलों की जांच भी प्रभावित हो सकती है।

इसलिए बच्चों को भी यह समझाना जरूरी है कि इस प्रकार की झूठी सूचना देना उचित नहीं है।

मनोवैज्ञानिक क्या कहते हैं?

बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, छुट्टियों के बाद कई बच्चों को दोबारा स्कूल जाने में मानसिक असहजता महसूस होती है।

इसे "Back-to-School Anxiety" भी कहा जाता है।

ऐसी स्थिति में—

  • बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें।

  • उनसे उनकी भावनाओं के बारे में बात करें।

  • पढ़ाई को बोझ के बजाय रोचक बनाने का प्रयास करें।

  • धीरे-धीरे नियमित दिनचर्या में वापस लाएं।

सोशल मीडिया पर भी चर्चा

घटना सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया।

कुछ लोगों ने बच्चे की मासूमियत पर टिप्पणी की, जबकि कई लोगों ने कहा कि इस तरह की झूठी सूचना से पुलिस का बहुमूल्य समय नष्ट होता है और इससे वास्तविक आपातकालीन मामलों पर भी असर पड़ सकता है।

गोरखपुर की यह घटना पहली नजर में एक अपहरण का मामला लग रही थी, लेकिन पुलिस की जांच में पूरी कहानी कुछ और ही निकली। एक 12 वर्षीय छात्र ने केवल इसलिए अपहरण का नाटक रच दिया क्योंकि वह अपनी ननिहाल छोड़कर घर नहीं लौटना चाहता था और स्कूल दोबारा शुरू होने से बचना चाहता था। यह घटना न केवल बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने की आवश्यकता बताती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि किसी भी प्रकार की झूठी आपातकालीन सूचना के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

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